कौन हैं रुबिया सईद, जिन्हें आतंकी यासीन मलिक ने सरेआम उठवा लिया था

Who is Rubaiya Sayeed: पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबिया सईद का अपहरण आतंकी यासीन मलिक ने किया था। अब खुद रुबिया सईद ने शुक्रवार को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट के सामने गवाही में यासीन मलिक समेत तीन आतंकियों की पहचान की है। रुबिया ने CBI जांच के दौरान उपलब्ध कराई गई तस्वीरों के आधार पर यासीन मलिक और तीन अन्‍य की पहचान की। ये पहला मौका है, जब अदालत ने इस मामले में रूबिया को पेश होने के लिए कहा था। बता दें कि 8 दिसंबर 1989 को रुबिया का अपहरण हुआ था। इसके बदले में सरकार ने 5 दिन बाद ही 13 दिसंबर को 5 आतंकवादी छोड़े थे। आखिर कौन हैं रुबिया सईद और क्या है पूरा मामला? आइए जानते हैं।

जानें कब का है मामला?
जेकेएलएफ (जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट) के अलगाववादी नेता यासीन मलिक ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर 8 दिसंबर, 1989 को रुबिया सईद को किडनैप कर लिया था। रुबिया सईद का अपहरण तब किया गया, जब वो श्रीनगर के एक हॉस्पिटल से अपनी ड्यूटी पूरी करके घर लौट रही थीं। यासीन मलिक और उसके कुछ साथी रुबिया का अपहरण कर श्रीनगर से दूर नाटीपोरा ले गए थे। इसके बाद आतंकियों ने मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी को छोड़ने के बदले में 5 खूंखार आतंकियों की रिहाई की मांग की थी। तब की वीपी सिंह सरकार ने बाद में इन आतंकियों को छोड़ दिया था।

कौन हैं रुबिया सईद ?
रुबिया सईद तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री रहे मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी और पीडीपी की वर्तमान अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की छोटी बहन हैं। बता दें कि रूबिया चेन्नई के हर्रिंगटन रोड के तारापुर एवेन्यू में पति और दो बेटों के साथ रहती हैं। रूबिया के पति शरीफ अहमद का ऑटोमोबाइल शोरूम है।

रुबिया सईद के घर 24 घंटे रहती है सिक्योरिटी : 
रुबिया सईद और उनकी फैमिली को तमिलनाडु स्पेशल आर्म्ड फोर्स यूनिट से सिक्युरिटी मिली हुई है। उनके घर के बाहर पांच जवान 24 घंटे तैनात रहते हैं। उनके घर की सिक्युरिटी इतनी टाइट है कि दूध देने वाले और सफाई करने वाले को भी एक खास जगह से आगे जाने की परमिशन नहीं है। पड़ोसियों से रुबिया की बातचीत होती है। लेकिन वे उनके बारे में बहुत ज्यादा नहीं जानते हैं।

आखिर कैसे हुई थी रुबिया की किडनैपिंग?
– रुबिया 1989 में जब 23 साल की थीं, तो नौगाम के वुमन हॉस्पिटल में इंटर्नशिप कर रहीं थीं। ये अस्पताल उनके घर से सिर्फ 500 मीटर की दूरी पर था।
– 8 दिसंबर, 1989 को रुबिया अपनी डयूटी खत्म कर जब घर के लिए निकलीं तो एक बस में बैठ गईं। इसी बस में यासीन मलिक और उसके कुछ साथी भी चढ़ गए।
– इन सभी ने मिलकर बस को बंधक बना लिया। बाद में उसे बंदूक की नोक पर एक मारुति वैन में बैठाकर नाटीपोरा ले गए।

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