द फ्रंट डेस्क: दुनिया के सबसे ठंडे महाद्वीप अंटार्कटिका की बर्फीली वादियों में एक ऐसा झरना बहता है, जो देखने में बिल्कुल इंसानी खून जैसा लगता है। सफेद बर्फ के बीच गहरे लाल रंग की यह धारा दशकों से वैज्ञानिकों के लिए पहेली बनी हुई थी। इसे ‘ब्लड फॉल्स’ यानी ‘खूनी झरना’ कहा जाता है। यह झरना मैकमर्डो ड्राय वैलीज़ क्षेत्र में स्थित टेलर ग्लेशियर से निकलता है। 1911 में इसकी खोज के बाद से ही यह सवाल बना हुआ था कि आखिर बर्फ के बीच से खून जैसा लाल पानी क्यों बहता है। अब करीब 100 साल बाद वैज्ञानिकों ने इस रहस्य से पर्दा उठा दिया है।
20 लाख साल पुरानी झील का रहस्य
आधुनिक तकनीक और रडार इमेजिंग की मदद से वैज्ञानिकों ने पता लगाया कि टेलर ग्लेशियर के लगभग 1,300 फीट नीचे एक विशाल खारे पानी की झील मौजूद है। यह झील करीब 20 लाख सालों से बर्फ की मोटी परतों के नीचे कैद थी और बाहरी वातावरण से पूरी तरह अलग-थलग थी। इस झील का पानी अत्यधिक नमकीन है, जिसके कारण वह बेहद कम तापमान में भी पूरी तरह नहीं जमता। यही खारा पानी ग्लेशियर की दरारों से रिसते हुए बाहर आता है। वर्षों तक यह समझा जाता रहा कि लाल रंग का कारण किसी शैवाल (Algae) की मौजूदगी है, लेकिन गहन अध्ययन ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया।

लाल रंग की असली वजह क्या है?
शोध में सामने आया कि इस झील के पानी में आयरन (लोहा) की मात्रा बहुत अधिक है। जब यह आयरन युक्त पानी बर्फ की दरारों से बाहर निकलकर हवा में मौजूद ऑक्सीजन के संपर्क में आता है, तो रासायनिक प्रतिक्रिया होती है। लोहे का ऑक्सीकरण (Oxidation) होने लगता है, ठीक उसी तरह जैसे लोहे पर जंग लगती है। इसी प्रक्रिया के कारण पानी का रंग गहरा लाल हो जाता है। यही वजह है कि यह झरना खून जैसा दिखाई देता है। यानी यह किसी अलौकिक घटना का संकेत नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक भू-रासायनिक प्रक्रिया का परिणाम है।

क्या इससे दूसरे ग्रहों पर जीवन का संकेत मिलता है?
इस खोज का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि इस झील में बिना सूर्य की रोशनी और बिना ऑक्सीजन के भी सूक्ष्म जीव पाए गए हैं। ये जीव ऊर्जा के लिए रासायनिक प्रक्रियाओं पर निर्भर रहते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि पृथ्वी पर इतनी कठोर और अलग-थलग परिस्थितियों में जीवन संभव है, तो मंगल ग्रह या बृहस्पति के चंद्रमा यूरोपा जैसे स्थानों पर भी जीवन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इस तरह ‘ब्लड फॉल्स’ केवल एक प्राकृतिक आश्चर्य नहीं, बल्कि अंतरिक्ष अनुसंधान और खगोलजीवविज्ञान (Astrobiology) के लिए भी एक महत्वपूर्ण संकेत बन गया है। करीब एक सदी तक रहस्य बने रहे इस लाल झरने ने अब यह साबित कर दिया है कि प्रकृति के कई चमत्कारों के पीछे ठोस वैज्ञानिक कारण होते हैं—बस उन्हें समझने के लिए धैर्य, शोध और तकनीक की जरूरत होती है।




