शिक्षक भर्ती घोटाला: ED का एक और बड़ा एक्शन, TMC विधायक माणिक भट्टाचार्य अरेस्ट

शिक्षक भर्ती घोटाला: ED का एक और बड़ा एक्शन, TMC विधायक माणिक भट्टाचार्य अरेस्ट

कोलकाता. पश्चिम बंगाल की राजनीति में खलबली मचाने वाले बहुचर्चित शिक्षक भर्ती घोटाले( school service commission recruitment scam) में प्रवर्तन निदेशालय(Enforcement Directorate) ने एक और बड़े एक्शन को अंजाम देते हुए तृणमूल कांग्रेस(TMC) के विधायक माणिक भट़्टाचार्य को अरेस्ट किया है। ईडी ने प्राथमिक शिक्षा बोर्ड(primary education board) के पूर्व अध्यक्ष माणिक भट्टाचार्य को उनके साल्ट लेक के सीजीओ कॉम्प्लेक्स में रात भर पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया है। पूछताछ के दौरान कई खुलासे हुए थे। पलाशीपारा से विधायक माणिक पार्थ चटर्जी के बाद TMC के दूसरे ऐसे नेता हैं, जिन्हें इस घोटाले में अरेस्ट किया गया है।

10 अक्टूबर तक सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी
30 सितंबर में इस मामल की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने WBBPE के पूर्व अध्यक्ष माणिक भट़्टाचार्य की 10 अक्टूबर तक सीबीआई द्वारा उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी। प्राथमिक शिक्षक भर्ती अनियमितता घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच के साथ-साथ डब्ल्यूबीबीपीई अध्यक्ष के पद से हटाए जाने पर कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करने के लिए भट्टाचार्य की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया था। हालांकि जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस विक्रम नाथ की बेंच ने यह स्पष्ट कर दिया था कि गिरफ्तारी से संरक्षण 10 अक्टूबर तक रहेगा, लेकिन भट्टाचार्य को जांच प्रक्रिया में केंद्रीय एजेंसी का सहयोग करना होगा। जबकि अदालत ने प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती में गड़बड़ी के मामले में सीबीआई जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। सीबीआई के वकील एमवी राजू ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि केंद्रीय एजेंसी अगले तीन महीने के भीतर मामले की जांच प्रक्रिया पूरी कर लेंगी। उन्होंने यह भी कहा था कि प्रक्रिया के अनुसार कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सीबीआई जांच की जा रही है।

यह है वो शिक्षक भर्ती घोटाला, जो ममता सरकार के लिए परेशानी बन गया है
पार्थ चटर्जी को 26 घंटे की पूछताछ के बाद ED ने 23 जुलाई अरेस्ट किया था। पश्चिम बंगाल में 2014 और 2016 में शिक्षकों की भर्ती की गई थी। दो कैंडिडेट्स ने कलकत्ता हाईकोर्ट में नियुक्ति में धांधली का आरोप लगाते हुए याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने इस मामले में CBI जांच के आदेश दिए थे।  वहीं, मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ED जांच कर रही है। 

2016 में पश्चिम बंगाल के स्कूल सेवा आयोग (SSC) ने 13 हजार शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती के लिए एक परीक्षा आयोजित की थी। इस परीक्षा का रिजल्ट 27 नवंबर, 2017 को आया। 

रिजल्ट आने के बाद मेरिट लिस्ट बनाई गई, जिसमें सिलीगुड़ी की बबीता सरकार 77 अंक के साथ टॉप 20 में शामिल थी। लेकिन बाद में आयोग ने इस मेरिट लिस्ट को कैंसिल कर दिया और इसकी जगह दूसरी लिस्ट तैयार की। इस लिस्ट में बबीता सरकार का नाम वेटिंग में था। 

वहीं बबीता से कम नंबर पाने वाली अंकिता अधिकारी का नाम टॉप पर था। अंकिता तृणमूल कांग्रेस के एक मंत्री परेश अधिकारी की बेटी है, इसलिए उसे नौकरी मिल गई। 

इसके बाद बबीता सरकार और कुछ लोगों ने मिलकर इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका लगा दी। इस पर कोर्ट ने कोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए न्यायमूर्ति (रिटायर्ड) रंजीत कुमार बाग की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की।

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने इसमें सीबीआई जांच के आदेश भी दिए। उस दौरान टीएमसी के मंत्री परेश अधिकारी से पूछताछ भी हुई थी। हाईकोर्ट ने अंकिता की नौकरी को अवैध बताते हुए उससे वेतन वसूलने के आदेश दिए थे। 

कोर्ट ने कहा था कि अंकिता अधिकारी की जगह बबीता सरकार को नौकरी दी जाए। बाद में इस शिक्षक भर्ती घोटाले में बड़ी संख्या में पैसों के हेरफेर और गड़बड़ी का पता चला। इसके बाद इसमें केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी की एंट्री हुई। 

जगदीप धनखड़ ने उजागर किया था यह घोटाला
शिक्षक भर्ती घोटाले को उजागर करने का श्रेय बंगाल के तत्कालीन गवर्नर और अब उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को जाता है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था- पश्चिम बंगाल क्रिटिकल स्टेज पर है। बंगाल में डेमोक्रेसी नहीं है। वहां रिक्रूटमेंट स्कैम हुआ है। धनखड़ ने हाईकोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा था-हाईकोर्ट ने भी कहा है कि जो लोग रिक्रूटमेंट की प्रक्रिया में शामिल ही नहीं हुए, उन्हें नौकरी दे दी गई। बंगाल में 5 हजार लोगों को अवैध तरीके से जॉब दी गई है। इसी इंटरव्यू के कुछ दिनों बाद इस मामले में ईडी की एंट्री हुई। 

बता दें कि घोटाले को लेकर ईडी ने 22 जुलाई को बंगाल के मंत्री रहे पार्थ चटर्जी के कई ठिकानों पर छापे मारे थे। इसी दौरान उनकी मित्र अर्पिता मुखर्जी की संपत्ति के पेपर मिले थे। जब पार्थ चटर्जी से इस बारे में सवाल किए गए तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। बाद में ईडी ने शक के आधार पर अर्पिता मुखर्जी के घर छापा मारा था।

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