लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election) को इस बार दो ध्रुवीय बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किया जा रहा है। एक तरफ भारतीय जनता पार्टी (Bhartiya Janta Party) तो दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) दिखती है। अन्य दलों को चुनावी लड़ाई से बाहर करने की कोशिश शुरुआती दिनों से ही हो रही है। पहले सीएम योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने चुनावी मैदान में उतरने की घोषणा की। इसके बाद अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) भी चुनावी मैदान में कूद पड़े। मैनपुरी के करहल विधानसभा सीट (Karhal Assembly Seat) से समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव चुनावी मैदान में उतरे हैं। वहीं, योगी ने गोरखपुर शहर विधानसभा सीट (Gorakhpur Sadar Vidhan Sabha Seat) से पर्चा दाखिल किया है।
समाजवादी पार्टी की ओर से सीएम योगी आदित्यनाथ को घेरने की योजना तैयार की गई। गोरखपुर शहर सीट से भाजपा विधायक राधामोहन दास अग्रवाल को पहले सपा ने अपने पाले में लाने की कोशिश की। वे तैयार नहीं हुए। इसके बाद पार्टी ने सोमवार को सुभावती शुक्ल को उम्मीदवार घोषित किया। शुक्रवार को योगी के नामांकन के चार दिन बाद सपा ने उम्मीदवार ही तय किया है।
कौन हैं सुभावती शुक्ला?
सुभावती शुक्ला गोरखपुर के वरिष्ठ BJP नेता दिवंगत उपेंद्र शुक्ला (Upendra Shukla) की पत्नी हैं. शुक्ला उत्तर प्रदेश में BJP के उपाध्यक्ष और उसके पहले क्षेत्रीय अध्यक्ष थे. 2017 में गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद, उनके इस्तीफे से रिक्त हुई सीट पर भाजपा ने शुक्ला को 2018 में उम्मीदवार बनाया था. शुक्ला यह चुनाव सपा गठबंधन के उम्मीदवार से हार गये थे. मई 2020 में ब्रेन हेमरेज के कारण शुक्ला का निधन हो गया. शुक्ला एक लोकप्रिय नेता थे और उन्हें पूर्वांचल क्षेत्र में भाजपा के ब्राह्मण चेहरे के रूप में देखा जाता था.
सुभावती 20 जनवरी को लखनऊ में अपने दो बेटों के साथ समाजवादी पार्टी (SP) में शामिल हुई थीं. उन्होंने कहा, ‘मैं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को धन्यवाद देना चाहती हूं कि उन्होंने मुझ जैसी कमजोर और असहाय महिला को सम्मान दिया. मैं उनसे रिकॉर्ड वोटों के साथ जीत दर्ज करने का वादा करती हूं.’
गोरखपुर में वोटरों का गणित अहम
गोरखपुर सदर सीट पर करीब 4.50 लाख वोटर हैं, जिनमें सबसे अधिक कायस्थ वोटरों की संख्या है। यहां कायस्थ 95 हजार, ब्राह्मण 55 हजार, मुस्लिम 50 हजार, क्षत्रिय 25 हजार, वैश्य 45 हजार, निषाद 25 हजार, यादव 25 हजार, दलित 20 हजार इसके अलावा पंजाबी, सिंधी, बंगाली और सैनी कुल मिलाकर करीब 30 हजार वोटर अनुमानित हैं। हालांकि, कहा जाता है कि सभी जातियों के वोटर चुनाव में जाति को देखकर नहीं, बल्कि गोरखनाथ मंदिर यानी योगी आदित्यनाथ के नाम पर वोट देते हैं। ऐसे में सुभावती शुक्ल के जरिए ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की समाजवादी पार्टी की कोशिश की जा रही है। इसका परिणाम तो चुनाव ही बताएगा।




