उत्तराखंड चुनाव: ये हैं इस बार के बड़े चुनावी मुद्दे, पढ़िए SDC सर्वे की पूरी रिपोर्ट

उत्तराखंड चुनाव: ये हैं इस बार के बड़े चुनावी मुद्दे, पढ़िए SDC सर्वे की पूरी रिपोर्ट

Uttarakhand Election 2022:उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव-2022 में इस बार भी रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा ही सबसे बड़े चुनावी मुद्दे बनने जा रहे हैं। यह बात एसडीसी फाउंडेशन द्वारा जनता से लिए गए फीडबैक के आधार पर बनाई गई रिपोर्ट में सामने आई है।  एसडीसी फाउंडेशन ने ‘मूड ऑफ उत्तराखंड’ सर्वे के तहत चुनावी मुद्दों को लेकर जनता से राय मांगी थी।

फाउंडेशन के अध्यक्ष अनूप नौटियाल ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर आम लोगों से राज्य के विधानसभा चुनाव में प्रमुख मुद्दों को लेकर राय मांगी थी। लोगों से पूछा गया था कि आगामी विधानसभा चुनाव में राज्य में सबसे बड़ा मुद्दा क्या होगा? इस आयोजन में कुल 203 लोगों ने प्रतिभाग किया। इसमें से 141 ने फेसबुक और 62 ने ट्वटर पर राय दी। नौटियाल ने बताया कि अधिकांश लोगों ने एक से कई ज्यादा मुद्दों को चिह्नित किया।

46% ने कहा-रोजगार और स्वास्थ्य बड़ा मुद्दा
नौटियाल ने बताया कि सोशल मीडिया यूजर्स से मिली प्रतिक्रिया का विश्लेषण करें तो साफ है कि इस बार भी चुनाव में रोजगार और स्वास्थ्य सुविधाएं सबसे बड़ा मुद्दा रहेंगी। सर्वे में सबसे ज्यादा 46 प्रतिशत यूजर्स ने पहले नंबर पर रोजगार और दूसरे नंबर पर हेल्थ केयर को मुद्दा बताया। तीसरे नंबर पर शिक्षा का मुद्दा रहा। सर्वे में 34 प्रतिशत लोगों ने शिक्षा को चुनावी मुद्दा माना।

25 प्रतिशत ने भू-कानून तो पांच प्रतिशत ने गैरसैंण को मुद्दा माना
नौटियाल के अनुसार, सर्वे में शामिल लोगों में से 25% ने भू-कानून को विधानसभा चुनाव में चौथा सबसे बड़ा मुद्दा माना। 22% लोगों के लिए पलायन व 14% लोगों के लिए भ्रष्टाचार विधानसभा चुनावों में सबसे बड़ा मुद्दा है। इसके अलावा 12 प्रतिशत लोगों की नजर में इंफ्रास्ट्रक्चर और 8 प्रतिशत लोगों की नजर में पर्यावरण प्रमुख चुनावी मुद्दा है। सर्वे में शामिल हुए पांच प्रतिशत लोगों ने गैरसैंण राजधानी और तकरीबन इतने ही लोगों ने बिजली -पानी के विषय को प्रमुख चुनावी मुद्दा माना है। रिपोर्ट तैयार करने में संस्था के विदुष पांडे, प्यारे लाल और प्रवीण उप्रेती का सहयोग रहा।

यह रिपोर्ट दो सौ से ज्यादा लोगों की ऑनलाइन राय के आधार पर बनाई गई है। इसे पूरी तरह वैज्ञानिक तो नहीं कहा जा सकता पर यह राज्य की जनता के मूड
की ओर संकेत करता है। सियासी दलों को पब्लिक के मूड के अनुसार मैनिफेस्टो व नीतियां तय करनी चाहिए।
अनूप नौटियाल, अध्यक्ष, एसडीसी फाउंडेशन  

 

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