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कूनो में गूंजी किलकारी, भारत में जन्मी मादा चीता KGP12 ने दिए 4 शावक, 56 पहुंची देश में चीतों की संख्या

कूनो में गूंजी किलकारी, भारत में जन्मी मादा चीता KGP12 ने दिए 4 शावक, 56 पहुंची देश में चीतों की संख्या

Kuno Cheetah News: मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी खुशखबरी सामने आई है। भारत में जन्मी मादा चीता KGP12 ने चार शावकों को जन्म दिया है। खास बात यह है कि KGP12 खुद भारत में जन्मी चीता है और अब उसके शावकों का जन्म प्रोजेक्ट चीता के उस चरण को दर्शाता है, जिसमें भारत में लाई गई चीताओं से आगे उनकी अगली पीढ़ियां भी देश में तैयार हो रही हैं। नए शावकों के जन्म के बाद भारत में जीवित चीतों की संख्या 56 हो गई है, जिनमें 36 भारत में जन्मे चीते शामिल हैं। यह घटनाक्रम प्रोजेक्ट चीता के चार साल पूरे होने के ठीक बाद सामने आया है।

कूनो में चार नए मेहमानों का आगमन

कूनो नेशनल पार्क में मादा चीता KGP12 के चार शावकों को जन्म देने की खबर ने एक बार फिर भारत के चीता संरक्षण कार्यक्रम को चर्चा में ला दिया है। 18 सितंबर 2026 को सामने आई जानकारी के मुताबिक KGP12 ने चार शावकों को जन्म दिया। इस खबर की पुष्टि केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट के जरिए की। उन्होंने इसे प्रोजेक्ट चीता के लिए ऐतिहासिक और खुशी का पल बताया। मंत्री ने बताया कि भारत के चीता प्रोजेक्ट के चार साल पूरे होने के एक दिन बाद भारत में जन्मी मादा चीता KGP12 ने कूनो में चार शावकों को जन्म दिया है। नए शावकों के जन्म के साथ कूनो में एक बार फिर चीता कुनबे के विस्तार की उम्मीद मजबूत हुई है। खास बात यह है कि यह जन्म उस समय हुआ है, जब भारत में चीता संरक्षण कार्यक्रम अपने शुरुआती चार साल पूरे कर चुका है।

भूपेंद्र यादव ने अपने पोस्ट में इसे प्रोजेक्ट चीता के लिए “ऐतिहासिक और खुशी का पल” बताया। उन्होंने चार नए शावकों के जन्म को भारत में चीता संरक्षण की दिशा में उम्मीद और निरंतर प्रयासों से जोड़ते हुए कूनो नेशनल पार्क और प्रोजेक्ट चीता की पूरी टीम को बधाई दी। पोस्ट के साथ साझा की गई तस्वीरों और वीडियो में मादा चीता के साथ छोटे शावक नजर आ रहे हैं। शावकों को अपनी मां के करीब देखा जा सकता है, जिससे कूनो में इस नए चीता परिवार की तस्वीर सामने आती है।

क्यों खास हैं KGP12 के चार शावक?

KGP12 के चार शावकों का जन्म इसलिए खास है क्योंकि KGP12 खुद भारत में जन्मी मादा चीता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार KGP12 का जन्म कूनो में हुआ था और अब उसी भारत में जन्मी मादा चीता ने अपनी अगली पीढ़ी को जन्म दिया है। यानी प्रोजेक्ट चीता के तहत भारत में जन्मी एक पीढ़ी अब आगे अपनी संतान को जन्म दे रही है। संरक्षण की दृष्टि से यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी पुनर्वास कार्यक्रम की दीर्घकालिक सफलता केवल दूसरे देशों से लाई गई वन्यजीव प्रजातियों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि उनके भारत में प्रजनन करने और नई पीढ़ी के विकसित होने से भी जुड़ी होती है। चार नए शावकों का जन्म इस लिहाज से प्रोजेक्ट चीता की आगे की यात्रा के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।

चार साल में कहां पहुंचा प्रोजेक्ट चीता?

भारत में प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को हुई थी, जब नामीबिया से आठ चीते कूनो नेशनल पार्क लाए गए थे। इसके बाद फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते भारत लाए गए। आगे चलकर दूसरे चरणों में भी चीतों को भारत लाया गया और कूनो में उनके प्रजनन की प्रक्रिया शुरू हुई। इस दौरान भारत में कई शावकों का जन्म हुआ। अब KGP12 के चार शावकों के जन्म के साथ देश में जीवित चीतों की संख्या 56 तक पहुंच गई है। इनमें भारत में जन्मे चीतों की संख्या भी बढ़ी है। प्रोजेक्ट चीता के चार साल पूरे होने के बाद कार्यक्रम का फोकस अब केवल चीतों को भारत लाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां जन्मी पीढ़ियों के संरक्षण, उनके अनुकूलन और भविष्य में स्थायी चीता आबादी विकसित करने पर भी है।

कूनो में 53 चीते, गांधी सागर में भी मौजूदगी

नए शावकों के जन्म के बाद कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या 53 हो गई है, जबकि मध्य प्रदेश के गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में तीन चीते मौजूद हैं। इस तरह देश में कुल जीवित चीतों की संख्या 56 हो गई है। कूनो में कुछ चीते खुले वन क्षेत्र में विचरण कर रहे हैं, जबकि कुछ को सॉफ्ट रिलीज बाड़ों में रखा गया है। वहीं गांधी सागर में चीतों की मौजूदगी प्रोजेक्ट के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। संरक्षण कार्यक्रम को एक ही स्थान तक सीमित रखने के बजाय दूसरे उपयुक्त आवासों तक विस्तार देने की कोशिश की जा रही है, ताकि भविष्य में चीता आबादी को अलग-अलग सुरक्षित क्षेत्रों में विकसित किया जा सके।

भारत में चीता संरक्षण के लिए क्या मायने रखता है यह जन्म?

KGP12 के चार शावकों का जन्म प्रोजेक्ट चीता के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, क्योंकि यह भारत में जन्मी मादा से अगली पीढ़ी के जन्म को दर्शाता है। हालांकि, शावकों के जन्म के बाद उनके स्वस्थ तरीके से बड़े होने और सुरक्षित रहने की चुनौती भी महत्वपूर्ण होगी। कूनो में पिछले चार वर्षों के दौरान चीतों के अनुकूलन, प्रजनन, निगरानी और खुले वन क्षेत्र में उनके व्यवहार को समझने का काम लगातार किया गया है। अब भारत में जन्मी नई पीढ़ी के चीतों को सुरक्षित रखना और उन्हें उपयुक्त प्राकृतिक वातावरण में विकसित होने का अवसर देना संरक्षण कार्यक्रम का अहम हिस्सा होगा। ऐसे में KGP12 के चार शावकों का जन्म केवल चीतों की संख्या बढ़ने की खबर नहीं है, बल्कि भारत में चीता संरक्षण की अगली पीढ़ी के सामने आने का भी संकेत है।

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