
मुंबई, 24 फरवरी 2021
नीतीश समर्थक सांसद मोहन संजीभाई डेलकर की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गयी। इससे जदयू के देशव्यापी विस्तार की उम्मीदों को झटका लगा है। मोहन डेलकर केन्द्रशासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली के निर्दलीय सांसद थे। नीतीश कुमार से मुलाकात के बाद उन्होंने दादरा और नगर हवेली में जदयू को खड़ा किया था। मोहन संजीभाई डेलकर की मदद से जदयू ने पिछले साल दादरा और नगर हवेली जिला पंचायत पर कब्जा जमाया था। जदयू ने 20 में से 17 सीटें जीती थीं। दादरा और नगर हवेली पहले केन्द्र शासित राज्य था। लेकिन 2019 में केन्द्र सरकार ने दादरा नगर हवेली और दमन-दीव को मिला कर एक केन्द्र शासित प्रदेश बना दिया था। दादरा और नगर हवेली 491 किलोमीटर में फैला है जिसके उत्तर में गुजरात और दक्षिण में महाराष्ट्र है। इस केन्द्र शासित इलाके में 70 गांव हैं। यह एक आदिवासी बहुल इलाका है। कुल आबादी का 60 फीसदी हिस्सा जनजातीय समुदाय का है। मोहन डेलकर आदिवासी हितों के लिए संघर्षरत थे। बिहार के बाहर एक सुदूर इलाके में जदयू का विस्तार, नीतीश कुमार के लिए बड़ी उपलब्धि थी।

जदयू ने भाजपा को दी थी पटखनी
दादरा और नगर हवेली के जिला पंचायत पर पहले कांग्रेस का कब्जा था। 2015 के चुनाव में यहां कांग्रेस को जीत मिली थी। लेकिन नवम्बर 2020 के चुनाव में मोहन डेलकर ने अपने दम पर जदयू को मैदान में उतारा। इस चुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा से था। बिहार की सत्ता में साझेदार भाजपा और जदयू ने यहां एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा था। मोहन डेलकर यहां से सात बार सांसद चुने गये थे। उनकी लोकप्रियता के आगे भाजपा टिक नहीं पायी। जदयू को 20 में 17 तो भाजपा को केवल 3 सीटों पर ही जीत मिली थी। यानी मोहन डेलकर की मदद से जदयू ने भाजपा को जोरदार पटखनी दी थी। कुछ लोगों का कहना है कि निर्दलीय सांसद मोहन डेलकर जदयू में शामिल हो गये थे किंतु कुछ कानूनी औपचारिकताएं बाकी थीं। उन्होंने पिछले हफ्ते ही जदयू के नेताओं के साथ दादरा और नगर हवेली की राजनीतिक संभावनाओं पर बात की थी। खबरों के मुताबिक मोहन डेलकर एक विशेष काम से मुम्बई आये हुए थे। ड्राइवर और बॉडीगार्ड उके साथ थे। वे एक होटल में रुके थे जहां उनकी संदेहास्पद स्थितियों में मौत हो गयी।
सांसद ने क्यों की आत्महत्या ?
मोहन डेलकर की जिस होटल में मौत हुई है वहां से पुलिस को एक सुसाइड नोट भी मिला है। पुलिस के मुताबिक छह पन्नों के इस सुसाइड नोट में चालीस लोगों के नाम हैं। यह गुजराती भाषा में लिखा हुआ है। अब सवाल ये है कि एक अनुभवी सांसद होने के बावजूद उन्होंने आत्महत्या क्यों की ? खबरों के मुताबिक मोहन डेलकर के ड्राइवर ने सोमवार की सुबह उनके कमरे के दरवाजे पर दस्तक दी। काफी देर कोशिश करने के बाद जब दरवाजा नहीं खुला तो ड्राइवर ने उनके सेल फोन पर कॉल किया। लेकिन कोई उत्तर नहीं मिला। फिर ड्राइवर ने दादरा और नगर हवेली स्थित उनके घर पर फोन कर ये बात बतायी। परिजनों ने भी डेलकर को फोन किया। लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। तब ड्राइवर को होटल प्रबंधन से बात करने के लिए कहा गया। होटल के कर्मचारी आये। उन्होंने कमरे को खोलने की कोशिश की तो दरवाजे के अंदर से बंद पाया। इसके बाद ड्राइवर किसी तरह डेलकर के कमरे की बाल्कोनी में दाखिल हुआ। फिर वह कमरे में गया। उसने देखा कि डोल्कर की गर्दन में एक शॉल लिपटा है और उनका शरीर एक पंखे से लटका हुआ है। तब ड्राइवर ने होटल के कर्मचारियों को ये बात बतायी। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गयी।
सांसद ने अधिकारियों पर लगाया था आरोप
मोहन डेलकर की संदेहास्पद मौत के बाद यूट्यूब पर उनका एक वीडियो चर्चा में है। इस वीडियो में मोहन डेलकर का वह भाषण है जो उन्होंने पिछले साल लोकसभा में दिया था। इस वीडियो वे कहते सुने जा रहे हैं, ‘पिछले चार महीने से कुछ अधिकारी मुझे अपमानित करने की कोशिश कर रहे हैं। वे मुझे किसी झूठे केस में फंसाने की कोशिश में भी हैं। कोरोना महामारी के समय कुछ अधिकारियों ने मुझे फंसाने की कोशिश की थी। वे मुझे एक सांसद के रूप में ठीक से काम भी नहीं करने दे रहे। दादरा नगर हवेली के मुक्ति दिवस पर मुझे भाषण देने से भी रोक दिया गया। जब मैंने कारण पूछा तो अफसरों और कार्यक्रम के आयोजकों ने मेरे साथ बदसलूकी की।’ क्या कोई अधिकारी इतना दुष्साहस कर सकता है कि वह एक सांसद का अपमान करे ? मोहन डेलकर ने लोकसभा में ये सवाल उठा कर लोगों को चौंका दिया था। सांसद मोहन डेलकर की संदेहास्पद मौत ने भारतीय राजनीति को झकझोर दिया है। पुलिस इस हाईप्रोफाइल मामले की जांच में जुटी हुई है।







