असम विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी बीच Mamata Banerjee के नेतृत्व में All India Trinamool Congress (TMC) ने राज्य में अपने चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत करते हुए 17 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। यह सूची साफ संकेत देती है कि पार्टी इस बार असम में गंभीरता से चुनावी मैदान में उतर रही है और अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। TMC ने अपनी इस पहली लिस्ट में राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों को साधने की रणनीति अपनाई है। पार्टी ने उन इलाकों पर खास फोकस किया है जहां जातीय, भाषाई और सामाजिक विविधता अधिक है। इसके जरिए TMC स्थानीय मुद्दों को उठाकर खुद को एक मजबूत क्षेत्रीय विकल्प के रूप में स्थापित करना चाहती है।
किन-किन सीटों पर उम्मीदवार घोषित?
पार्टी ने कुल 17 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं, जिनमें कोकराझार, धुबरी, गोलपारा, बोंगईगांव, बजाली, कामरूप, नलबाड़ी, तमुलपुर, दररांग, धेमाजी, तिनसुकिया और कछार जैसे महत्वपूर्ण जिले शामिल हैं। इन सीटों में सामान्य और आरक्षित (ST) दोनों तरह की सीटों को शामिल किया गया है, जिससे साफ है कि TMC हर वर्ग तक अपनी पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है। कोकराझार जिले की बाओखुंगरी सीट से उदंगस्री नरजरारी, धुबरी की बिलासीपारा सीट से मोमिननुर इस्लाम और गोलपारा की जलेस्वर सीट से आरिफ अख्तर अहमद को मैदान में उतारा गया है। बोंगईगांव की अभयापुरी सीट से कौशिक रंजन दास और बजाली सीट से कल्याणी कलिता को टिकट मिला है।
इसके अलावा कामरूप जिले की चमरिया सीट से दुलु अहमद और बोको-चायगांव (ST) सीट से भोगलाल राभा को उम्मीदवार बनाया गया है। नलबाड़ी की बारखेत्री सीट से अमीरुल इस्लाम, तमुलपुर की गोरेस्वर (ST) सीट से राजन चौहान और दररांग की मंगलदाई सीट से हरे कृष्णा डेका को टिकट दिया गया है। ऊपरी असम की सीटों पर भी पार्टी ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। धेमाजी (ST) सीट से नरेंद्र कुमार पाव, तिनसुकिया जिले की डिगबोई सीट से जितेन नाग और मकुम सीट से दिलीप मोरान को उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं, बराक घाटी क्षेत्र के कछार जिले में उद्धारबंद से तपस दास, कटिगोराह से फजलुर रहमान लस्कर और सोनाई से शाहजहां लस्कर को मैदान में उतारा गया है।
क्या है TMC की रणनीति?
TMC की यह सूची केवल उम्मीदवारों की घोषणा नहीं, बल्कि एक स्पष्ट राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। पार्टी ब्रह्मपुत्र घाटी, बोडोलैंड क्षेत्र और बराक घाटी जैसे क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। इन इलाकों में लंबे समय से जातीय और भाषाई पहचान की राजनीति प्रभावी रही है, जिसे ध्यान में रखते हुए TMC ने स्थानीय चेहरों को टिकट दिया है। पार्टी का फोकस उन मुद्दों पर है जो सीधे आम जनता से जुड़े हैं—जैसे क्षेत्रीय विकास, रोजगार, पहचान और सामाजिक संतुलन। उम्मीदवारों के चयन में भी इस बात का ध्यान रखा गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में मजबूत जनाधार रखते हों।

बीजेपी-कांग्रेस के बीच तीसरा विकल्प बनने की कोशिश
असम की राजनीति अब तक मुख्य रूप से बीजेपी और कांग्रेस के इर्द-गिर्द घूमती रही है, लेकिन TMC इस समीकरण को बदलने की कोशिश में है। पार्टी खुद को एक ऐसे विकल्प के रूप में पेश करना चाहती है जो न केवल विपक्ष की भूमिका निभाए, बल्कि सत्ता की दौड़ में भी मजबूती से शामिल हो सके। अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस का मानना है कि असम में अभी भी एक मजबूत तीसरे विकल्प की गुंजाइश है, खासकर उन इलाकों में जहां स्थानीय मुद्दों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। यही कारण है कि पार्टी ने अपने अभियान की शुरुआत जमीनी स्तर से करने का फैसला किया है।

पहली सूची जारी होने के बाद अब TMC की नजर अगले चरणों पर है। आने वाले दिनों में पार्टी और उम्मीदवारों की घोषणा कर सकती है और अपने प्रचार अभियान को तेज करेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि TMC असम की राजनीति में कितना असर डाल पाती है और क्या वह सच में बीजेपी और कांग्रेस के बीच अपनी जगह बना पाती है या नहीं।



