बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। गंगा समेत कई प्रमुख नदियों के जलस्तर ने राज्य के बड़े हिस्से में जनजीवन को प्रभावित किया है। 14 जिलों में करीब 35.89 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं और कई इलाकों में सड़क संपर्क से लेकर रोजमर्रा की जरूरतों तक पर असर पड़ा है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया और अरवल बाढ़ से प्रभावित हैं। इन जिलों के 82 प्रखंडों की 491 ग्राम पंचायतों में बाढ़ का पानी पहुंचा है। सोमवार की तुलना में मंगलवार तक प्रभावित आबादी का दायरा भी बढ़ा है।
इस पूरे संकट में भागलपुर का सुल्तानगंज सबसे संवेदनशील केंद्रों में है। यहां गंगा का जलस्तर 8 सितंबर की सुबह 36.80 मीटर तक पहुंच गया। यह अगस्त 2021 में दर्ज 36.75 मीटर के पिछले उच्चतम बाढ़ स्तर से 5 सेंटीमीटर अधिक है। यानी सुल्तानगंज में गंगा ने अपने पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है।
गंगा के बढ़े जलस्तर का असर भागलपुर और आसपास के इलाकों में साफ दिखाई दे रहा है। एनएच-80 के कुछ हिस्सों पर बाढ़ का पानी पहुंच गया है, जिससे आवागमन प्रभावित हुआ है। ग्रामीण इलाकों में भी कई सड़कें पानी में डूबी हैं और लोगों को आने-जाने के लिए नावों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
पटना में भी पुनपुन नदी की स्थिति चिंता बढ़ा रही है। श्रीपालपुर में पुनपुन का जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर दर्ज किया गया है। इसके कारण पटना के दक्षिणी इलाकों और आसपास के निचले क्षेत्रों में बाढ़ का दबाव बना हुआ है।
गंगा के अलावा गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, बागमती और घाघरा जैसी नदियां भी कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। कुछ नदियों में जलस्तर या जलस्राव घटने के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन निचले इलाकों में इसका असर तुरंत खत्म नहीं हुआ है।
मुंगेर और भागलपुर की ओर गंगा का दबाव बढ़ने की वजह से प्रशासन की चिंता बनी हुई है। वहीं दूसरी तरफ सोन और कोसी के जलस्राव में कमी आने से कुछ क्षेत्रों में राहत की उम्मीद भी जगी है।
बाढ़ की वजह से वैशाली में एक नाव के पलटने की घटना भी सामने आई। नाव पर 11 लोग सवार थे, जिनमें से नौ को बचा लिया गया, जबकि एक व्यक्ति की मौत हुई और एक अन्य के लापता होने की सूचना दी गई।
सरकार की ओर से राहत और बचाव के लिए बड़े स्तर पर संसाधन लगाए गए हैं। प्रभावित इलाकों में 456 सामुदायिक रसोई और 14 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं। राहत शिविरों में रहने, भोजन और चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।
सितंबर में अब तक बिहार में सामान्य से करीब 31 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है। आने वाले दिनों में भी कुछ हिस्सों में बारिश जारी रहने की संभावना है, इसलिए नदियों के जलस्तर को लेकर निगरानी जरूरी बनी हुई है।
हालांकि कुछ नदियों का जलस्तर घटने लगा है, लेकिन बाढ़ प्रभावित परिवारों की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। पानी से घिरे गांवों में पीने के साफ पानी, भोजन, आवागमन और पशुओं के चारे जैसी समस्याएं लोगों की चिंता बढ़ा रही हैं। कई जगह लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने के लिए प्रशासन और नावों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।




