पंजाब विधानसभा के बजट सत्र के दौरान एक दिलचस्प राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया, जब राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने अपने अभिभाषण में मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार की कई योजनाओं और कामों का जिक्र किया। राज्यपाल की यह टिप्पणी इसलिए चर्चा में है क्योंकि पिछले कुछ समय में पंजाब में राजभवन और राज्य सरकार के बीच कई बार टकराव देखने को मिला था। ऐसे में AAP सरकार के कामों की सार्वजनिक तौर पर की गई सराहना को राजनीतिक हलकों में नए संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
राज्यपाल का अभिभाषण कैसे तैयार होता है?
विधानसभा सत्र की शुरुआत में राज्यपाल का अभिभाषण एक संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा होता है। आमतौर पर इसका मसौदा राज्य सरकार ही तैयार करती है, जिसमें सरकार की नीतियों, योजनाओं और उपलब्धियों का उल्लेख किया जाता है। हाल के वर्षों में कई राज्यों में यह भी देखने को मिला है कि जब राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच मतभेद होते हैं तो राज्यपाल अभिभाषण के कुछ हिस्सों को पढ़ने से इनकार कर देते हैं। कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों में ऐसे उदाहरण सामने आ चुके हैं। इसलिए पंजाब में राज्यपाल द्वारा सरकार की योजनाओं का जिक्र किया जाना प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा भी माना जा रहा है।
अभिभाषण में किन योजनाओं का हुआ जिक्र?
राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने अपने अभिभाषण में पंजाब सरकार की कई प्रमुख योजनाओं का उल्लेख किया। इनमें राज्यभर में शुरू किए गए आम आदमी क्लीनिक, मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं और नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ का जिक्र शामिल था। उन्होंने कहा कि इन क्लीनिकों के जरिए लाखों लोगों को मुफ्त इलाज, परामर्श और दवाइयों की सुविधा मिल रही है। इसके अलावा नशा छोड़ने वालों के पुनर्वास और उपचार के लिए विशेष केंद्र और ओपिओइड-असिस्टेड ट्रीटमेंट क्लीनिक जैसी व्यवस्थाओं का भी उल्लेख किया गया। शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी स्कूलों को मजबूत बनाने, शिक्षकों की भर्ती और स्कूल ऑफ एमिनेंस के विकास का भी जिक्र हुआ। साथ ही 300 यूनिट मुफ्त बिजली, सड़क और बुनियादी ढांचे में सुधार, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और किसानों से जुड़ी योजनाओं का भी उल्लेख किया गया।
राज्यपाल ने मान सरकार की तारीफ की
2022 में पंजाब में भगवंत मान के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद राज्यपाल और सरकार के बीच कई बार मतभेद देखने को मिले। पूर्व राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित और पंजाब सरकार के बीच कई मुद्दों को लेकर टकराव भी हुआ था। 2023 की शुरुआत में एक बड़ा विवाद तब सामने आया था, जब राज्यपाल ने बजट सत्र बुलाने की मंजूरी देने में देरी की थी। इसके बाद राज्य सरकार को मामला सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करना पड़ा था। हालांकि 6 मार्च को दिए गए अपने अभिभाषण में राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने पंजाब सरकार की कई योजनाओं और पहलों का जिक्र किया। करीब पांच पेज के इस भाषण में स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, नशा विरोधी अभियान, बुनियादी ढांचे का विकास और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं जैसे क्षेत्रों में सरकार के कामों को रेखांकित किया गया।

विपक्ष ने क्यों किया विरोध?
राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान विपक्ष ने जोरदार विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा की अगुवाई में कांग्रेस विधायकों ने कई बार हंगामा किया और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। ,राज्यपाल ने विपक्ष से अपील की कि उन्हें अपना संवैधानिक अभिभाषण पूरा करने दिया जाए और उसके बाद सदन में बहस के दौरान अपनी आपत्तियां दर्ज कराई जाएं। हालांकि विरोध जारी रहा और अंत में कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। विपक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि अगर सरकार का कामकाज इतना बेहतर है तो उसके मंत्री राज्यपाल के भाषण के दौरान सदन से बाहर क्यों चले गए।
क्या बदल रहे हैं पंजाब के राजनीतिक समीकरण?
राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया की चार दिवसीय नशा मुक्ति यात्रा ने भी पंजाब की राजनीति में चर्चा को जन्म दिया। यह यात्रा 9 फरवरी को शुरू होकर 12 फरवरी को अबोहर में समाप्त हुई थी और इसका उद्देश्य राज्य में नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाना था। हालांकि 10 फरवरी को फिरोजपुर में यात्रा के दौरान राजनीतिक हलचल भी देखने को मिली। पंजाब बीजेपी के नेता अश्विनी शर्मा और बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी इस कार्यक्रम में शामिल हुए। इसके बाद शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल भी कार्यक्रम में पहुंचे। जब सुखबीर सिंह बादल कार्यक्रम में पहुंचे तो राज्यपाल ने कुछ समय के लिए अपना भाषण रोककर मंच से उनका स्वागत किया। इस घटना ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद पंजाब की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने आरोप लगाया कि इस तरह के कार्यक्रम अकाली दल को फिर से सक्रिय करने और अकाली दल व बीजेपी के बीच नए गठबंधन की जमीन तैयार करने की कोशिश हो सकते हैं।
दूसरी ओर बीजेपी नेताओं का कहना है कि राज्यपाल एक संवैधानिक पद पर होते हैं और वे राजनीतिक विवादों से ऊपर उठकर काम करते हैं। वहीं अकाली दल का भी कहना है कि राज्यपाल का अभिभाषण राज्य सरकार द्वारा तैयार किया जाता है, इसलिए उसमें सरकार की योजनाओं का जिक्र होना स्वाभाविक है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया का यह रुख उनके पूर्ववर्ती बनवारीलाल पुरोहित के कार्यकाल से अलग दिखाई देता है, जिनके समय में पंजाब सरकार और राजभवन के बीच अक्सर टकराव की स्थिति देखने को मिलती थी। ऐसे में अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या पंजाब की राजनीति में टकराव की जगह सहयोग का नया दौर शुरू हो रहा है।




