ममता बनर्जी का बड़ा दांव: राज्यसभा के लिए 4 चेहरों पर मुहर, क्या है TMC की रणनीति?

ममता बनर्जी का बड़ा दांव: राज्यसभा के लिए 4 चेहरों पर मुहर, क्या है TMC की रणनीति?

द फ्रंट डेस्क : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी All India Trinamool Congress (टीएमसी) ने आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए चार उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है। शुक्रवार देर शाम जारी इस सूची को राजनीतिक हलकों में अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह घोषणा विधानसभा चुनावों से पहले की गई है। टीएमसी की सूची में मंत्री बाबुल सुप्रियो, पूर्व डीजीपी राजीव कुमार, वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी और अभिनेत्री कोयल मल्लिक को शामिल किया गया है। निर्वाचन आयोग के मुताबिक, पश्चिम बंगाल समेत 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होगा।

किन नामों पर लगी मुहर?

राज्यसभा चुनाव के लिए तृणमूल कांग्रेस ने जिन चार नामों पर भरोसा जताया है, वे अलग-अलग क्षेत्रों से आते हैं। पार्टी ने राजनीति, प्रशासन, कानून और सिनेमा—चारों क्षेत्रों का संतुलन साधने की कोशिश की है।

बाबुल सुप्रियो : पूर्व केंद्रीय मंत्री और वर्तमान में ममता बनर्जी सरकार में मंत्री बाबुल सुप्रियो का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है। उन्होंने 2014 में भारतीय जनता पार्टी से राजनीति में कदम रखा और केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे। साल 2021 में उन्होंने बीजेपी छोड़कर तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया। इसके बाद उन्हें राज्य सरकार में अहम जिम्मेदारी मिली। बाबुल सुप्रियो अपनी मुखर वक्तृत्व शैली और राष्ट्रीय स्तर की पहचान के लिए जाने जाते हैं। राज्यसभा में उनका अनुभव और राजनीतिक आक्रामकता पार्टी के लिए उपयोगी मानी जा रही है।

राजीव कुमार : पश्चिम बंगाल के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) रहे राजीव कुमार प्रशासनिक सेवा के अनुभवी अधिकारी माने जाते हैं। वे इससे पहले कोलकाता पुलिस आयुक्त भी रह चुके हैं। कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक प्रबंधन में उनका लंबा अनुभव रहा है। राज्यसभा में उनकी मौजूदगी से टीएमसी को नीति, प्रशासन और आंतरिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर मजबूत तर्क रखने में मदद मिल सकती है।

मेनका गुरुस्वामी : सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी संवैधानिक और जटिल कानूनी मामलों में सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं। उन्हें कानूनी समझ और संवैधानिक बहसों में गहराई के लिए जाना जाता है। राज्यसभा में उनका चयन इस बात का संकेत है कि टीएमसी संसद में कानूनी और नीतिगत मुद्दों पर अपनी दलीलों को और मजबूत करना चाहती है। उनका अनुभव उच्च सदन में पार्टी के पक्ष को प्रभावी ढंग से रखने में सहायक हो सकता है।

कोयल मल्लिक : बंगाली फिल्म इंडस्ट्री की लोकप्रिय अभिनेत्री कोयल मल्लिक को उम्मीदवार बनाकर टीएमसी ने सांस्कृतिक और जन-अपील का दांव खेला है। वे लंबे समय से बंगाल के दर्शकों के बीच एक चर्चित चेहरा रही हैं। उनकी लोकप्रियता और सामाजिक पहचान को देखते हुए पार्टी को उम्मीद है कि वे सांस्कृतिक और सामाजिक मुद्दों पर प्रभावी भूमिका निभा सकेंगी।

टीएमसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर कहा है कि पार्टी को इन चारों उम्मीदवारों की नेतृत्व क्षमता, अनुभव और प्रतिबद्धता पर पूरा भरोसा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन नामों के जरिए ममता बनर्जी ने प्रशासनिक अनुभव, कानूनी विशेषज्ञता, राजनीतिक कौशल और जन-अपील—चारों को साथ जोड़ने की कोशिश की है।

राजनीतिक समीकरण क्या कहते हैं?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी ने चार अलग-अलग क्षेत्रों राजनीति, प्रशासन, कानून और सिनेमा से चेहरों को चुनकर संतुलन साधने की कोशिश की है।

  • बाबुल सुप्रियो के जरिए पार्टी राष्ट्रीय राजनीति और विपक्षी विमर्श में अपनी आवाज को और मजबूत करना चाहती है।
  • राजीव कुमार का नाम प्रशासनिक अनुभव और शासन क्षमता का संकेत देता है।
  • मेनका गुरुस्वामी संसद में कानूनी और संवैधानिक बहसों में पार्टी की धार तेज कर सकती हैं।
  • कोयल मल्लिक को शामिल कर टीएमसी ने सांस्कृतिक और जन-अपील का कार्ड खेला है, जिससे युवा और शहरी वर्ग में संदेश जाए।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह सूची केवल नामों की घोषणा नहीं, बल्कि एक रणनीतिक राजनीतिक संदेश भी है—टीएमसी अपने दायरे को व्यापक बना रही है और हर वर्ग के प्रतिनिधित्व का संकेत दे रही है।

विपक्ष का आरोप

केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने टीएमसी के इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर कुछ नामों को “इनाम” के तौर पर आगे बढ़ाया गया है। बीजेपी का कहना है कि इस चयन के पीछे राजनीतिक हित जुड़े हैं, जबकि टीएमसी इसे विविध अनुभव और विशेषज्ञता का संतुलन बता रही है।

37 सीटों पर चुनाव: राष्ट्रीय तस्वीर क्या है?

निर्वाचन आयोग के अनुसार, 16 मार्च को 37 सीटों पर मतदान होगा। जिन राज्यों में सीटें रिक्त हो रही हैं, उनमें महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, बिहार, ओडिशा, तेलंगाना, असम, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ शामिल हैं। इन चुनावों का असर राज्यसभा में दलों की संख्या संतुलन पर पड़ेगा। भाजपा भी इन सीटों पर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में है। इसलिए यह चुनाव केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि संसद के शक्ति-संतुलन से जुड़ा अहम पड़ाव है।

टीएमसी की यह सूची सिर्फ उम्मीदवारों की घोषणा नहीं, बल्कि एक व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। विधानसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी ने विविध क्षेत्रों के चेहरों को आगे लाकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि उनकी पार्टी प्रशासनिक अनुभव, कानूनी विशेषज्ञता और जन-अपील—तीनों को साथ लेकर चलना चाहती है। अब नजरें 16 मार्च को होने वाले मतदान और उसके नतीजों पर होंगी। इन परिणामों से न सिर्फ पश्चिम बंगाल की राजनीति, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर संसद के समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है।

Share post:

Popular

More like this
Related