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क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मूज और कैसे पड़ा इसका नाम? क्यों इसे कहा जाता है दुनिया की ऊर्जा ‘लाइफलाइन’

क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मूज और कैसे पड़ा इसका नाम? क्यों इसे कहा जाता है दुनिया की ऊर्जा ‘लाइफलाइन’

द फ्रंट डेस्क: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मूज (Strait of Hormuz) एक बार फिर वैश्विक चर्चा का केंद्र बन गया है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते टकराव के कारण इस समुद्री मार्ग की अहमियत और भी ज्यादा बढ़ गई है। हाल के दिनों में इस इलाके से गुजरने वाले तेल और गैस के जहाजों पर हमलों और सैन्य गतिविधियों की खबरों ने दुनिया भर के देशों की चिंता बढ़ा दी है। दरअसल, दुनिया के कई बड़े तेल उत्पादक देशों का कच्चा तेल इसी समुद्री रास्ते से होकर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचता है। ऐसे में अगर यह मार्ग कुछ समय के लिए भी प्रभावित होता है, तो इसका असर पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। यही वजह है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मूज को अक्सर दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की ‘लाइफलाइन’ कहा जाता है। हाल के तनाव के कारण यह सवाल भी उठने लगा है कि आखिर यह समुद्री रास्ता इतना महत्वपूर्ण क्यों है और इसका नाम स्ट्रेट ऑफ होर्मूज कैसे पड़ा। आइए इसे विस्तार से समझते हैं।

क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मूज?

“स्ट्रेट” का अर्थ होता है जलडमरूमध्य, यानी पानी का वह संकरा रास्ता जो दो बड़े समुद्री क्षेत्रों या खाड़ियों को जोड़ता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मूज फारस की खाड़ी (Persian Gulf) को ओमान की खाड़ी (Gulf of Oman) और आगे अरब सागर से जोड़ता है। यह समुद्री मार्ग भौगोलिक रूप से ईरान और ओमान के बीच स्थित है और रणनीतिक दृष्टि से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में से एक माना जाता है। यह रास्ता अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार, खासकर तेल और गैस के परिवहन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दुनिया के कई बड़े तेल उत्पादक देश—जैसे सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर—अपना अधिकांश कच्चा तेल इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाते हैं।

इसी वजह से वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से स्ट्रेट ऑफ होर्मूज का महत्व बेहद ज्यादा है।

‘होर्मूज’ नाम कैसे पड़ा?

इतिहासकारों के अनुसार “होर्मूज़” नाम की उत्पत्ति एक प्राचीन शहर और समुद्री व्यापारिक केंद्र से जुड़ी हुई है। शुरुआती समय में होर्मूज़ नाम का एक समृद्ध व्यापारिक शहर ईरान के तट के पास स्थित था। समुद्री व्यापार बढ़ने के साथ इस शहर का महत्व भी तेजी से बढ़ा। बाद में व्यापार और सुरक्षा कारणों से शासकों ने अपना मुख्य केंद्र एक द्वीप पर स्थानांतरित कर दिया, जिसे होर्मूज़ द्वीप कहा जाने लगा। यह द्वीप फारस की खाड़ी के मुहाने पर स्थित था और समुद्री व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया। इस इलाके से गुजरने वाले जहाज अक्सर यहां रुकते थे, व्यापार करते थे और आगे की यात्रा पर निकलते थे। धीरे-धीरे आसपास के समुद्री मार्ग को भी उसी शहर और द्वीप के नाम से जाना जाने लगा। इस तरह पहले शहर और द्वीप का नाम होर्मूज़ था और बाद में उसी से समुद्री जलडमरूमध्य का नाम स्ट्रेट ऑफ होर्मूज़ पड़ गया।

नाम के पीछे धार्मिक और भाषाई कड़ी

कुछ इतिहासकार यह भी मानते हैं कि “होर्मूज़” नाम का संबंध प्राचीन फारसी धार्मिक परंपरा से हो सकता है। फारसी और अवेस्ता ग्रंथों में ईश्वर के लिए एक महत्वपूर्ण नाम अहुरा मज़्दा मिलता है। भाषा और उच्चारण में समय के साथ होने वाले बदलावों के कारण “अहुरा मज़्दा” से “ओरमज़्द” और “ओहरमज़्द” जैसे रूप बने। बाद में स्थानीय बोलियों और उच्चारणों में यह शब्द बदलकर ओरमुज़, होरमुज़ और अंततः होर्मूज़ बन गया। कुछ विद्वानों का मानना है कि यह नाम शक्ति, संरक्षण या शुभता के प्रतीक के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता था। हालांकि इस सिद्धांत को सभी इतिहासकार पूरी तरह स्वीकार नहीं करते, लेकिन इसे एक संभावित भाषाई कड़ी माना जाता है।

अलग-अलग भाषाओं में बदलता रहा नाम

इतिहास में इस क्षेत्र के नाम के कई अलग-अलग रूप देखने को मिलते हैं। अरबी और फारसी ग्रंथों में इसे कभी हुरमूज़ तो कभी होरमुज़ लिखा गया है। यूरोपीय यात्रियों और व्यापारियों ने भी इसे अपनी भाषाओं के अनुसार अलग-अलग रूपों में दर्ज किया। उदाहरण के तौर पर ओरमूज़, ओरमुस और होर्मूज़ जैसे नाम यूरोपीय यात्रा विवरणों और व्यापारिक दस्तावेजों में मिलते हैं। प्रसिद्ध यात्री मार्को पोलो और बाद में पुर्तगाली, डच तथा अंग्रेज़ी व्यापारियों के लेखों में भी इस नाम के विभिन्न रूपों का उल्लेख मिलता है। समय के साथ अंग्रेज़ी में स्ट्रेट ऑफ होर्मूज़ नाम प्रचलित हो गया और आज अंतरराष्ट्रीय मानचित्रों और आधिकारिक दस्तावेजों में यही नाम इस्तेमाल किया जाता है।

क्यों कहा जाता है इसे दुनिया की ‘लाइफलाइन’?

स्ट्रेट ऑफ होर्मूज को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवन रेखा माना जाता है। इसके पीछे कई ठोस कारण हैं।

तेल का विशाल व्यापार: सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे बड़े तेल उत्पादक देश अपना कच्चा तेल इसी रास्ते से दुनिया के अलग-अलग देशों तक भेजते हैं। अनुमान के मुताबिक रोजाना लगभग 2 करोड़ बैरल तेल इस जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।

गैस की आपूर्ति: कतर दुनिया का सबसे बड़ा LNG (Liquefied Natural Gas) निर्यातक देश है। कतर का लगभग पूरा गैस निर्यात इसी समुद्री मार्ग के जरिए दुनिया के कई देशों तक पहुंचता है।

वैश्विक ऊर्जा निर्भरता: दुनिया के कई देश—खासकर एशिया और यूरोप के—ऊर्जा जरूरतों के लिए इस समुद्री मार्ग पर निर्भर हैं। ऐसे में अगर यह रास्ता कुछ समय के लिए भी बंद हो जाए, तो वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है।

कितना संकरा है यह समुद्री रास्ता?

स्ट्रेट ऑफ होर्मूज भौगोलिक रूप से काफी संकरा है। इसकी अधिकतम चौड़ाई लगभग 33 किलोमीटर है। हालांकि जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए जो विशेष शिपिंग लेन बनाई गई है, उसकी चौड़ाई केवल करीब 3 किलोमीटर होती है। इतनी संकरी जगह होने के कारण यहां जहाजों की आवाजाही पर नियंत्रण रखना अपेक्षाकृत आसान होता है, लेकिन यही वजह इसे रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील भी बनाती है।

क्यों बढ़ जाता है यहां तनाव?

स्ट्रेट ऑफ होर्मूज लंबे समय से भू-राजनीतिक तनाव का केंद्र रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच टकराव के दौरान कई बार इस समुद्री मार्ग को बंद करने की धमकी दी जा चुकी है। हाल के वर्षों में इस इलाके में व्यापारिक जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों की घटनाएं भी सामने आई हैं। इसके अलावा भारी मात्रा में तेल परिवहन होने के कारण समुद्री प्रदूषण का खतरा भी हमेशा बना रहता है। जब भी इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, तो इसका असर तुरंत वैश्विक बाजारों में दिखाई देने लगता है—तेल की कीमतें बढ़ जाती हैं, शेयर बाजारों में गिरावट आती है और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ जाता है।

दुनिया के लिए क्यों इतना अहम है यह रास्ता?

स्ट्रेट ऑफ होर्मूज केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं है, बल्कि आधुनिक वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार है। सरल शब्दों में कहें तो यह वही समुद्री रास्ता है जिसके जरिए दुनिया के कई देशों तक तेल और गैस पहुंचती है। यही ईंधन दुनिया के घरों में बिजली, उद्योगों में उत्पादन और सड़कों पर चलने वाली गाड़ियों को ऊर्जा देता है। इसलिए स्ट्रेट ऑफ होर्मूज की सुरक्षा और स्थिरता पूरी दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। अगर यह मार्ग प्रभावित होता है, तो इसका असर केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

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