• मुंबई, 24 दिसंबर 2020

ऑल इंडिया सुन्नी जमीयत-ए- उलेमा और रजा अकादमी ने चीन में निर्मित कोरोना वैक्सीन के इस्तेमाल नहीं करने का ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि अगर वैक्सीन में सुअर के शरीर की किसी भी चीज का इस्तेमाल किया गया है तो वह इस्लाम के खिलाफ है.

दुनिया के कई देशों की तरह भारत में भी कोरोना वायरस के खिलाफ जंग के लिए वैक्सीन की खोज का काम तेजी से चल रहा है और उम्मीद है कि जल्द ही महामारी के खिलाफ देश में टीकाकरण शुरू हो जाएगा. लेकिन इस बीच ऑल इंडिया सुन्नी जमीयत-ए-उलेमा और रजा अकादमी ने चीन में निर्मित कोरोना वैक्सीन के इस्तेमाल नहीं करने का ऐलान किया है

ऑल इंडिया सुन्नी जमीयत-ए-उलेमा और रजा अकादमी ने बुधवार को मुंबई में एक बैठक में फैसला लिया कि चीन में निर्मित कोरोना वैक्सीन में पोर्क जिलेटिन का इस्तेमाल किया गया है इसलिए वे इसका प्रयोग नहीं करेंगे.

ऑल इंडिया सुन्नी जमीयत-ए- उलेमा की बैठक

उलेमाओं की बुधवार को हुई बैठक में यह तय किया गया कि अगर वैक्सीन में सुअर के शरीर की किसी भी चीज का इस्तेमाल किया गया है तो वह इस्लाम के खिलाफ है. इस्लाम में सुअर के मांस पर प्रतिबंध है. उलेमाओं का कहना है कि उन्हें इस बात की जानकारी दी जाए कि वैक्सीन के इस्तेमाल में किन-किन चीजों का इस्तेमाल किया गया है.

बताया जाता है कि वैक्सीन में सामान्य तौर पर पोर्क जिलेटिन का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे में वैक्सीनेशन से पहले उन मुस्लिमों की चिंता बढ़ गई है, पोर्क से बने उत्पादों के प्रयोग को ‘हराम’ मानते हैं.

गौरतलब है कि कि कोरोना संकट के बीच वैक्सीन का इंतजार दुनियाभर के लोग कर रहे हैं, ऐसे में अब जब वैक्सीन आने वाली है तो एक चर्चा छिड़ गई है कि, क्या वैक्सीन में सुअर की चर्बी का इस्तेमाल हो रहा है? इसके चलते कई मुस्लिम देशों में विवाद चल रहा है. इस विवाद में वैक्सीन हराम है या नहीं, ये चर्चा जोरों पर है.