वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर बिहार में सियासी हलचल, JDU के फैसले से मुस्लिम वोटों पर क्या असर?

वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर बिहार में सियासी हलचल, JDU के फैसले से मुस्लिम वोटों पर क्या असर?

पटना: वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर बिहार की राजनीति गरमा गई है। लोकसभा में यह विधेयक पेश किए जाने के बाद इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जेडीयू के समर्थन के चलते यह सवाल उठ रहा है कि क्या नीतीश कुमार की पार्टी मुस्लिम वोटों के लिए जोखिम उठा रही है? वहीं, आरजेडी और इंडिया गठबंधन इस मुद्दे पर अपना पक्ष मजबूत करने में जुट गए हैं। इस विधेयक का असर आगामी बिहार विधानसभा चुनावों पर पड़ सकता है, जिससे मुस्लिम वोटों की रणनीति को लेकर सियासी दलों की चिंता बढ़ गई है।

मुस्लिम वोट बैंक पर किसका दांव?

बिहार में मुस्लिम आबादी लगभग 18 प्रतिशत है, जो कई सीटों के नतीजों को प्रभावित कर सकती है। 2019 के लोकसभा चुनाव में मुस्लिम वोटों का 77% हिस्सा महागठबंधन को मिला था, जबकि एनडीए को केवल 6% वोट ही हासिल हुए थे। हालांकि, 2024 के चुनाव में एनडीए को मुस्लिम वोटों का 12% समर्थन मिला, जबकि महागठबंधन के खाते में 87% वोट गए।

इस बार प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी भी मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में बिहार में आरजेडी और जन सुराज पार्टी के बीच मुस्लिम मतों को लेकर खींचतान तेज हो सकती है।

क्या JDU को होगा मुस्लिम वोट का नुकसान?

जेडीयू के लिए मुस्लिम वोट अहम रहे हैं। अगर मुस्लिम समुदाय इस विधेयक को अपने अधिकारों पर हमला मानता है, तो नीतीश कुमार की पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। हालांकि, जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा का कहना है कि यह विधेयक गरीब और पसमांदा मुसलमानों के हित में है। उनके मुताबिक, नीतीश कुमार के शासनकाल में राज्य में हिंदू-मुस्लिम दंगे नहीं हुए हैं, जिससे मुस्लिम समुदाय उनके साथ मजबूती से खड़ा है।

बीजेपी को हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण की उम्मीद

बीजेपी इस विधेयक को पारदर्शिता और गरीब मुस्लिमों के हित से जोड़कर देख रही है। पार्टी को उम्मीद है कि यदि विपक्षी दल इसे मुस्लिम तुष्टिकरण का मुद्दा बनाते हैं, तो हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण होगा। इससे एनडीए को फायदा मिल सकता है। हालांकि, इस स्थिति में जेडीयू और एलजेपी (रामविलास) को असमंजस का सामना करना पड़ सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों की राय

बिहार की राजनीति पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव में अभी कई महीने बाकी हैं, जिससे लोगों की राय में बदलाव संभव है। अगर सरकार विधेयक के कार्यान्वयन में देरी करती है, तो इसका असर सीमित हो सकता है। लेकिन अगर मुस्लिम समुदाय में असंतोष बढ़ता है और जेडीयू व एलजेपी इसे संभालने में असफल रहती हैं, तो एनडीए को 10-15 सीटों का नुकसान हो सकता है। वहीं, आरजेडी इस मुद्दे को भुनाकर 15-20 अतिरिक्त सीटें जीत सकती है।

आगे की चुनावी रणनीतियों पर नजर

राजनीतिक दल इस विधेयक के संभावित प्रभावों को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीतियां बना रहे हैं। बीजेपी हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण पर फोकस कर रही है, जबकि आरजेडी मुस्लिम वोटों को मजबूत करने की कोशिश में लगी है। इस बीच, प्रशांत किशोर की पार्टी यदि मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाने में सफल होती है, तो यह आरजेडी के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

फिलहाल, वक्फ संशोधन विधेयक बिहार की राजनीति में सबसे चर्चित विषय बन गया है। चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आएंगे, इस मुद्दे पर सियासी घमासान और तेज होने की संभावना है।

Share post:

Popular

More like this
Related