देहरादून, 25 सितम्बर 2021

कथित लव जिहाद के कानून को और सख्त बनाए जाने के उत्तराखंड के ऐलान के बाद अब राज्य में ‘लैंड जिहाद’ को लेकर हलचल मच गई है. उत्तराखंड के बीजेपी नेता अजेंद्र अजय ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को लिखकर ऐतराज़ जताया था कि एक समुदाय विशेष के लोग पहाड़ों में ज़मीनें खरीदकर अपने पूजा स्थल बना रहे हैं. अजय ने इसे लैंड जिहाद कहा था. इस बात के एक महीने से भी कम समय के भीतर राज्य सरकार ने कहा, ‘पता चला है कि कुछ हिस्सों में एक आबादी विशेष के दखल के चलते कुछ समुदायों के सामने पलायन की समस्या खड़ी हो गई है.’ इस मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार पर हमला बोलना शुरू कर दिया है.

राज्य सरकार ने जो आधिकारिक बयान जारी किया है, टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, उसमें कहा गया, ‘कुछ हिस्सों में सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बनने की आशंका है. इस स्थिति पर चिंता ज़ाहिर करते हुए, सरकार ने डीजीपी, सभी ज़िला ​मजिस्ट्रेटों और एसएसपी स्तर के अधिकारियों को समस्या से निपटने के निर्देश दिए हैं.’ साथ ही, सरकार ने कई इलाकों में शांति समितियां बनवाए जाने की बात भी कही है.

कौन हैं अजय, जिन्होंने उठाया मुद्दा

पिछले महीने लैंड जिहाद का मुद्दा सीएम धामी के सामने रखने वाले अजय इससे पहले तब सुर्खियों मेंं आए थे, जब 2018 में उन्होंने ‘केदारनाथ’ फिल्म की रिलीज़ को प्रतिबंधित किए जाने की मांग उठाई थी. उनकी मांग के बाद राज्य में इस फिल्म को बैन भी किया गया था. ‘लैंड जिहाद’ के साथ ही अजय ने एक समुदाय विशेष की आबादी बढ़ने और पहाड़ों के कुछ समुदायों के सामने पलायन की समस्या का मुद्दा भी उठाया था. अजय दावा कर चुके हैं कि एक समुदाय विशेष ‘चोरी छुपे’ अपने पूजास्थल बना रहा है, जिससे सांप्रदायिक तनाव पैदा हो रहा है.

कांग्रेस ने सरकार को कैसे चेताया?

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के चुनाव अभियान के प्रमुख हरीश रावत ने इस मामले में दखल देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, ‘जनसंख्या वृद्धि दर का क्षेत्र के हिसाब से अध्ययन करना आवश्यक है. जिन राज्यों में अशिक्षा व कुपोषण है, स्वास्थ्य सेवाएं कमज़ोर हैं, वहां जनसंख्या वृद्धि दर गरीब तबकों में ज़्यादा है, जिनमें सभी जाति-धर्मों के लोग सम्मिलित हैं. सरकार इस दर को नियंत्रित करने के उचित कदम उठाए लेकिन समुदाय विशेष को टारगेट कर उसका राजनीतिक फायदा न उठाए. यह चिंताजनक विषय है.’