वृंदावन में चंदन के रथ पर सवार होंगे भगवान रंगनाथ, 17 मार्च से शुरू होगा भव्य रथ मेला, 23 मार्च को होंगे चंदन रथ के दर्शन

वृंदावन में चंदन के रथ पर सवार होंगे भगवान रंगनाथ, 17 मार्च से शुरू होगा भव्य रथ मेला, 23 मार्च को होंगे चंदन रथ के दर्शन

वृंदावन। श्रीकृष्ण की पावन नगरी वृंदावन में श्री रंगनाथ मंदिर का दस दिवसीय भव्य रथ मेला 17 मार्च से प्रारंभ होने जा रहा है। इस दिव्य महोत्सव में भगवान रंगनाथ अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए विविध सवारियों पर नगर भ्रमण करेंगे। खास बात यह है कि 23 मार्च को भगवान गोदा रंगमन्नार चंदन निर्मित भव्य रथ में विराजमान होकर भक्तों को कृतार्थ करेंगे।

श्री रामानुज संप्रदाय के इस ऐतिहासिक मंदिर में 175 वर्षों से ब्रह्मोत्सव मनाने की परंपरा चली आ रही है। यह पर्व दक्षिण भारतीय शैली में होने वाले विशेष अनुष्ठानों के साथ संपन्न किया जाता है, जिसमें वैदिक परंपराओं का विधिपूर्वक पालन किया जाता है। मंगलवार को मंदिर प्रबंधन द्वारा पत्रकार वार्ता आयोजित की गई, जिसमें मंदिर के स्वामी रघुनाथ आचार्य और मंदिर की सीईओ अनघा श्रीनिवासन ने इस आयोजन की विस्तृत जानकारी दी।

10 दिन तक चलेगा भव्य आयोजन
इस ब्रह्मोत्सव के दौरान हर दिन सुबह और शाम भगवान की अलग-अलग सवारियां नगर भ्रमण के लिए निकलेंगी। 17 मार्च को ध्वजारोहण और देव आह्वान के साथ इस उत्सव की शुरुआत होगी। इसके पश्चात प्रतिदिन भगवान विभिन्न वाहनों—स्वर्ण और रजत निर्मित सूर्यप्रभा, चंद्रप्रभा, गरुण, हनुमान, पालकी, सिंह, अश्व, सिंहशार्दुल पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे।

22 मार्च को होगी होली, 24 मार्च को भव्य आतिशबाजी
दक्षिण भारतीय शैली के मंदिरों में आमतौर पर होली नहीं खेली जाती, लेकिन ब्रजभूमि में स्थित होने के कारण रंगनाथ मंदिर में हर साल धूमधाम से होली मनाई जाती है। इस वर्ष मंदिर प्रांगण में होली उत्सव 22 मार्च को आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा, 24 मार्च को भव्य आतिशबाजी का आयोजन होगा, जो मेले के आकर्षण का केंद्र रहेगा।

23 मार्च को चंदन रथ यात्रा
मंदिर के प्रबंधक श्री कृष्णन ने बताया कि 23 मार्च को चंदन से निर्मित विशालकाय रथ में भगवान गोदा रंगमन्नार नगर भ्रमण करेंगे। यह रथ यात्रा भक्तों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण होती है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।

26 मार्च को होगा समापन
इस भव्य महोत्सव का समापन 26 मार्च को अद्वितीय पुष्पक विमान आयोजन के साथ होगा। इस दिन भगवान को विशेष वैदिक मंत्रों के साथ स्वर्ण स्तंभ पर विराजमान गरुड़ जी को विदाई दी जाएगी।

मंदिर प्रबंधन ने भक्तों से आग्रह किया है कि वे इस पावन अवसर पर अधिक से अधिक संख्या में आकर भगवान के दिव्य दर्शन करें और इस ऐतिहासिक मेले का आनंद लें।

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