क्या पंजाब में ‘दिल्ली मॉडल’ की शिक्षा क्रांति लाना चाहती है AAP, क्या चुनाव में पड़ेगा असर?

क्या पंजाब में ‘दिल्ली मॉडल’ की शिक्षा क्रांति लाना चाहती है AAP, क्या चुनाव में पड़ेगा असर?

पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार शिक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शनिवार को सरकारी स्कूलों के 30 प्रिंसिपलों के एक और बैच को प्रशिक्षण के लिए सिंगापुर रवाना किया। यह इस कार्यक्रम का आठवां बैच है, जिसे 8 से 14 मार्च तक सिंगापुर की प्रिंसिपल अकादमी में प्रशिक्षण दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर प्रिंसिपलों से मुलाकात कर उन्हें शुभकामनाएं दीं और यात्रा की सफलता के लिए प्रोत्साहित किया। सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य शिक्षकों और स्कूल प्रमुखों को वैश्विक शिक्षा पद्धतियों से परिचित कराना और पंजाब की सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाना है। मुख्यमंत्री के अनुसार अब तक 234 प्रिंसिपल और शिक्षा अधिकारियों के आठ बैचों को सिंगापुर भेजा जा चुका है। इस कार्यक्रम के लिए पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाई गई, जिसमें जिला शिक्षा अधिकारियों द्वारा चुने गए प्रिंसिपलों का सत्यापन भी किया गया।

क्या पंजाब में लागू हो रहा है ‘दिल्ली मॉडल’?

आम आदमी पार्टी लंबे समय से दिल्ली में लागू किए गए शिक्षा मॉडल को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बताती रही है। दिल्ली में सरकारी स्कूलों के ढांचे में सुधार, शिक्षकों और प्रिंसिपलों को विदेश में प्रशिक्षण और स्कूल ऑफ एक्सीलेंस जैसी योजनाओं को काफी प्रचार मिला था। अब पंजाब में भी प्रिंसिपलों को विदेश में प्रशिक्षण देने और सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने की पहल को उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान का कहना है कि प्रशिक्षण के दौरान प्रिंसिपल विदेशों में अपनाई जा रही आधुनिक शिक्षा प्रणालियों और शिक्षण तरीकों को समझते हैं। इसके बाद वे लौटकर इन अनुभवों को अपने स्कूलों में लागू करते हैं और शिक्षकों व विद्यार्थियों के साथ साझा करते हैं। सरकार का दावा है कि इससे सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को भी वैश्विक स्तर की शिक्षा का अनुभव मिल सकेगा और शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आएगा।

शिक्षा के आंकड़ों से सरकार का दावा

मुख्यमंत्री मान ने विद्यार्थियों के प्रदर्शन पर संतोष जताते हुए कहा कि भारत सरकार के नेशनल अचीवमेंट सर्वे में पंजाब ने केरल को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया है। इसके अलावा छात्रों को सशस्त्र बलों में भर्ती, नीट, जेईई, क्लैट और निफ्ट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष कोचिंग भी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि स्कूल ऑफ एमिनेंस और अन्य सरकारी स्कूलों के लगभग 300 विद्यार्थियों ने जेईई मेन्स, जेईई एडवांस्ड और नीट जैसी परीक्षाओं के लिए क्वालिफाई किया है। आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर विशेष जोर दे रही है।

‘शिक्षा से ही तय होगी समृद्धि’

मुख्यमंत्री भगवंत मान का कहना है कि आने वाले समय में किसी व्यक्ति की समृद्धि उसकी संपत्ति से नहीं, बल्कि उसके बच्चों को मिली शिक्षा से तय होगी। इसी सोच के साथ राज्य सरकार हर बच्चे को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने पर ध्यान दे रही है। उन्होंने यह भी बताया कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर पंजाब के एक किसान की बेटी ने यूपीएससी परीक्षा में 15वां स्थान हासिल कर राज्य का नाम रोशन किया है। सरकार का कहना है कि वह राज्य की बेटियों को आगे बढ़ने के लिए अधिक अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है।

राजनीति और चुनाव पर क्या होगा असर?

पंजाब में शिक्षा सुधारों को लेकर सरकार लगातार अपनी नीतियों को आगे बढ़ा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन योजनाओं का असर जमीनी स्तर पर दिखाई देता है, तो आम आदमी पार्टी इसे आने वाले चुनावों में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर सकती है। कुल मिलाकर सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपलों को विदेश भेजने जैसी पहल को सिर्फ प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि पंजाब में ‘शिक्षा क्रांति’ की छवि बनाने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इसका असर शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ राज्य की राजनीति और चुनावी माहौल पर कितना पड़ता है।

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