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रिजेक्शन से ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ तक:संजू सैमसन की संघर्ष से चैंपियन बनने की कहानी

रिजेक्शन से ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ तक:संजू सैमसन की संघर्ष से चैंपियन बनने की कहानी

The Front Desk, आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 भारतीय क्रिकेट के लिए कई यादगार पल लेकर आया, लेकिन इस टूर्नामेंट का सबसे बड़ा नाम रहे Sanju Samson। टूर्नामेंट की शुरुआत में वह टीम की पहली पसंद नहीं थे, लेकिन जब मौका मिला तो उन्होंने ऐसा प्रदर्शन किया कि पूरी दुनिया उनकी बल्लेबाजी की दीवानी हो गई। संजू सैमसन ने सिर्फ 5 मैचों में 321 रन बनाकर भारत की खिताबी जीत में अहम भूमिका निभाई। फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली गई उनकी 89 रनों की तूफानी पारी ने मैच का रुख ही बदल दिया। शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट भी चुना गया। लेकिन यहां तक पहुंचने का उनका सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा। बचपन से लेकर इंटरनेशनल क्रिकेट तक संजू को कई बार रिजेक्शन का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

विराट कोहली की तरह मिला था रिजेक्शन

संजू सैमसन की कहानी कुछ हद तक Virat Kohli जैसी है। कोहली को भी अपने करियर की शुरुआत में दिल्ली क्रिकेट एसोसिएशन के सेलेक्टर्स ने जूनियर स्तर पर रिजेक्ट कर दिया था। कुछ ऐसा ही संजू सैमसन के साथ भी हुआ। दिल्ली में क्रिकेट खेलते समय उन्हें जूनियर स्तर पर सेलेक्टर्स ने टीम में जगह नहीं दी। यह उनके करियर का पहला बड़ा झटका था। लेकिन इस असफलता ने उन्हें तोड़ने के बजाय और मजबूत बना दिया।

पिता के फैसले ने बदल दी जिंदगी

संजू सैमसन का जन्म 11 नवंबर 1994 को केरल के तिरुवनंतपुरम में हुआ था। उनके पिता सैमसन विश्वनाथ Delhi Police में कॉन्स्टेबल थे। नौकरी की वजह से संजू का शुरुआती क्रिकेट करियर दिल्ली में ही शुरू हुआ। लेकिन एक जूनियर टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन के बावजूद उन्हें दिल्ली की अंडर-13 टीम में जगह नहीं मिली। बताया जाता है कि उस टूर्नामेंट में उन्होंने 8 मैचों में 500 से ज्यादा रन बनाए थे, फिर भी सेलेक्टर्स ने उन्हें नजरअंदाज कर दिया। इस घटना ने उनके पिता को झकझोर दिया। बेटे के सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने एक बड़ा फैसला लिया और दिल्ली पुलिस की नौकरी से वॉलंटरी रिटायरमेंट ले लिया। इसके बाद पूरा परिवार वापस केरल के तिरुवनंतपुरम चला गया।

केरल से शुरू हुआ असली सफर

केरल पहुंचने के बाद संजू सैमसन ने और भी कड़ी मेहनत की। अंडर-13 स्तर पर केरल के लिए खेलते हुए उन्होंने 5 मैचों में 973 रन बनाए और टीम की कप्तानी भी की। इसके बाद उनका क्रिकेट करियर तेजी से आगे बढ़ा। सिर्फ 17 साल की उम्र में 2011-12 रणजी ट्रॉफी में उन्होंने केरल के लिए फर्स्ट-क्लास डेब्यू किया। जल्द ही उन्होंने दो शतक और एक अर्धशतक लगाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

IPL से खुला टीम इंडिया का रास्ता

साल 2013 में Rajasthan Royals ने उन्हें आईपीएल में मौका दिया। वह उस समय लीग के सबसे युवा खिलाड़ियों में से एक थे। शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द सीजन का अवॉर्ड भी मिला। आईपीएल में मिले इस मंच ने उनके लिए भारतीय टीम के दरवाजे खोल दिए और धीरे-धीरे वह टीम इंडिया के भरोसेमंद बल्लेबाजों में शामिल हो गए।

विराट कोहली ने भी की तारीफ

टी20 वर्ल्ड कप 2026 में संजू सैमसन के शानदार प्रदर्शन की तारीफ दिग्गज खिलाड़ी विराट कोहली ने भी की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “शानदार टूर्नामेंट खेला! प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट के आप पूरी तरह से हकदार हैं. आपने तब बेहतरीन प्रदर्शन किया जब इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी. आपके लिए बहुत खुश हूं, चेट्टा।”

संघर्ष की मिसाल बने संजू

संजू सैमसन की कहानी इस बात की मिसाल है कि अगर मेहनत, धैर्य और परिवार का साथ हो तो कोई भी सपना सच हो सकता है। दिल्ली में मिला रिजेक्शन, पिता का बड़ा त्याग और लगातार की गई मेहनत ने उन्हें आज विश्व क्रिकेट के सबसे बड़े मंच पर चमका दिया।

टी20 वर्ल्ड कप 2026 में उनकी बल्लेबाजी ने न सिर्फ भारत को चैंपियन बनाया, बल्कि लाखों युवाओं को यह संदेश भी दिया कि रिजेक्शन अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत हो सकता है।

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