पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में मजदूर की मौत के बाद भड़की हिंसा के मामले की जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) करेगी। केंद्र सरकार के निर्देश पर एजेंसी ने इस मामले में UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत केस दर्ज कर लिया है। इससे पहले इस मामले की जांच राज्य पुलिस कर रही थी।
मजदूर की मौत से भड़की थी हिंसा
जानकारी के मुताबिक, यह हिंसा 16 जनवरी को उस वक्त भड़की, जब एक स्थानीय मजदूर की मौत हो गई। मौत के बाद इलाके में तनाव फैल गया और देखते ही देखते हालात बेकाबू हो गए। गुस्साई भीड़ सड़कों पर उतर आई और कई जगहों पर आगजनी, पथराव और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं।
हिंसा के दौरान कई दुकानों और वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया। हालात इतने बिगड़ गए कि राष्ट्रीय राजमार्ग NH-12 को जाम कर दिया गया, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया।
NH-12 पर आगजनी और तोड़फोड़
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, उपद्रवियों ने NH-12 पर वाहनों को रोककर उनमें आग लगा दी। सड़क पर लंबा जाम लग गया और आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल बन गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा और कई इलाकों में कर्फ्यू जैसे हालात बन गए।
पहले राज्य पुलिस कर रही थी जांच
शुरुआत में इस पूरे मामले की जांच मुर्शिदाबाद पुलिस कर रही थी। पुलिस ने हिंसा में शामिल कई संदिग्धों को हिरासत में लिया और उनसे पूछताछ भी की। हालांकि, हिंसा की गंभीरता और इसके पीछे किसी बड़ी साजिश की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने जांच NIA को सौंपने का फैसला लिया।
NIA ने UAPA के तहत दर्ज किया मामला
NIA ने केस दर्ज कर हिंसा के हर पहलू की जांच शुरू कर दी है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि—
- हिंसा अचानक हुई या इसके पीछे पहले से कोई साजिश थी
- भीड़ को उकसाने में किन लोगों की भूमिका रही
- क्या इस हिंसा के पीछे किसी संगठित नेटवर्क या फंडिंग का हाथ था
- सोशल मीडिया के जरिए अफवाह फैलाने की कोई भूमिका रही या नहीं
UAPA के तहत केस दर्ज होने से यह साफ है कि जांच एजेंसियां इस मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला मान रही हैं।
परिजनों ने लगाए आरोप, प्रशासन का पक्ष अलग
मृतक मजदूर के परिजनों ने आरोप लगाया है कि उनकी मौत पुलिस कार्रवाई के दौरान हुई। परिजनों का कहना है कि घटना के बाद उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
वहीं, प्रशासन का दावा है कि हालात पूरी तरह बेकाबू हो चुके थे और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई जरूरी थी।
जांच से हो सकते हैं बड़े खुलासे
NIA की एंट्री के बाद माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई अहम खुलासे हो सकते हैं। एजेंसी हिंसा से जुड़े डिजिटल सबूत, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया गतिविधियों की भी जांच कर रही है। इसके साथ ही, हिंसा में शामिल लोगों की पहचान कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज
मुर्शिदाबाद हिंसा को लेकर राज्य की राजनीति भी गरमा गई है। विपक्षी दलों ने कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, जबकि सत्तापक्ष का कहना है कि स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
मजदूर की मौत के बाद भड़की मुर्शिदाबाद हिंसा अब सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रह गई है। NIA द्वारा UAPA के तहत केस दर्ज किया जाना इस बात का संकेत है कि एजेंसियां इस घटना को गंभीर साजिश के एंगल से भी देख रही हैं। आने वाले दिनों में जांच के नतीजे इस पूरे मामले की असल तस्वीर सामने ला सकते हैं।




