
प्रयागराज, 24 अगस्त 2021
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने यूपी के कौशाम्बी (Kaushambi) जिले में हुए कथित गौकशी (Cow Slaughter Case) के चर्चित मामले में नामजद आरोपियों को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई किये जाने पर रोक लगा दी है. अदालत ने इस मामले में यूपी सरकार के साथ ही मुकदमा दर्ज कराने वाले विपक्षी को भी नोटिस जारी कर सभी से जवाब तलब कर लिया है. सभी को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए एक महीने की मोहलत दी गई है.
दरअसल इस चर्चित मामले में 10 साल के मासूम बच्चे की बेरहमी से हत्या करने के आरोपियों पर पुलिस के साथ मिलीभगत कर पीड़ित परिवार के 71 साल के बुजुर्ग समेत 5 लोगों के खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज कराने का आरोप है. आरोप है कि दबंग किस्म के हत्या आरोपियों ने पीड़ित परिवार को इसलिए गोकशी के मुकदमे में फंसाया ताकि वह जेल चले जाएं और अपने परिवार के 10 साल के बच्चे की हत्या के मामले में ठीक से पैरवी न कर सकें.
मामले में कौशाम्बी पुलिस भी सवालों के घेरे में हैं, क्योंकि उसने न सिर्फ तथ्यों की सच्चाई परखे बिना घटना के 18 दिन बाद एफआईआर दर्ज की. बल्कि तहरीर में दी गई शिकायत से अलग भी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया. मामले की सुनवाई कर रही हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ता की तरफ से पेश की गई दलीलों पर सहमति जताते हुए एफआईआर को संदिग्ध माना और इसी आधार पर आरोपियों को राहत दी है.
मुकदमे की अगली सुनवाई नवम्बर महीने के आख़िरी हफ्ते में होगी. अदालत ने राहत पाने वाले आरोपियों को पुलिस जांच में सहयोग देने का भी आदेश दिया है.
गौरतलब है कि कौशाम्बी जिले के सैनी थाने के परास गांव के रहने वाले मोहम्मद दाऊद ने इसी साल 24 जून को अपने पड़ोसी 71 साल के बुजुर्ग शेर मोहम्मद और उनके चार बेटों जैद, सादान, अहद और शहजादे के खिलाफ गौकशी किये जाने और धमकी देने व मारपीट किये जाने के मामले में गंभीर धाराओं में नामजद मुकदमा दर्ज कराया. पांचों आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 379, 323, 504, 506 और 452 के साथ ही यूपी प्रिवेंशन आफ काऊ स्लाटर एक्ट 1955 की धारा 3, 5 व 8 के तहत सैनी थाने में एफआईआर दर्ज की गई.
शिकायतकर्ता दाऊद का आरोप था कि बुजुर्ग शेर मोहम्मद और उनके चार बेटों ने 4 जून को रात के अंधेरे में उनके घर के बाहर बंधी गाय को चोरी कर लिया और उसके काटने के बाद उसके मांस को बेच दिया. कुछ देर बाद एतराज जताने पर आरोपियों ने उनके परिवार पर धावा बोलकर मारपीट व गाली-गलौज की और साथ ही जान से मारने की धमकी भी दी.
मुक़दमे में नामजद किये गए शेर मोहम्मद व अन्य ने एफआईआर रद्द किये जाने और गिरफ्तारी पर रोक की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्जी दाख़िल की. याचिकाकर्ताओं की तरफ से एडवोकेट सहर नकवी ने अदालत के सामने पक्ष रखा. सुनवाई के दौरान एडवोकेट सहर नक़वी ने दलील दी कि विपक्षी मोहम्मद दाऊद ने शेर मोहम्मद और उनके बेटों को फंसाने के लिए फर्जी मुकदमा दर्ज कराया है.
एफआईआर में घटना इसी साल 06 जून की बताई गई है, जबकि एफआईआर के लिए अर्जी 18 दिन बाद 24 जून को दी गई है. कहा यह भी गया कि दाऊद के पास सिर्फ एक गाय थी, जो अब भी उसके दरवाजे पर बंधी रहती है. कोई गाय न तो चोरी की गई है और न ही उसे क़त्ल किया गया है. गांव के लोगों से इस बारे में जानकारी भी ली जा सकती है.
आरोपियों की वकील सहर नक़वी ने यह भी दलील दी कि शिकायतकर्ता मोहम्मद दाऊद व उसके परिवार के लोगों ने आरोपी बनाए गए शेर मोहम्मद के परिवार के तकरीबन दस साल के एक मासूम बच्चे को महज़ मामूली कहासुनी के विवाद में तीन साल पहले बेरहमी से क़त्ल करने के बाद शरीर के टुकड़े कर जंगल में फेंक दिए थे. 14 जून साल 2018 को हुए बच्चे के क़त्ल के मामले में दाऊद और उसके परिवार के लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर हुई थी और सभी को जेल जाना पड़ा था.







