
हरिद्वार, 6 सितम्बर 2021
उत्तराखंड संस्कृत अकादमी की मुक्ति योजना को लेकर शुरू हुआ विवाद अब मुख्यमंत्री के पास जा पहुंचा है। श्रीगंगा सभा के प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को मुख्यमंत्री से वार्ता कर संस्कृत अकादमी की मुक्ति योजना को रद्द करने की मांग की है। श्रीगंगा के पदाधिकारियों की मांग पर मुख्यमंत्री ने मुक्ति योजना को रद्द करने का आश्वासन दिया है। उधर संस्कृत अकादमी के सचिव डॉ. आनंद भारद्वाज का कहना है कि मुक्ति योजना को रद्द करने के संबंध में सरकार ही कुछ निर्णय ले सकती है।
उत्तराखंड संस्कृत अकादमी की देश-विदेश के लोगों के लिए घर बैठे हरिद्वार में अस्थिविर्सन करवाने की मुक्ति योजना के विरोध में गंगा सभा और तीर्थ पुरोहित मुखर थे। विरोध-प्रदर्शन के बाद अब श्रीगंगा सभा मुख्यमंत्री के दरबार में जा पहुंची है। रविवार को श्री गंगा सभा के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री के समक्ष मुक्ति योजना का विरोध करते हुए उसे रद्द किए जाने की मांग की है। गंगा सभा के अध्यक्ष प्रदीप झा और महामंत्री तन्मय विशिष्ठ का कहना है कि अस्थि विसर्जन का परंपरागत अधिकार पुरोहितों का है।
संस्कृत अकादमी मुक्ति योजना शुरू करके पुरोहितों के कार्यों में हस्तक्षेप कर रही है। जिसे किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। महामंत्री तन्मय विशिष्ठ ने बताया कि गंगा सभा के पदाधिकारियों की मांग पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अकादमी की मुक्ति योजना रद्द करने का आश्वासन दिया है।
श्रीगंगा सभा के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को उत्तराखंड संस्कृत अकादमी की मुक्ति योजना को रदद् करने की मांग करते हुए एक ज्ञापन भी दिया। श्रीगंगा सभा के प्रतिनिधि मंडल में सभा के अध्यक्ष प्रदीप झा, महामंत्री तन्मय वशिष्ठ, स्वागत मंत्री डॉ. सिद्धार्थ चक्रपाणि, समाजकल्याण मंत्री नितिन गौतम, प्रचार मंत्री गोपाल प्रधान, सचिव शैलेष मोहन, सचिव अवधेश पटुवर, उज्ज्वल पंडित, विकास प्रधान आदि शामिल रहे।
उत्तराखंड संस्कृत अकादमी प्रदेश सरकार के अधीन कार्य करती है। ऐसे में अकादमी की मुक्ति योजना को बंद अथवा रद्द करने का निर्णय भी सरकार के स्तर पर लिया जाना है। सरकार जो निर्णय लेगी संस्कृत अकादमी उसी के अनुपालन में कार्य करेगी।







