गंगा में प्रदूषण पर बिहार सरकार को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने NGT के आदेश पर लगाई रोक

गंगा में प्रदूषण पर बिहार सरकार को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने NGT के आदेश पर लगाई रोक

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को गंगा नदी में प्रदूषण रोकने में विफल रहने के आरोप में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) द्वारा लगाए गए 50,000 रुपये के जुर्माने से राहत दे दी है। शीर्ष अदालत ने इस आदेश पर रोक लगाते हुए केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है और चार हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश

न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि NGT गंगा नदी के प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण के मुद्दे पर विचार कर रहा है। इस मामले को उन सभी राज्यों और जिलों के संदर्भ में देखा जा रहा है, जहां से गंगा और उसकी सहायक नदियां बहती हैं।

पीठ ने कहा कि बिहार सरकार को NGT द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन नहीं करने के कारण यह जुर्माना लगाया गया था, लेकिन फिलहाल इस पर रोक रहेगी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को इस मामले पर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

NGT का आदेश और बिहार सरकार की प्रतिक्रिया

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने अक्टूबर 2024 में बिहार सरकार पर गंगा नदी में प्रदूषण की रोकथाम के लिए समुचित प्रयास न करने का आरोप लगाया था। आदेश में कहा गया था कि राज्य सरकार ने NGT द्वारा निर्धारित निर्देशों का पालन नहीं किया और जल गुणवत्ता से संबंधित कोई रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की।

NGT ने बिहार राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया था कि वे अगली सुनवाई पर वस्तुतः उपस्थित हों और गंगा नदी के प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण आदेश 2016 के तहत उठाए गए कदमों की जानकारी दें। लेकिन इस मामले में कोई संतोषजनक जवाब न मिलने पर अधिकरण ने सरकार पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया था।

गंगा नदी में प्रदूषण और उठाए गए कदम

गंगा नदी में बढ़ते प्रदूषण को लेकर सरकारें लंबे समय से प्रयासरत हैं। बिहार सरकार ने पहले दावा किया था कि वह गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों की स्वच्छता बनाए रखने के लिए कई योजनाएं चला रही है। इनमें सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) लगाना, औद्योगिक कचरे की निगरानी और जल परीक्षण शामिल हैं। हालांकि, NGT ने राज्य सरकार की रिपोर्ट को असंतोषजनक बताया था।

सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब बिहार सरकार को अपने बचाव में चार हफ्तों के भीतर जवाब दाखिल करना होगा। इस मामले की अगली सुनवाई में यह तय होगा कि बिहार सरकार को गंगा नदी में प्रदूषण नियंत्रण के लिए और कौन-कौन से ठोस कदम उठाने होंगे।

गंगा नदी की स्वच्छता को लेकर भविष्य की दिशा

गंगा नदी की सफाई को लेकर केंद्र और राज्य सरकारें कई योजनाएं चला रही हैं, लेकिन इसके बावजूद नदी का जलस्तर प्रदूषित होता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा की सहायक नदियों के जल की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है, जिससे बिहार और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में पेयजल संकट भी गहराता जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के इस हस्तक्षेप के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बिहार सरकार अपने जवाब में किन ठोस नीतियों और योजनाओं को पेश करती है। गंगा की स्वच्छता को लेकर इस कानूनी लड़ाई के नतीजे देश के पर्यावरणीय कानूनों के क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकते

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