तिरुअनन्तपुरम, 10 मार्च 2021

केरल में विधानसभा चुनाव के पहले उम्मीदवारों के चयन में सीपीएम ने एक फैसला किया है जो चुनाव में उसके लिए असंतुष्टों की फौज खड़ी कर सकता है। सत्ताधारी सीपीएम ने राज्य में 85 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। इसमें 83 सीटों पर उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी है। इस लिस्ट में 33 सीटिंग विधायकों के टिकट काट दिए गए हैं। टिकट कटने वालों में 5 मंत्री भी शामिल हैं। इन सभी के टिकट काटने के पीछे पार्टी ने एक नियम का हवाला दिया है जो इस बार ही लागू किया गया है।

दो बार से जीत रहे विधायकों का टिकट नहीं

पार्टी के एक नेता के मुताबिक इस बार पार्टी ने फैसला किया है कि जो विधायक लगातार दो या उससे अधिक बार से विधायक हैं उन्हें टिकट नहीं दिया जाएगा। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि नये चेहरों को विधानसभा में मौका दिया जाए। अनुभवी नेता पार्टी का हिस्सा बने रहेंगे।

तो ये था पार्टी का नियम, जिस पर माकपा के पोलित ब्यूरो की मुहर लगते ही इस पर अमल शुरू हुआ और 33 जीते हुए विधायकों को छुट्टी कर दी गई। जिन लोगों के टिकट कटे हैं उनमें विधानसभा अध्यक्ष समेत 5 मंत्री भी शामिल हैं। एक विधायक को 6 बार से चुनाव जीत रहे थे लेकिन इस बार उनकी छुट्टी कर दी गई है।

5 बार विधायक रह चुके मुख्यमंत्री विजयन

जिन पांच मंत्रियों के टिकट काटे गए हैं उनमें टीएम थॉमस इसाक, ईपी जयरंजन, आर रविंद्रनाथ, जी सुधाकरन और एके बालन हैं। इसके साथ ही विधानसभा अध्यक्ष श्रीरामाकृष्णन का भी टिकट कटा है।

यहां तक तो ठीक है कि पार्टी का नियम है और टिकट कट गया लेकिन इस नियम से कई नेताओं में असंतोष भी फैल रहा है। उनका आरोप है कि ये नियम सब पर बराबर नहीं लागू किया गया है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन 5 बार विधायक रहे हैं लेकिन उनका टिकट नहीं कटा है। वो धर्मादम सीट से प्रत्याशी बनाए गए हैं। वैसे सीएम पिनराई विजयन को टिकट मिलने में नियम का उल्लंघन नहीं हुआ है। नियम है कि जो दो बार से विधायक हैं उनका टिकट काटा जाएगा। वैसे तो विजयन पांच बार से विधायक हैं लेकिन वह लगातार दो बार से नहीं है। अगर इस बार का चुनाव वो जीत जाते हैं तो अगली बार वह भी इस नियम के अंतर्गत आएंगे।

आत्मघाती हो सकता है नियम

हालांकि केरल में ये दो टर्म का नियम का खुद सीपीएम के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है। जीते हुए विधायकों का टिकट बिना किसी वजह के नया नियम लाकर काट देना बड़ी नाराजगी की वजह बन सकता है। यही नहीं इनमें से कई नेता ऐसे थे जो 3 बार से अधिक बार से लगातार जीत रहे थे। इन नेताओं का अपने क्षेत्र में जनाधार भी था जो नये उम्मीदवार के आने से पूरी तरह उसमें ट्रांसफर होना पूरी तरह संभव नहीं है। ऐसे में इन सीटों पर कांग्रेस ने अपनी कोशिश तेज कर दी है। हो सकता है नतीजे आने के बाद इनमें से कई सीटों पर कांग्रेस जीत भी जाए।

केरल की 140 सीटों पर एक चरण में 6 अप्रैल को वोटिंग होगी। 2 मई को चुनाव के नतीजे घोषित होंगे।