मुंबई, 6 जुलाई 2021

महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को राज्य विधानमंडल में पिछले अगस्त में केंद्र सरकार द्वारा पारित तीन कृषि अधिनियमों के जवाब में कृषि, सहकारिता, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति से संबंधित तीन संशोधित विधेयक सदन में पेश किए। राजस्व मंत्री, बालासाहेब थोरात ने कहा कि कृषि कानूनों में कुछ सुधारों को प्रस्तावित किया गया है। केंद्र के कृषि कानूनों का किसानों का एक वर्ग कड़ा विरोध कर रहा है।

राजस्व मंत्री बालासाहेब थोराट ने कहा कि केंद्र के कृषि कानून बिना चर्चा के पारित किए गए और उनके अनेक प्रावधान राज्य सरकारों के अधिकारों में हस्तक्षेप करते हैं। उन्होंने कहा, ”राज्य सरकार को कानून बनाने का अधिकार है और हम केंद्र के कृषि कानूनों में संशोधन का सुझाव देना चाहते हैं, जो हमारे मुताबिक किसान विरोधी हैं। मसौदा विधेयक उप मुख्यमंत्री अजित पवार की अध्यक्षता वाली मंत्रिमंडल की उप समिति ने तैयार किए हैं।

महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दादाजी भूसे द्वारा मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अधिनियम, 2020 पर किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) समझौते में संशोधन के लिए विधेयक प्रस्तुत किया गया। विधेयक में कहा गया है कि कृषि समझौता तब तक मान्य नहीं होगा जब तक कि किसान को भुगतान की गई कीमत न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के बराबर या उससे अधिक न हो। यह भी प्रस्तावित किया गया कि किसान और प्रायोजक अधिकतम दो साल की अवधि के लिए आपसी सहमति से एमएसपी से नीचे कृषि समझौता कर सकते हैं।

विधेयक में कहा गया है कि, उन फसलों के लिए जहां एमएसपी घोषित नहीं किया गया है, वे पारस्परिक रूप से सहमत मूल्य के साथ कृषि समझौता कर सकते हैं। साथ ही किसान को प्रताड़ित करने पर कम से कम तीन साल कैद की सजा का भी प्रावधान किया है। उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने कहा कि मसौदा अगले दो महीनों के लिए सुझावों और आपत्तियों के लिए खुला रहेगा और विधानसभा के शीतकालीन सत्र में इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।