देहरादून, 15 अक्टूबर 2021

कांग्रेस में वापसी करने वाले दलित नेता यशपाल आर्य ने साफ तौर पर कह दिया ​है कि वह आगामी विधानसभा चुनाव में ऊधमसिंह नगर की बाजपुर सीट से ही उम्मीदवारी करेंगे. जबकि उनके बेटे संजीव आर्य की नैनीताल सीट को लेकर फिलहाल संकट बना हुआ है. पिता पुत्र ने भाजपा से कांग्रेस में आने के बारे में प्रतिक्रियाओं का उत्तर देते हुए कहा कि ‘अभी बस मूलधन आया है, ब्याज भी जल्दी आएगा.’ इसे साफ तौर पर अन्य नेताओं के कांग्रेस में आने से जोड़कर देखा जा रहा है. वहीं, आर्य के जाने से भाजपा की पुष्कर सिंह धामी सरकार में कैबिनेट मंत्री का जो पद खाली हुआ है, उसकी दौड़ में कई नाम चर्चा में आ रहे हैं.

दो बार बाजपुर सीट से चुनाव लड़ चुके यशपाल आर्य ने साफ तौर पर कहा कि उनकी कर्मभूमि बाजपुर ही रही है, वह इसे नहीं छोड़ सकते. हल्द्वानी में मीडिया से बातचीत करते हुए आर्य ने कहा कि हल्द्वानी, काशीपुर, सोमेश्वर और बागेश्वर जैसी सीटों से उनके चुनाव लड़ने की अटकलें बेमानी हैं, ‘मैं अपनी कर्मभूमि को छोड़कर कहां जाऊंगा!’ उन्होंने अन्य नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने पर कहा कि ‘अभी ढोल पीटने से लोग सतर्क हो जाएंगे.’

धामी कैबिनेट में आर्य की जगह कौन लेगा?
सबसे पहले तो यह है कि चुनाव नज़दीक हैं तो क्या यह मंत्री पद भरा जाएगा? यही अभी तय नहीं है, लेकिन माना जा रहा है कि इस पद पर आचार संहिता लगने से पहले नियुक्ति की जाएगी और आलाकमान इसे लेकर फैसला करेगा. हालांकि पूर्व कैबिनेट मंत्री खजान दास, विधायक चंदनराम और सुरेश राठौर के नाम यहां चर्चा में हैं, जबकि रायपुर से विधायक उमेश शर्मा काऊ का नाम भी इस दौड़ में अग्रणी माना जा रहा है.

आर्य के साथ काऊ के भी कांग्रेस में जाने की बात कही जा रही थी, लेकिन वह अभी भाजपा में ही हैं. हालांकि भाजपा के खिलाफ मुखर होते दिख रहे हैं. काऊ ने साफ कहा कि धामी मंत्रिमंडल में आर्य शामिल नहीं होना चाहते थे. आर्य के कांग्रेस में जाने के वक्त सांसद अनिल बलूनी के साथ दिखे काऊ के समर्थक मानकर चल रहे हैं कि उनके नेता का कद बढ़ेगा. वहीं, बीजेपी के सामने पूर्व कांग्रेसी नेताओं को साधने की चुनौती के बीच भी काऊ का नाम चर्चा के केंद्र में है.