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केदारनाथ–बदरीनाथ में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर लगेगी रोक, बीकेटीसी अध्यक्ष ने किया एलान, पूरा मामला

केदारनाथ–बदरीनाथ में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर लगेगी रोक, बीकेटीसी अध्यक्ष ने किया एलान, पूरा मामला

देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थस्थलों बदरीनाथ धाम और केदारनाथ धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। श्री बदरीनाथ–केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने स्पष्ट किया है कि समिति के अधीन आने वाले सभी मंदिरों में गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित रहेगा। इस संबंध में आगामी बोर्ड बैठक में औपचारिक प्रस्ताव पारित किया जाएगा।

BKTC अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने जानकारी देते हुए कहा कि बदरीनाथ और केदारनाथ सहित समिति के नियंत्रण वाले सभी मंदिरों में परंपरागत मान्यताओं के अनुरूप गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लागू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पारित होने के बाद इस निर्णय को विधिवत लागू किया जाएगा।

अध्यक्ष ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं की रक्षा सर्वोपरि है। केदारखंड से लेकर मानसखंड तक स्थापित मंदिर श्रृंखला में ऐतिहासिक रूप से गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित रहा है। उनका आरोप है कि पूर्ववर्ती गैर-भाजपा सरकारों के समय इन परंपराओं का उल्लंघन हुआ, जिससे धार्मिक मर्यादाओं पर आंच आई। अब मंदिर समिति का उद्देश्य परंपराओं का विधिवत अनुपालन सुनिश्चित करना है।

उन्होंने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में हरिद्वार के कुंभ क्षेत्र और हर की पैड़ी में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध की मांग उठी थी, जिसके बाद वहां ऐसे बोर्ड भी लगाए गए। उसी क्रम में अब चारधाम के प्रमुख धामों में भी परंपराओं के अनुरूप निर्णय लिया जा रहा है।

BKTC अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश में चल रही कार्रवाइयों का समर्थन करते हुए कहा कि अवैध मजारों को हटाने की पहल स्वागतयोग्य है। उन्होंने इसे उत्तराखंड की धार्मिक अस्मिता, सांस्कृतिक विरासत और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। साथ ही, समान नागरिक संहिता (UCC) के लागू होने, सख्त नकल-रोधी कानून और अंकिता भंडारी मामले में सीबीआई जांच की संस्तुति जैसे निर्णयों से जनमानस का सरकार के प्रति भरोसा बढ़ा है।

हेमंत द्विवेदी ने विश्वास जताया कि राज्य सरकार और मंदिर समिति के बीच बेहतर समन्वय से देवभूमि की पवित्रता और परंपराओं की रक्षा और प्रभावी ढंग से की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए मंदिर समिति आगे भी ठोस और प्रभावी कदम उठाती रहेगी।

फिलहाल, प्रस्ताव के औपचारिक रूप से पारित होने और लागू होने का इंतजार है। बोर्ड बैठक के बाद ही प्रवेश नियमों को लेकर अंतिम दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

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