25 दिसंबर, 2020

Amshipora Shopian encounter:भारतीय सेना के मेजर रैंक के एक अधिकारी को जम्मू-कश्मीर के राजौरी के तीन मजदूरों की हत्या का दोषी माना गया है। इन तीनों मजदूरों को शुरू में सुरक्षा बलों ने आतंकी होने का दावा किया था। यह एनकाउंटर इस साल जुलाई में प्रदेश के शोपियां जिले में हुआ था। बाद में जब इन तीनों के शवों को कब्र से निकालकर डीएनए टेस्ट किया गया तो ये लोग राजौरी के निवासी निकले, जिनके परिवार वालों ने उनकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कर रखी थी। माना जा रहा है कि जब सारे सबूत मेजर के खिलाफ मिले हैं तो उनके कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया शुरू की जा सकती

मेजर के खिलाफ मिले सबूत-रिपोर्ट

इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के मुताबिक इस साल जुलाई में जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले के अमशीपोरा में हुई तीन मजदूरों की हत्या के मामले में सेना के एक मेजर के खिलाफ सबूत मिल गए हैं। इस घटना में मारे जाने वाले लोगों में 16 साल का एक लड़का भी था,जो अपने गृहनगर राजौरीसे काम की तलाश में घाटी गए थे। लेकिन, 18 जुलाई को तड़के शोपियां के अमशीपोरा गांव में इनकी हत्या कर दीगई थी। शुरू में सुरक्षा बलों ने इन्हें आतंकी बताया था और उन्हें एनकाउंटर में मारे जाने की बात कही गई थी। सितंबर में एक कोर्ट ऑफ इनक्वायरी ने ही प्रथमदृष्टया इस मामले को सुरक्षा बलों को मिले अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। इस मामले में सबूत जुटाने का काम पिछले हफ्ते ही पूरा हुआ है और पाया गया है कि दोषी मेजर के खिलाफ कई धाराओं में मुकदमा चलना चाहिए।

अब कोर्ट मार्शल की तैयारी

अखबार ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि मेजर के खिलाफ तमाम सबूतों को नॉर्दर्न कमांड के जीओसी-इन-चार्ज लेफ्टिनेंट वाईके जोषी क भेज दिया गया है। इस मामले में अगली प्रक्रिया कोर्ट मार्शल (court martial) की होती है। रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने गुरुवार को कहा कि, ‘सबूत इकट्ठा करने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारी उसकी छानबीन के साथ ही कानूनी सलाकारों से राय ले रहे हैं। भारतीय सेना नैतिक व्यवहार के प्रति प्रतिबद्ध है। अगली जानकारी इस तरह से साझा की जाएगी ताकि सेना के कानून के तहत प्रक्रिया को लेकर कोई पूर्वाग्रह ना रहे।’

पहले आई थी एनकाउंटर की बात

अमशीपोरा की वारदात 18 जुलाई को हुई थी, जिसमें 62 राष्ट्रीय राइफल्स के एक मेजर और दो जवानों ने एक एनकाउंटर पार्टी बनाई, जिसमें बाद में जम्मू-कश्मीर और पुलिस की टीम भी शामिल हो गई। 19 जुलाई को आरआर के एक कमांडर ने प्रेस कांफ्रेंस में तीन आतंकियों के एनकाउंटर में मारे जाने की घोषणा की। बताया गया कि खास सूचना के आधार पर सर्च ऑपरेशन के दौरान यह मुठभेड़ हुई। कहा गया कि शवों की बरामदगी के दौरान हथियार, गोला-बारूद और आईईडी मटेरियल भी बरामद हुई।

शवों के डीएनए टेस्ट से सच आया सामने

लेकिन, बाद में खुलासा हुआ कि वो तीनों शव राजौरी के रहने वाले इम्तियाज अहमद, अबरार अहमद और मोहम्मद इबरार के थे, जिनके परिवार वालों ने अगस्त में उनकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। ये लोग 16 जुलाई तक परिवार वालों से फोन पर संपर्क में थे। परिवार वालों का कहना है कि जब उन्होंने एनकाइंटर में मारे गए लोगों के शवों को देखा तो उन्हें पहचान लिया। फिर इसपर काफी विवाद शुरू हो गया और सेना ने कोर्ट ऑफ इनक्वायरी गठित कर दी और पुलिस अपनी ओर से जांच में जुटी रही। इन लोगों को बारामुला में दफनाया गया था, अक्टूबर में उनके शवों को निकाल हुए डीएनए टेस्ट में पता चल गया कि ये तीनों वही गुमशुदा लोग थे।