नई दिल्ली, 23 फरवरी 2021

शारदा चिटफंड घोटाला मामले (Sharda Chitfund Scam Case) में पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मलय डे और कोलकाता के पूर्व कमिश्नर राजीव कुमार के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई की अवमानना याचिका पर बंगाल सरकार ने सवाल उठाया है. ममता सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कहा गया कि चुनाव के कारण सीबीआई पुराने केस को खोलना चाहती है. सीबीआई का कहना है कि अवमानना केस पहले से ही चल रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई दो हफ्ते के लिए टाल दी है.

बता दें कि चिटफंड घोटाले में सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में एक अवमानना याचिका दायर की है. यह याचिका पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मलय कुमार डे, डीजीपी और कोलकाता के पूर्व कमिश्नर राजीव कुमार के खिलाफ दाखिल की गई है. कोलकाता के पूर्व कमिश्नर राजीव कुमार से हिरासत में पूछताछ की मांग करते हुए सीबीआई ने कहा कि जांच से यह भी पता चला है कि पश्चिम बंगाल के सत्तारूढ़ त्रिणमूल और शारदा समूह के साथ मिलकर बिधाननगर पुलिस ने राजीव कुमार के कहने पर सबूत छुपाए.

प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गवाह के रूप में घोष से पूछताछ अक्टूबर 2013 में हुई थी, जिसमें पता चला कि राजीव कुमार गिरफ्तार अभियुक्तों, सुदीप्त सेन, देबयानी मुखर्जी और अन्य गवाहों की पूछताछ के दौरान ईडी अधिकारियों के संपर्क में थे. यह पूछताछ सितंबर से नवंबर 2013 के दौरान हुई थी. अधिकारियों द्वारा यह सुनिश्चित किया गया था कि इन आरोपी व्यक्तियों या गवाहों द्वारा दिए गए सबूत रिकॉर्ड में नहीं लिए जाने चाहिए, क्योंकि जांच का एक हिस्सा प्रभावशाली व्यक्तियों को बचाने के उद्देश्य से था.

सीबीआई ने दावा किया है कि सीएम राहत कोष से नियमित रूप से राशि का भुगतान किया गया, जोकि मई 2013 से अप्रैल 2015 के बीच प्रति माह 27 लाख रुपये था. आवेदन में कहा गया कि ये राशि कथित तौर पर मीडिया कंपनी के कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए दी गई, जो जांच के तहत शारदा ग्रुप ऑफ कंपनीज का हिस्सा थी.

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री राहत कोष से तारा टीवी कर्मचारी कल्याण संघ को कुल 6.21 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया. सीबीआई ने कहा है कि एक निजी मीडिया कंपनी को भुगतान किए जाने की जांच के लिए 16 अक्टूबर, 2018 को एक पत्र मुख्य सचिव, पश्चिम बंगाल को लिखा गया लेकिन कई प्रयासों के बावजूद राज्य सरकार ने अधूरे उत्तर दिए.

सीबीआई ने हाईकोर्ट के आदेश का हवाला दिया जिसमें आदेश दिया गया था कि ‘कर्मचारियों के वेतन का भुगतान उपलब्ध धनराशि से किया जाना चाहिए’ और यह कहीं नहीं कहा गया कि एक निजी टीवी चैनल के कर्मचारियों को मुख्यमंत्री राहत से भुगतान किया जाए. सीएम रिलीफ फंड से भुगतान एक बड़ी साजिश और सांठगांठ की ओर इशारा करती है.

दावा किया गया है कि सीबीआई और राज्य प्राधिकरणों के बीच हुए पत्राचार से पता चलेगा कि कानून की प्रक्रिया से बचने के लिए एक ठोस प्रयास किया गया. सीबीआई ने 2013 में पूर्व राज्यसभा सांसद कुणाल कुमार घोष से पूछताछ का हवाला देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और शारदा समूह के प्रमोटर- सुदीप्त सेन के बीच अच्छे संबंध थे. जांच एजेंसी ने कहा कि सेन और घोष के दो नंबरों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड से पता चलता है कि उनके बीच एक नंबर पर 298 बार और दूसरे नंबर पर 9 बार बातचीत हुई थी. इससे पहले शीर्ष अदालत ने 2014 में सीबीआई को जांच सौंपी थी.

 

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