मुंबई, 14 फरवरी 2021

शिवसेना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आंदोलनजीवी’ शब्द के इस्तेमाल पर जबरदस्त हमला बोला है। शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘आंदोलनजीवी’ शब्द का इस्तेमाल कर तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन करने वाले किसानों और भारत की आजादी के लिए संघर्ष करने वाले क्रांतिकारियों का अपमान किया है।

शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादकीय में कहा गया है कि अगर भाजपा राम मंदिर और महंगाई सहित कई मुद्दों पर आंदोलन नहीं करती तो भाजपा का इस तरह का उल्लेखनीय उभार नहीं होता। संपादकीय में आगे कहा गया, ‘प्रधानमंत्री ने देश में किये गए आंदोलनों का मजाक उड़ाया है। भाजपा ने आपातकाल से लेकर अयोध्या आंदोलन तक, महंगाई से लेकर कश्मीर से अनुच्छेद-370 के हटाने तक अपना आंदोलन जारी रखा। अगर राम मंदिर आंदोलन नहीं हुआ होता, तो भाजपा आज दिखाई नहीं देती। जब पीएम मोदी ने प्रदर्शनकारियों को आंदोलनजीवी कहकर उनका मजाक उड़ाया तो उससे स्वतंत्रता आंदोलन का भी अपमान हुआ।’

शिवसेना ने बीजेपी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अनुच्छेद 370 को हटाने के लिए विरोध किया और अब उनके बलिदान को ‘आंदोलनजीवी’ कहा जा रहा है। संपादकीय में आगे लिखा गया है, ‘बीजेपी के आंदोलनों को फिर क्या कहा जाना चाहिए? बीजेपी ने कई आंदोलन किये हैं। इसका मतलब भाजपा ने ये सभी आंदोलन अपने राजनीतिक हित को साधने के लिए और सत्ता में आने के लिए किए। कश्मीर से अनुच्छेद 370 का निराकरण भाजपा के जीवन का सबसे बड़ा आंदोलन था। श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने इसके लिए आंदोलन किया। इसका मतलब श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान को आंदोलनजीवी कहा जा रहा है। जब क्रांतिकारी सत्ता में आते हैं, तो वे सबसे पहले क्रांतिकारियों के आदर्शों का बलिदान लेते हैं। हमारे देश में यही हो रहा है।’

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने 8 फरवरी को राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए आंदोलनजीवी शब्द का उल्लेख किया था। उन्होंने कहा था कि देश में ‘आंदोलनजीवी’ नाम का एक नया समुदाय उभरकर आया है, जिसे हर विरोध में देखा जा सकता है और वे राष्ट्र के लिए परजीवी हैं।