द फ्रंट डेस्क: अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने क्रिकेट में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए वेस्टइंडीज के फास्ट बॉलिंग ऑलराउंडर जेवोन सियरल्स को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। ICC के अनुसार सियरल्स पर एंटी-करप्शन कोड के उल्लंघन के गंभीर आरोप लगे हैं। यह पूरा मामला 2023-24 में बारबाडोस में आयोजित Bim10 लीग से जुड़ा हुआ है, जहां कथित तौर पर मैच के नतीजों और खेल की परिस्थितियों को प्रभावित करने की साजिश रची गई थी। ICC और क्रिकेट वेस्टइंडीज (CWI) ने इस मामले में संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए सियरल्स के साथ-साथ दो अन्य व्यक्तियों को भी अस्थायी रूप से सस्पेंड कर दिया है। इनमें टाइटन्स टीम के मालिक चितरंजन राठौड़ और टीम अधिकारी ट्रेवॉन ग्रिफिथ शामिल हैं। तीनों पर एंटी-करप्शन नियमों के उल्लंघन के तहत कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं और अब इस मामले की विस्तृत जांच जारी है।
IPL में खेल चुके हैं जेवोन सियरल्स
जेवोन सियरल्स क्रिकेट प्रेमियों के लिए कोई नया नाम नहीं हैं। वह इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में भी खेल चुके हैं। साल 2018 के IPL सीजन में उन्होंने कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) की ओर से हिस्सा लिया था। उस सीजन में सियरल्स को ज्यादा मौके नहीं मिले, लेकिन उन्होंने 4 मैचों में 2 विकेट अपने नाम किए थे। सियरल्स एक फास्ट बॉलिंग ऑलराउंडर के रूप में जाने जाते हैं और उन्होंने वेस्टइंडीज की अंडर-19 टीम का भी प्रतिनिधित्व किया है। हालांकि उनके प्रदर्शन के बावजूद उन्हें वेस्टइंडीज की सीनियर अंतरराष्ट्रीय टीम के लिए खेलने का अवसर नहीं मिल सका। इसके बाद वह विभिन्न घरेलू और फ्रेंचाइजी लीगों में खेलते रहे।

तीनों पर लगे कई गंभीर आरोप
ICC द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि इस मामले में तीनों व्यक्तियों पर एंटी-करप्शन कोड की कई धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।
- चितरंजन राठौड़ पर क्रिकेट वेस्टइंडीज के एंटी-करप्शन कोड के तहत तीन आरोप लगाए गए हैं।
- जेवोन सियरल्स पर कुल चार आरोप दर्ज किए गए हैं।
- वहीं ट्रेवॉन ग्रिफिथ पर चार आरोप CWI एंटी-करप्शन कोड के तहत और एक आरोप ICC एंटी-करप्शन कोड के तहत लगाया गया है।
इन आरोपों में मैच फिक्सिंग की साजिश रचना, खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को भ्रष्ट गतिविधियों में शामिल करने के लिए उकसाना, संदिग्ध प्रस्तावों की जानकारी अधिकारियों को न देना और एंटी-करप्शन जांच में सहयोग न करना जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। ICC का कहना है कि Bim10 लीग के दौरान मैच के परिणाम या खेल के कुछ पहलुओं को गलत तरीके से प्रभावित करने की कोशिश की गई थी। इसी वजह से मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई की गई है।

ICC ने तीनों आरोपियों को अपने ऊपर लगे आरोपों पर 14 दिनों के भीतर जवाब देने का मौका दिया है। इस दौरान ICC की एंटी-करप्शन यूनिट (ACU) मामले की विस्तृत जांच जारी रखेगी और सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला क्रिकेट में बढ़ती भ्रष्ट गतिविधियों के खिलाफ ICC की सख्त नीति का हिस्सा है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद लगातार ऐसे मामलों पर नजर बनाए हुए है ताकि खेल की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहे।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
यह मामला किसी एक खिलाड़ी तक सीमित नहीं है। इससे पहले भी कई खिलाड़ियों और अधिकारियों पर भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप लग चुके हैं। हाल ही में अमेरिका के क्रिकेटर आरोन जोन्स पर भी ICC और क्रिकेट वेस्टइंडीज के एंटी-करप्शन नियमों के उल्लंघन के पांच मामलों में आरोप लगाए गए थे। इन घटनाओं ने क्रिकेट में भ्रष्टाचार के खतरे को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इसी वजह से ICC और विभिन्न क्रिकेट बोर्ड अपनी एंटी-करप्शन यूनिट को और मजबूत कर रहे हैं ताकि किसी भी तरह की फिक्सिंग या अनैतिक गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
क्रिकेट की साख पर असर
क्रिकेट को लंबे समय से “जेंटलमैन गेम” कहा जाता है, लेकिन समय-समय पर सामने आने वाले फिक्सिंग के मामले इस खेल की साख को नुकसान पहुंचाते हैं। ICC का कहना है कि किसी भी तरह की भ्रष्ट गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जेवोन सियरल्स और अन्य आरोपियों के खिलाफ चल रही यह जांच भी इसी दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच पूरी होने के बाद ICC इस मामले में क्या अंतिम फैसला लेता है और आरोपियों पर आगे क्या कार्रवाई की जाती है।




