केंद्र डाल-डाल, नीतीश पात-पात: आर्थिक संकट से जूझते बिहार ने पीएम के नाम की योजना बंद कर सीएम के नाम शुरू की

केंद्र डाल-डाल, नीतीश पात-पात: आर्थिक संकट से जूझते बिहार ने पीएम के नाम की योजना बंद कर सीएम के नाम शुरू की

केंद्र और बिहार सरकार में ठनी है, यह अब योजनाओं का लाभ उठाने वाले भी जान जाएंगे। एक तरफ आर्थिक हालत को लेकर राज्य सरकार केंद्र से पैकेज की उम्मीद कर रही तो दूसरी तरफ उसने पीएम के नाम से चल रही केंद्रीय योजना बंद कर सीएम के नाम से शुरू कर दी है। पीएम वाली योजना में 50 प्रतिशत राज्यांश जाता था, अब 100 प्रतिशत राज्यांश के साथ सीएम के नाम की योजना शुरू की गई है। राज्य में पीएम के नाम वाली वह योजना पूरी तरह बंद कर दी गई है। कैबिनेट ने इसपर मुहर लगा दी है।

वजह बताई कि नौवीं और दसवीं को नहीं दे रहा केंद्र
नए साल की पहली कैबिनेट मीटिंग में निर्णय लिया गया है कि राज्य में पीएम यशस्वी योजना बंद कर दी जाएगी। वजह बताई गई कि इस केंद्रीय योजना में पहली से आठवीं तक के छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति दी जा रही थी, लेकिन 9वीं और 10वीं के विद्यार्थियों को नहीं। इस आधार पर केंद्रीय योजना को बंद करते हुए राज्य सरकार ने पहली से दसवीं तक के सवा करोड़ विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देगी। राज्य की ओर से शुरू की गई योजना का नाम ‘मुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना’ रखा गया है।

50 से 150 रुपये प्रतिमाह मिलेगी स्कॉलरशिप
कैबिनेट के फैसले के बाद अपर मुख्य सचिव डॉ. एस. सिद्धार्थ ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2022-23 से ही इस योजना के तहत छात्रवृत्ति दी जाएगी। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, योजना के हकदार पिछड़ा एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थी होंगे। शर्त रहेगी कि विद्यार्थी सरकारी विद्यालय, सरकारी मान्यता प्राप्त या स्थापना प्रस्वीकृत विद्यालय में पढ़े। इसमें पहली से चौथी कक्षा तक के विद्यार्थियों को 50 रुपये प्रतिमाह, पांचवीं-छठी के कक्षा के विद्यार्थियों को 100 रुपये प्रतिमाह और सातवीं से दसवीं तक के विद्यार्थियों को 150 रुपये प्रतिमाह की छात्रवृत्ति दी जाएगी। योजना के तहत छात्रावासों में रहकर पढ़ने वाले विद्यार्थियों को 250 रुपये प्रतिमाह की छात्रवृत्ति दी जाएगी।

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