पटना में JDU कार्यालय के बाहर जीविका दीदियों का प्रदर्शन, 10 हजार की सहायता न मिलने पर फूटा गुस्सा, पूरा मामला

पटना में JDU कार्यालय के बाहर जीविका दीदियों का प्रदर्शन, 10 हजार की सहायता न मिलने पर फूटा गुस्सा, पूरा मामला

बिहार की राजधानी पटना में गुरुवार (22 जनवरी 2026) को उस वक्त सियासी हलचल तेज हो गई, जब जीविका से जुड़ी महिलाओं ने जनता दल (यूनाइटेड) कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। ये महिलाएं मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत मिलने वाली 10 हजार रुपये की सहायता राशि न मिलने से नाराज थीं और सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रही थीं।

प्रदर्शन कर रही करीब 20 से 25 जीविका दीदियां भागलपुर जिले के सुल्तानगंज प्रखंड से पटना पहुंची थीं। महिलाओं का कहना है कि उन्होंने नियमानुसार आवेदन किया था, सभी दस्तावेज पूरे किए गए, लेकिन महीनों बीत जाने के बावजूद उनके खातों में अब तक राशि नहीं आई। दीदियों ने आरोप लगाया कि बार-बार अधिकारियों से संपर्क करने के बाद भी केवल आश्वासन ही मिलता रहा।

महिलाओं ने बताया कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले नीतीश कुमार सरकार ने मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 10-10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की थी। इस योजना के तहत करीब डेढ़ करोड़ से अधिक महिलाओं के खातों में राशि भेजी गई, लेकिन जीविका से जुड़ी कई महिलाएं अब भी इससे वंचित हैं।

प्रदर्शन के दौरान जीविका दीदियों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ भ्रष्ट अधिकारियों ने मदद करने के बजाय उल्टा चार-पांच महिलाओं पर केस दर्ज करा दिया। महिलाओं ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से न्याय की गुहार लगाई। उनका कहना है कि जिन अधिकारियों की वजह से भुगतान रुका है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और जल्द से जल्द बकाया राशि जारी की जाए।

इस बीच सरकार की ओर से यह भी साफ किया गया है कि योजना बंद नहीं हुई है। जिस पोर्टल के माध्यम से आवेदन किए जा रहे थे, उसे 31 दिसंबर 2025 को नई एंट्री के लिए बंद किया गया है, लेकिन योजना अभी भी सक्रिय है। सरकार का दावा है कि लाभार्थियों को लगातार राशि दी जा रही है और भविष्य में महिलाओं को दो लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी।

हालांकि, जीविका दीदियों का कहना है कि जमीनी हकीकत इससे अलग है। उनका आरोप है कि योजनाओं के दावे तो बड़े किए जा रहे हैं, लेकिन पात्र महिलाओं तक लाभ नहीं पहुंच पा रहा। यही वजह है कि उन्हें सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करना पड़ रहा है। यह मामला एक बार फिर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

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