नैनीताल, 23 सितम्बर 2021

राज्य में भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए उत्तराखंड हाईकोर्ट में याचिका दाखिल हुई है. उत्तराखंड में लोकायुक्त नियुक्त किए जाने को लेकर हाईकोर्ट ने उत्तराखंड सरकार को नोटिस जारी किया है और 4 हफ्ते में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है.

हल्द्वानी के रवि शंकर जोशी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा है कि सरकार ने 2013 में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए एक्ट तैयार किया था, जिसके कानून सख्त थे. लेकिन 2014 में सरकार ने एक्ट वापस लेकर पूरे एक्ट में बदलाव कर दिया और 2014 का संसोधन एक्ट बनाते हुए शर्त रख दी कि जिस दिन लोकायुक्त नियुक्त होगा उसी दिन से एक्ट प्रभावी होगा.

अब 8 साल बीतने के बाद भी लोकायुक्त नियुक्त नहीं होने पर कोर्ट से मांग की गई है कि लोकायुक्त की नियुक्ति हो ताकि भ्रष्टाचार पर लगाम लग सके. इस याचिका पर उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस आरएस चौहान व जस्टिस आलोक कुमार की बेंच ने सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है कि अभी तक लोकायुक्त की नियुक्ति क्यों नहीं हो सकी.

हाईकोर्ट में रवि शंकर जोशी के वकील राजीव बिष्ट ने बताया कि 2013 में जो एक्ट सरकार लेकर आई थी, वह काफी मजबूत था. उसमें भ्रष्टाचार के खिलाफ कठोर प्रावधान थे. पर बाद में इनमें बदलाव कर एक्ट को कमजोर कर दिया गया. राजीव बिष्ट ने बताया कि 2016 में भी ये मामला हाईकोर्ट में उठाया गया था लेकिन सरकार ने कहा कि ऐसा ही मामला सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है, जिसके बाद याचिका वापस ले ली गई. लेकिन साल 2018 में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 2017 में एक्ट लाए गए हैं और एक्ट पास होने के तीन महीने के लोकायुक्त नियुक्त कर देंगे, जो अभी भी नहीं हुआ है. अधिवक्ता राजीव बिष्ट ने बताया कि अगर राज्य में लोकायुक्त नियुक्त होगा तो भ्रष्टाचार के मामलों में कमी आएगी और कोर्ट में जो भ्रष्टाचार के मामले पेंडिंग हैं, उनमें भी कमी आएगी.

 

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