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AI से सेमीकंडक्टर तक… टेक्नोलॉजी के दम पर कैसे बदल रहा उत्तर प्रदेश? समझें पूरी तस्वीर

AI से सेमीकंडक्टर तक… टेक्नोलॉजी के दम पर कैसे बदल रहा उत्तर प्रदेश? समझें पूरी तस्वीर

Uttar Pradesh Technology Growth: उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, रोबोटिक्स और डीप-टेक तक कई नए तकनीकी क्षेत्रों पर फोकस बढ़ा है। सरकार की नीतियों और निवेश प्रस्तावों के जरिए राज्य में इन क्षेत्रों के लिए इकोसिस्टम विकसित करने की कोशिश की जा रही है। खास तौर पर नोएडा-ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर से जुड़े निवेश के प्रमुख केंद्र बन रहे हैं, जबकि लखनऊ में AI City जैसी परियोजनाओं की योजना पर काम हो रहा है। उत्तर प्रदेश की बड़ी आबादी और युवा कार्यबल को देखते हुए तकनीकी उद्योगों का विस्तार रोजगार, स्किलिंग और निवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों के लिए अलग-अलग नीतियां भी लागू की हैं। इनमें उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर पॉलिसी-2024 और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी-2025 प्रमुख हैं।

विशाल आबादी और युवा कार्यबल को टेक्नोलॉजी से जोड़ने की तैयारी

उत्तर प्रदेश की बड़ी आबादी लंबे समय से राज्य के लिए चुनौती और अवसर दोनों रही है। ऐसे में तकनीकी क्षेत्रों में रोजगार और स्किलिंग के अवसर पैदा करना राज्य की आर्थिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। AI, डीप-टेक, ब्लॉकचेन और 5G-6G जैसी उभरती तकनीकों में युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और अन्य संस्थागत ढांचे विकसित किए जा रहे हैं। लखनऊ में प्रस्तावित AI City इसी दिशा की एक प्रमुख परियोजना है। Invest UP के मुताबिक AI City को एक ऐसे इंटीग्रेटेड इनोवेशन जोन के रूप में विकसित करने की योजना है, जहां AI हार्डवेयर, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, रिसर्च, स्टार्टअप और AI आधारित समाधान एक ही इकोसिस्टम में विकसित हो सकें। इसके पहले चरण के लिए 20 एकड़ से अधिक क्षेत्र की योजना बताई गई है। डेटा सेंटर भी इस टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम का अहम हिस्सा हैं। उत्तर प्रदेश ने 2026 में नई Data Centre Policy अधिसूचित की है, जिसमें डेटा सेंटर पार्क, एज डेटा सेंटर, AI कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन डेटा सेंटर जैसी गतिविधियों के लिए प्रोत्साहन का प्रावधान है। इससे राज्य में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।

मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में यूपी की बड़ी हिस्सेदारी

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश पहले से ही एक बड़ा केंद्र बन चुका है। Invest UP के अनुसार राज्य देश के मोबाइल फोन उत्पादन में करीब 40 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है और यहां 230 से अधिक ESDM कंपनियां काम कर रही हैं। नोएडा और ग्रेटर नोएडा इस पूरे इकोसिस्टम के प्रमुख केंद्र हैं, जहां Samsung, OPPO और Vivo जैसी बड़ी कंपनियों की मौजूदगी है। अब फोकस केवल मोबाइल फोन की असेंबली तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी-2025 के जरिए डिस्प्ले मॉड्यूल, कैमरा मॉड्यूल, मल्टी-लेयर PCB, Li-ion cells और मोबाइल-IT हार्डवेयर से जुड़े कंपोनेंट्स के निर्माण को बढ़ावा देने की नीति बनाई गई है। इसका उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन को राज्य के भीतर ज्यादा मजबूत करना और कंपोनेंट निर्माण में निवेश आकर्षित करना है।

सेमीकंडक्टर सेक्टर में भी बढ़ रहा यूपी का दायरा

इलेक्ट्रॉनिक्स के बाद अब सेमीकंडक्टर सेक्टर पर भी उत्तर प्रदेश का फोकस बढ़ा है। राज्य ने उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर पॉलिसी-2024 लागू की है, जिसके तहत सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले फैब, कंपाउंड सेमीकंडक्टर, सिलिकॉन फोटोनिक्स, सेंसर फैब और ATMP/OSAT जैसी परियोजनाओं को प्रोत्साहन देने का प्रावधान है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस नीति के तहत प्रस्तावित निवेश 32,652 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है और पांच आवेदन प्राप्त हुए हैं। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में सेमीकंडक्टर से जुड़ी परियोजनाओं को भी मंजूरी मिली है। Invest UP के अनुसार जेवर एयरपोर्ट के पास HCL-Foxconn सेमीकंडक्टर यूनिट की मंजूरी ने राज्य के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को आगे बढ़ाया है। ऐसे में नोएडा-ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ-साथ सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन के लिए भी महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं।

लखनऊ की ब्रह्मोस यूनिट से डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग तक

उत्तर प्रदेश में टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार रक्षा क्षेत्र तक भी पहुंचा है। लखनऊ में ब्रह्मोस एयरोस्पेस से जुड़ी यूनिट स्थापित की गई है, जिसे उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के प्रमुख प्रोजेक्ट्स में गिना जाता है। इससे राज्य में रक्षा उत्पादन और उससे जुड़े औद्योगिक इकोसिस्टम के विस्तार की दिशा में काम हुआ है। टेक्नोलॉजी का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू डिजिटल कनेक्टिविटी और सरकारी सेवाओं का डिजिटलीकरण है। ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के साथ सरकार की कोशिश है कि डिजिटल सेवाओं की पहुंच केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे। ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी और ऑनलाइन सरकारी सेवाओं का विस्तार इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।

लखनऊ में AI City और IT इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस

उत्तर प्रदेश में टेक्नोलॉजी आधारित विकास के लिए सिर्फ कंपनियों और फैक्ट्रियों पर नहीं, बल्कि पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम पर भी जोर दिया जा रहा है। लखनऊ में AI City की योजना इसी रणनीति का हिस्सा है। आधिकारिक योजना के अनुसार यहां AI और DeepTech के लिए incubation centre, high-performance computing, AI testing और simulation labs जैसी सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही राज्य में डेटा सेंटर और IT पार्कों का विस्तार भी हो रहा है। 2025-26 के बजट से जुड़ी रिपोर्टों में आठ डेटा सेंटर पार्कों के लिए करीब 30 हजार करोड़ रुपये के निवेश और 900 MW क्षमता का लक्ष्य बताया गया था। वहीं 2026 की नई Data Centre Policy में AI Compute और Green Data Centre को भी प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है।

नोएडा-ग्रेटर नोएडा का इलेक्ट्रॉनिक्स और डेटा सेंटर इकोसिस्टम, यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र का सेमीकंडक्टर निवेश और लखनऊ का AI-IT फोकस मिलकर उत्तर प्रदेश के टेक्नोलॉजी लैंडस्केप को एक नई दिशा दे रहे हैं। हालांकि इन परियोजनाओं का वास्तविक प्रभाव निवेश के जमीन पर उतरने, उत्पादन शुरू होने, रोजगार पैदा होने और स्थानीय स्किलिंग के विस्तार के बाद ही पूरी तरह आंका जा सकेगा। कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश में तकनीकी विकास की तस्वीर अब केवल IT कंपनियों तक सीमित नहीं है। मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से लेकर सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, AI और DeepTech तक अलग-अलग क्षेत्रों को जोड़ने की कोशिश की जा रही है। राज्य की नीतियां इस इकोसिस्टम के लिए निवेश और बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने पर केंद्रित हैं। आने वाले वर्षों में इन योजनाओं का क्रियान्वयन यह तय करेगा कि उत्तर प्रदेश इस तकनीकी विस्तार को कितने बड़े पैमाने पर रोजगार, निवेश और औद्योगिक उत्पादन में बदल पाता है।

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