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ममता की TMC को नया नाम-सिंबल क्यों मिला? चुनाव आयोग के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट क्यों पहुंचीं दीदी, पूरा मामला

ममता की TMC को नया नाम-सिंबल क्यों मिला? चुनाव आयोग के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट क्यों पहुंचीं दीदी, पूरा मामला

Mamata Banerjee Supreme Court: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस यानी TMC के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहा विवाद अब चुनाव आयोग से निकलकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को मूल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल से रोक दिया गया है। इसके बजाय आगामी उपचुनावों के लिए ममता गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है। वहीं, प्रतिद्वंद्वी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह दिया गया है। ऐसे में अब विवाद सिर्फ पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर आगामी उपचुनावों और दोनों गुटों की चुनावी पहचान पर भी पड़ रहा है। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसके बाद पूरे मामले में अब कानूनी लड़ाई भी जुड़ गई है।

चुनाव आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, जिसमें TMC के पुराने नाम और चुनाव चिन्ह को अंतरिम तौर पर फ्रीज किया गया है। उनकी याचिका में आयोग के इस आदेश को चुनौती दी गई है कि दोनों गुट फिलहाल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल और घास’ वाले पारंपरिक चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल नहीं कर सकते। यह मामला ऐसे समय अदालत पहुंचा है, जब पश्चिम बंगाल में आगामी उपचुनावों की प्रक्रिया चल रही है और दोनों गुटों के सामने नई चुनावी पहचान के साथ मैदान में उतरने की चुनौती है। रिपोर्टों के मुताबिक, ममता बनर्जी की याचिका को 21 सितंबर को तत्काल सुनवाई के लिए उल्लेख किए जाने की संभावना है। यानी आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई हो सकती है और अदालत की कार्यवाही से यह स्पष्ट हो सकता है कि चुनाव आयोग की अंतरिम व्यवस्था में कोई बदलाव होता है या फिलहाल यही व्यवस्था जारी रहती है। ममता बनर्जी ने आयोग के फैसले पर सार्वजनिक रूप से भी आपत्ति जताई है और पुराने पार्टी नाम तथा चुनाव चिन्ह को अपनी राजनीतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है। उन्होंने इस फैसले के खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी रखने की बात कही है। हालांकि, ममता बनर्जी की ओर से लगाए गए आरोप राजनीतिक दावे हैं और उन पर अंतिम स्थिति अदालत की सुनवाई तथा संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही स्पष्ट होगी।

ममता गुट को मिला ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ का चिन्ह

चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले के बाद ममता बनर्जी का गुट आगामी उपचुनावों में ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम से चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेगा। आयोग ने इस गुट को ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ का चुनाव चिन्ह आवंटित किया है। वहीं, दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह दिया गया है। इसका मतलब यह है कि आगामी उपचुनावों में दोनों गुटों की पहचान अलग-अलग होगी और वे अपने-अपने नए नाम और चुनाव चिन्ह के साथ चुनावी मैदान में उतरेंगे। यह व्यवस्था फिलहाल अंतरिम है, इसलिए इसे TMC के मूल नाम और चुनाव चिन्ह पर अंतिम फैसला नहीं माना जा रहा है। ममता गुट के लिए फुटबॉल खिलाड़ी का चिन्ह मिलने के बाद यह भी चर्चा में है कि पश्चिम बंगाल में फुटबॉल की लोकप्रियता और ममता बनर्जी के इस खेल के प्रति सार्वजनिक लगाव के कारण यह चिन्ह राजनीतिक तौर पर भी ध्यान खींच रहा है। हालांकि, चुनाव चिन्ह का आवंटन चुनाव आयोग की प्रक्रिया के तहत हुआ है और इसे किसी राजनीतिक संदेश या स्थायी पहचान के रूप में देखना जरूरी नहीं है। फिलहाल इसका व्यावहारिक महत्व यही है कि ममता गुट आगामी चुनावी प्रक्रिया में इसी नए नाम और चिन्ह के साथ अपनी पहचान बनाएगा, जबकि प्रतिद्वंद्वी गुट को अलग नाम और चिन्ह के साथ मैदान में उतरना होगा।

TMC का पुराना नाम और ‘फूल-घास’ सिंबल क्यों हुआ फ्रीज?

दरअसल, पूरे विवाद की शुरुआत तृणमूल कांग्रेस के भीतर पार्टी के नियंत्रण और संगठनात्मक पहचान को लेकर सामने आए मतभेद से हुई है। दोनों गुट पार्टी के नाम और पारंपरिक चुनाव चिन्ह पर अपना दावा कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में चुनाव आयोग के सामने यह सवाल था कि आगामी चुनाव में किस पक्ष को मूल पार्टी के नाम और आरक्षित चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल करने दिया जाए। इसी विवाद के बीच आयोग ने फिलहाल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पारंपरिक ‘फूल और घास’ वाले चुनाव चिन्ह को फ्रीज कर दिया। इसका सीधा मतलब है कि मौजूदा अंतरिम व्यवस्था के दौरान दोनों गुट इस पुराने नाम और चिन्ह का इस्तेमाल नहीं कर सकते। इसके बाद दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह के विकल्प देने को कहा गया और चुनाव आयोग ने उनकी ओर से दिए गए विकल्पों के आधार पर नए नाम और चिन्ह आवंटित किए। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और फुटबॉल खिलाड़ी का चिन्ह मिला, जबकि प्रतिद्वंद्वी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ और लिफाफा चुनाव चिन्ह दिया गया। यहां यह समझना जरूरी है कि पुराने नाम और चिन्ह को फ्रीज करने का मतलब यह नहीं है कि चुनाव आयोग ने स्थायी रूप से तय कर दिया है कि मूल TMC की पहचान किस गुट के पास रहेगी। यह फिलहाल चुनावी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए बनाई गई अंतरिम व्यवस्था है। पार्टी के नाम और चिन्ह पर अंतिम स्थिति आगे की चुनाव आयोग की कार्यवाही और कानूनी प्रक्रिया से तय होगी।

नंदीग्राम उपचुनाव में भी बदला पूरा समीकरण

TMC के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब पश्चिम बंगाल में आगामी उपचुनावों की तैयारियां चल रही हैं। नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। इसी बीच नंदीग्राम सीट से ममता गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया। नामांकन वापसी के बाद ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया। इससे उपचुनाव की राजनीतिक स्थिति में भी बदलाव आया है। उम्मीदवार के नामांकन वापस लेने को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हुए। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, बीजेपी सूत्रों ने दावा किया कि नामांकन वापस लेने से पहले संचिता प्रधान डे ने शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी। हालांकि, यह दावा बीजेपी सूत्रों के हवाले से है और इसे उसी रूप में देखा जाना चाहिए। दूसरी ओर, ममता बनर्जी ने उम्मीदवार के नामांकन वापस लेने के घटनाक्रम पर गंभीर आपत्ति जताई और इसे लोकतंत्र से जोड़ते हुए कई आरोप लगाए। उन्होंने इसे अपनी पार्टी के खिलाफ चल रही कार्रवाई और राजनीतिक घटनाक्रम का हिस्सा बताया। ऐसे में नंदीग्राम का घटनाक्रम भी TMC के नाम और चुनाव चिन्ह से जुड़े विवाद के बीच महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि यहां ममता गुट की उम्मीदवार के नामांकन वापस लेने के बाद पार्टी ने कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने का फैसला किया है।

अब पुराने सिंबल और पार्टी नाम पर क्या होगा?

अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ममता बनर्जी के गुट को आगे चलकर फिर से ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल और घास’ वाला पारंपरिक चुनाव चिन्ह मिलेगा। फिलहाल चुनाव आयोग की ओर से दोनों गुटों को पुराने नाम और चिन्ह के इस्तेमाल से रोकते हुए अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह दिए गए हैं। ममता गुट के पास ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और फुटबॉल खिलाड़ी, जबकि प्रतिद्वंद्वी गुट के पास ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ और लिफाफा चुनाव चिन्ह है। लेकिन यह व्यवस्था स्थायी फैसला नहीं है। ममता बनर्जी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिए जाने के बाद अब मामले का कानूनी पक्ष भी महत्वपूर्ण हो गया है। अदालत में होने वाली सुनवाई से यह पता चलेगा कि चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश को लेकर क्या रुख अपनाया जाता है और क्या मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव किया जाता है। दूसरी तरफ, चुनाव आयोग की आगे की प्रक्रिया भी पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर दोनों गुटों के दावों को तय करने में महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल आगामी उपचुनावों के लिए दोनों गुटों को अपने-अपने नए नाम और चुनाव चिन्ह के साथ चुनावी प्रक्रिया में आगे बढ़ना होगा। यानी TMC का पुराना नाम और ‘फूल-घास’ वाला चुनाव चिन्ह फिलहाल फ्रीज है, ममता गुट को नया नाम और फुटबॉल खिलाड़ी का चिन्ह मिला है और अब इस पूरे विवाद का अगला बड़ा पड़ाव सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई होगी।

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