आंकड़ों से समझिए कैसा रहा 1st Phase का चुनाव, 2017 से 3.5% कम वोटिंग, EC ने बताया कितनी आई शिकायतें

आंकड़ों से समझिए कैसा रहा 1st Phase का चुनाव, 2017 से 3.5% कम वोटिंग, EC ने बताया कितनी आई शिकायतें

गांधीनगर। Gujarat Assembly Election 2022: गुजरात विधानसभा चुनाव का पहला चरण गुरुवार, 1 दिसंबर को बीत गया। चुनाव आयोग के अनुसार इस बार जिन 89 सीटों पर वोटिंग हुई, उन्हीं 89 सीटों पर वोटिंग पिछले चुनाव में भी पहले चरण में हुई थी। आयोग के अनुसार, इस बार वोटिंग जहां 63.14 प्रतिशत हुई, जबकि 2017 के चुनाव में यह आंकड़ा करीब साढ़े तीन प्रतिशत ज्यादा यानी 66.75 प्रतिशत था। 

पहले चरण में सौराष्ट्र-कच्छ ओर दक्षिण गुजरात के 19 जिलों को कवर किया गया। वहीं, दूसरे चरण की वोटिंग 5 दिसंबर को होगी। इसमें उत्तर और मध्य गुजरात के 14 जिलों की 93 फाइनल सीटों पर वोटिंग होगी। पहले चरण में कुल 833 उम्मीदवार मैदान में हैं और दोनों चरणों के वोटों की गिनती 8 दिसंबर को होगी। पिछलि साल दोनों चरणों का कुल वोटिंग प्रतिशत 68.41 था। 

सबसे ज्यादा नर्मदा और सबसे कम बोटाद में वोटिंग 
इस बार हुए पहले चरण में 788 उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें 718 पुरूष उम्मीदवार थे और 70 महिला उम्मीदवार। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम के जरिए सुबह 8 बजे वोटिंग शुरू हुई, जो शाम 5 बजे तक चली। आयोग के अनुसार, इस बार आदिवासी बहुल नर्मदा जिले में सबसे ज्यादा 78.24 प्रतिशत वोटिंग हुई। इसके बाद तापी जिले में 76.91 प्रतिशत वोटिंग हुई। नवसारी में 71.06 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई। दूसरी ओर, बोटाद जिले में इस बार सबसे कम 57.58 प्रतिशत वोटिंग हुई। अमरेली में बोटाद से 0.01 प्रतिशत ज्यादा यानी 57.59 प्रतिशत वोटिंग हुई। 

सूरत में 62 प्रतिशत से ज्यादा वोटिंग 
चुनाव आयोग के अनुसार, 60 प्रतिशत से ज्यादा वोटिंग 10 जिलों में हुई, जबकि 6 जिले ऐसे थे, जिनमें 60 प्रतिशत से कम वोटिंग हुई। सूरत में 62.27 प्रतिशत वोटिंग हुई, जबकि राजकोट में 60.45 प्रतिशत वोट डाले गए। चुनाव आयोग ने वोटर्स को पोलिंग बूथ तक लाने और लोकतंत्र के उत्सव में भाग लेने के लिए कई स्तर पर प्रोत्साहित किया गया था। 

दिनभर में कुल 104 शिकायतें मिलीं 
वहीं, चुनाव आयोग ने वोटिंग की पारदर्शिता बरकरार रखने के लिए 13 हजार 65 पोलिंग बूथ पर वेब कास्टिंग भी कराई। आयोग के अनुसार, वोटिंग प्रॉसेस के दौरान कुल 104 शिकायतें आईं। इनमें ईवीएम खराबी से जुड़ी 6, फर्जी वोटिंग से जुड़ी 2, कानून व्यवस्था से जुड़ी 30 और आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़ी 36 तथा 30 अन्य मुद्दों से जुड़ी शिकायतें  शामिल थीं। 

पहले चरण के ये आंकड़े काम के 
गुरुवार को हुई पहले चरण की वोटिंग में जामनगर के धराफा, नर्मदा के सामोट और भरूच जिले के केसर सहित तीन गांवों के लोगों ने मतदान का बहिष्कार किया और वोट देने नहीं निकले। आयोग की ओर से इस बार वोटिंग के दौरान 19 जिलों में 89 बैलेट यूनिट, 82 कंट्रोल यूनिट स्थापित की थी। वहीं, 238 वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल यानी वीवीपैट बदले गए। आयोग ने 26 हजार 269 बैलेट यूनिट स्थापित कीं, जबकि 25 हजार 430 पोलिंग बूथ बनाए गए थे। इसके अलावा वीवीपैट भी 25 हजार 430 थे। 

पिछली बार के आंकड़ों पर भी गौर करें 
पिछले चुनाव के आंकड़ों पर गौर करें तो इन्हीं 89 सीटों पर वोटिंग पहले चरण में हुई थी, जिनमें 48 सीट भाजपा के खाते में, 40 सीट कांग्रेस के पास और एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार को मिली थी। वहीं, कुल 182 विधानसभा सीट में से 99 सीट पर भाजपा और 77 सीट पर कांग्रेस का कब्जा था। दो सीट पर भारतीय ट्राइबल पार्टी और 1 सीट एनसीपी के खाते में गई। वहीं, 3 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने कब्जा जमाया। 

इस बार जीते तो वाम मोर्चा के रिकॉर्ड की बराबरी 
27 साल से गुजरात की सत्ता में काबिज भाजपा इस बार यानी सातवीं भी सरकार बनाने की हरसंभव कोशिश कर रही है। यही नहीं पार्टी इस बार रिकॉर्ड वोट शेयर और रिकॉर्ड सीटें जीतकर सत्ता में आना चाहती है। अभी तक सिर्फ पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चा ही सात बार चुनाव जीतकर सत्ता में आई है। वाम मोर्चा ने 2011 में अंतिम चुनाव जीता था। इसके बाद से वहां ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस का कब्जा है। भाजपा अगर सातवीं बार सत्ता में आई तो वाम मोर्चा की बराबरी कर लेगा। 

भाजपा की इस बार राह कठिन, कांग्रेस के साथ आप भी मैदान में 
हालांकि, भाजपा के लिए इस बार राह आसान नहीं है, क्योंकि पार्टी को कांग्रेस के साथ-साथ आम आदमी पार्टी से भी मुकाबला करना पड़ रहा है। ऐसे में इस बार मुकाबला दो ध्रुवीय की जगह त्रिकोणीय हो गया है। भाजपा जहां 182 सीट पर चुनाव लड़ रही है, वहीं आम आदमी पार्टी और कांग्रेस 181 सीटों पर मैदान में हैं। इस बार चुनाव में भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के अलावा बसपा, सपा, भाकपा, बीटीपी, एआईएमआईएम समेत छोटी-बड़ी 36 राजनीतिक पार्टियां मैदान में हैं। 

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