बांग्लादेश की राजधानी ढाका में दिसंबर 2025 के मध्य भड़की हिंसा ने देश की राजनीति और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मीडिया दफ्तरों में आगजनी, सड़कों पर उग्र प्रदर्शन और राजनीतिक अस्थिरता—इन सबकी शुरुआत युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या से हुई।
कौन थे उस्मान हादी
शरीफ उस्मान हादी एक उभरते हुए छात्र और युवा नेता थे। वह ‘जुलाई आंदोलन’ से सामने आए प्रमुख चेहरों में शामिल थे और इंक़िलाब मंच के संयोजक व प्रवक्ता थे। ढाका विश्वविद्यालय से शिक्षित हादी पारंपरिक राजनीति और सत्ता के केंद्रीकरण के मुखर आलोचक माने जाते थे। वह खुद को नई पीढ़ी की आवाज बताते थे और लगातार राजनीतिक व्यवस्था पर सवाल उठाते रहे।
कब और कैसे हुआ हमला
12 दिसंबर 2025 को ढाका के मोतिझील इलाके में बॉक्स कलवर्ट रोड के पास उस समय हादी पर हमला हुआ, जब वह रिक्शा में सवार थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नकाबपोश हमलावरों ने उनके सिर में गोली मारी। गोली बाएं कान के पास लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए और कोमा में चले गए।
इलाज के दौरान मौत
हमले के बाद हादी को ढाका के अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत नाजुक होने पर उन्हें इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया, जहां करीब छह दिन तक चले इलाज के बाद उनकी मौत हो गई। हादी की मौत की पुष्टि अंतरिम मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने की।
मौत के बाद भड़का आक्रोश
हादी की मौत की खबर फैलते ही ढाका समेत कई शहरों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। प्रदर्शनकारियों ने इसे राजनीतिक हत्या बताते हुए दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। देखते ही देखते प्रदर्शन हिंसक हो गए और कई जगहों पर तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं।
मीडिया दफ्तरों पर हमला
उग्र भीड़ ने ढाका में देश के प्रमुख अखबारों प्रथम आलो और द डेली स्टार के दफ्तरों को निशाना बनाया।
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दफ्तरों में आगजनी और भारी तोड़फोड़ हुई
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पत्रकारों को जान बचाकर दफ्तर छोड़ना पड़ा
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प्रथम आलो का 27 साल में पहली बार प्रिंट संस्करण नहीं छप सका
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वेबसाइट भी कई घंटों तक बंद रही
प्रथम आलो के एग्जीक्यूटिव एडिटर सज्जाद शरीफ ने इस घटना को बांग्लादेशी पत्रकारिता के इतिहास की “सबसे काली रात” बताया।
पुलिस और सरकार का रुख
पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हत्या के पीछे कौन है और मकसद क्या था। मामले की जांच जारी है। वहीं विपक्ष और मानवाधिकार संगठनों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह न तो राजनीतिक हिंसा रोक पा रही है और न ही मीडिया की सुरक्षा सुनिश्चित कर पा रही है।
समय क्यों अहम
यह हिंसा ऐसे समय हुई है जब बांग्लादेश राष्ट्रीय चुनावों की तैयारी कर रहा है और देश के भीतर राजनीतिक तनाव पहले से मौजूद है। ऐसे में उस्मान हादी की हत्या ने हालात को और संवेदनशील बना दिया।
उस्मान हादी की हत्या सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि बांग्लादेश में असहमति, युवाओं की राजनीति और अभिव्यक्ति की आज़ादी से जुड़ा बड़ा सवाल बन गई है। अब पूरे देश की निगाहें इस पर टिकी हैं कि जांच में क्या सामने आता है और क्या दोषियों को सजा मिल पाती है या नहीं।




