प्रयागराज के महाकुंभ 2025 से पहले किन्नर अखाड़े में बड़ा विवाद सामने आया है। 28 जनवरी को महामंडलेश्वर बनीं ममता कुलकर्णी को उनके पद से हटा दिया गया है। इसके साथ ही महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को भी निष्कासित कर दिया गया है। अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास ने इस निर्णय की घोषणा की और बताया कि यह कार्रवाई परंपराओं के उल्लंघन के चलते की गई है।
ममता कुलकर्णी की तीन बड़ी गलतियां
वैजन्ती माला की जगह रुद्राक्ष माला पहनाई गई
किन्नर अखाड़े की परंपरा के अनुसार महामंडलेश्वर बनने वाले संन्यासियों को वैजन्ती माला पहनाई जाती है, लेकिन ममता कुलकर्णी को इसके बजाय रुद्राक्ष माला पहनाई गई। यह अखाड़े की परंपराओं के विरुद्ध था और इसे गंभीर गलती माना गया।
संन्यास नियमों का पालन नहीं हुआ, मुंडन नहीं करवाया गया
महामंडलेश्वर बनने के लिए संन्यास ग्रहण करने की परंपरा के तहत मुंडन करवाना आवश्यक होता है, लेकिन ममता कुलकर्णी का मुंडन नहीं किया गया। इससे संन्यास की प्रक्रिया अधूरी मानी गई, जो सनातन परंपराओं के खिलाफ था।
वैराग्य की प्रक्रिया अपनाए बिना महामंडलेश्वर पद दिया गया
महामंडलेश्वर बनने के लिए व्यक्ति को वैराग्य की प्रक्रिया से गुजरना होता है, लेकिन ममता कुलकर्णी को बिना वैराग्य की स्वीकृति के ही पद दिया गया। इसे सनातन धर्म की परंपराओं का उल्लंघन माना गया।
अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास की प्रतिक्रिया
ऋषि अजय दास ने इस पूरे घटनाक्रम पर नाराजगी जताते हुए कहा, “हमारे अखाड़े की परंपराओं से समझौता नहीं किया जा सकता। जो भी नियमों का पालन नहीं करेगा, उसे अखाड़े में स्थान नहीं मिलेगा।” उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही नए महामंडलेश्वर का ऐलान किया जाएगा, जिससे अखाड़े की मर्यादा बनी रहे।
लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
अखाड़े से निष्कासित की गई लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने इस निर्णय को अनुचित बताया और कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही। उन्होंने कहा, “यह निर्णय पक्षपातपूर्ण है और मैं इसे कोर्ट में चुनौती दूंगी।”
अब सबकी नजर इस पर है कि नए महामंडलेश्वर की नियुक्ति कब होती है और क्या यह विवाद आगे और बढ़ेगा।




