द फ्रंट डेस्क: लोकसभा चुनाव 2024 के बाद विपक्षी दलों के गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस (INDIA) के नेतृत्व को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने हाल में सुझाव दिया कि गठबंधन की कमान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी या तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन को सौंपी जानी चाहिए। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गईं। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव से जब इस पर सवाल किया गया तो उन्होंने सीधे तौर पर किसी नाम का समर्थन नहीं किया, बल्कि गठबंधन की एकता पर जोर दिया। आइए समझते हैं कि यह पूरा विवाद क्या है और इसके राजनीतिक मायने क्या हो सकते हैं।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने अलग-अलग मंचों पर कहा कि INDIA गठबंधन को मजबूत नेतृत्व की जरूरत है। उन्होंने सुझाव दिया कि या तो ममता बनर्जी या फिर एम.के. स्टालिन को संयोजक की भूमिका सौंपी जानी चाहिए। अय्यर का तर्क था कि गठबंधन में विविध क्षेत्रीय दल शामिल हैं और नेतृत्व ऐसा होना चाहिए जो राष्ट्रीय स्तर पर सभी को साथ लेकर चल सके। उन्होंने यह भी कहा कि 2029 के आम चुनाव को देखते हुए अभी से रणनीतिक मजबूती जरूरी है।

स्टालिन को क्यों बताया उपयुक्त?
अय्यर ने कहा कि द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) प्रमुख एम.के. स्टालिन एक अनुभवी प्रशासक हैं और राष्ट्रीय राजनीति में संतुलित भूमिका निभा सकते हैं। उनका मानना है कि किसी अपेक्षाकृत छोटे घटक दल के नेता को नेतृत्व देने से गठबंधन के भीतर संतुलन बनेगा और कांग्रेस के वर्चस्व को लेकर उठने वाले सवाल भी कम होंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि एक मजबूत INDIA गठबंधन के बिना विपक्ष 2029 में भाजपा को चुनौती नहीं दे पाएगा। उनके बयान को कांग्रेस के भीतर और बाहर अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है।

ममता बनर्जी का नाम क्यों अहम?
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले भी विपक्षी एकजुटता की कोशिशों में सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं। अय्यर का मानना है कि ममता बनर्जी के पास जनाधार और राजनीतिक अनुभव दोनों हैं, जो गठबंधन को ऊर्जा दे सकते हैं। हालांकि, यह भी सच है कि INDIA गठबंधन में कई बड़े और क्षेत्रीय दल शामिल हैं। ऐसे में नेतृत्व को लेकर सर्वसम्मति बनाना आसान नहीं है। ममता बनर्जी और कांग्रेस के बीच अतीत में मतभेद भी रहे हैं, जो इस चर्चा को और जटिल बनाते हैं।

अखिलेश यादव का ‘कूटनीतिक’ रुख
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस पूरे मुद्दे पर संतुलित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि INDIA गठबंधन बना हुआ है और बना रहेगा। उनके मुताबिक, प्राथमिकता भाजपा को हराने की रणनीति पर होनी चाहिए, न कि नेतृत्व को लेकर सार्वजनिक बहस पर। अखिलेश ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश का 2027 का विधानसभा चुनाव 2029 के लोकसभा चुनाव की दिशा तय करेगा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, उनका बयान यह संकेत देता है कि सपा फिलहाल किसी खेमेबंदी से बचना चाहती है और गठबंधन की एकजुटता पर जोर दे रही है।

आगे क्या?
INDIA गठबंधन के भीतर औपचारिक रूप से नेतृत्व को लेकर कोई बदलाव घोषित नहीं हुआ है। फिलहाल यह चर्चा बयानबाजी तक सीमित है। लेकिन 2029 के आम चुनाव को देखते हुए विपक्षी दलों के बीच तालमेल और नेतृत्व की स्पष्टता महत्वपूर्ण होगी। क्या गठबंधन किसी नए संयोजक की घोषणा करेगा? या मौजूदा ढांचे के साथ ही आगे बढ़ेगा? यह आने वाले समय की राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। फिलहाल इतना तय है कि विपक्ष के भीतर नेतृत्व को लेकर बहस ने नई राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है।




