द फ्रंट डेस्क : पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने फिरोजपुर फीडर नहर के रेनोवेशन प्रोजेक्ट के पहले चरण का उद्घाटन किया है। राज्य सरकार का कहना है कि यह परियोजना मालवा क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था को नई मजबूती देगी और लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि को सीधा लाभ पहुंचाएगी। लेकिन सवाल यह है कि इस परियोजना की वास्तविक जरूरत क्या थी, इससे जमीन पर क्या बदलाव आएगा और क्या यह दीर्घकालिक समाधान साबित होगी?
क्यों जरूरी था फिरोजपुर फीडर का रेनोवेशन?
फिरोजपुर फीडर नहर को मालवा क्षेत्र की ‘लाइफलाइन’ माना जाता है। पंजाब के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में स्थित यह इलाका परंपरागत रूप से नहरी सिंचाई पर निर्भर रहा है। समय के साथ नहरों में गाद भरने, रिसाव और ढांचे की कमजोरी के कारण पानी की उपलब्धता प्रभावित होती रही। किसानों की शिकायत थी कि खरीफ सीजन के दौरान उन्हें रोटेशन के आधार पर पानी मिलता था, जिससे फसल चक्र प्रभावित होता था। सरकार का दावा है कि नहर की क्षमता सीमित होने के कारण हर साल हजारों क्यूसिक पानी की कमी होती थी। इससे न केवल सिंचाई प्रभावित होती थी, बल्कि भूमिगत जल पर निर्भरता भी बढ़ती गई। पंजाब पहले ही गिरते भूजल स्तर की चुनौती झेल रहा है, ऐसे में नहरी पानी की कमी ने समस्या को और गंभीर बना दिया। रेनोवेशन के पहले चरण में लगभग 15 किलोमीटर हिस्से की कंक्रीट लाइनिंग की गई है, जिससे पानी के रिसाव को कम करने और प्रवाह को सुचारु बनाने की कोशिश की गई है।

कितनी बढ़ी क्षमता और किसे मिलेगा फायदा?
राज्य सरकार के मुताबिक, इस चरण पर करीब 180 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। रेनोवेशन के बाद नहर की क्षमता 11,192 क्यूसिक से बढ़ाकर 13,873 क्यूसिक कर दी गई है, यानी 2,681 क्यूसिक की वृद्धि। तकनीकी रूप से इसका मतलब है कि अधिक मात्रा में पानी तेज़ और नियंत्रित तरीके से खेतों तक पहुंच सकेगा। परियोजना से फिरोजपुर, फरीदकोट, श्री मुक्तसर साहिब और फाजिल्का जिलों को लाभ मिलने की बात कही जा रही है। सरकार का दावा है कि करीब 6,45,200 हेक्टेयर भूमि को बेहतर सिंचाई सुविधा मिलेगी। नहर की गहराई 18 फीट से बढ़ाकर 21 फीट और चौड़ाई 163 फीट से 180 फीट की गई है, जिससे पानी की वहन क्षमता और स्थिरता दोनों में सुधार होगा। अगर ये आंकड़े जमीनी स्तर पर सही साबित होते हैं, तो मालवा क्षेत्र में फसल उत्पादन पर सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।

सरकार का दावा बनाम विपक्ष की शंका
उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर आरोप लगाया कि दशकों तक नहरों की क्षमता बढ़ाने और लाइनिंग जैसे बुनियादी सुधारों की अनदेखी की गई। उनका कहना है कि हर सीजन में किसानों को करीब 1,000 क्यूसिक पानी की कमी झेलनी पड़ती थी और रोटेशन सिस्टम के कारण फसलों पर असर पड़ता था। वहीं विपक्षी दलों का तर्क है कि बड़ी परियोजनाओं की घोषणा और उनके वास्तविक प्रभाव के बीच अंतर होता है। उनका कहना है कि केवल क्षमता बढ़ाने का दावा काफी नहीं है, बल्कि यह देखना होगा कि क्या पानी वास्तव में अंतिम छोर तक पहुंचता है। विपक्ष यह भी सवाल उठा रहा है कि क्या परियोजना का रखरखाव और निगरानी दीर्घकालिक रूप से सुनिश्चित की जाएगी।
सीमावर्ती इलाकों और पानी के बंटवारे पर संदेश
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान पानी के बंटवारे के मुद्दे पर भी स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि पंजाब के पास किसी अन्य राज्य को देने के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है और राज्य के हित सर्वोपरि हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अंतर-राज्यीय जल विवादों को लेकर समय-समय पर राजनीतिक बयानबाज़ी होती रही है। सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति पर भी चर्चा की गई। सरकार का कहना है कि पहले कुछ इलाकों में जल निकासी और दूषित पानी की समस्या थी, जिसे अब वॉटर रिचार्ज सिस्टम के जरिए सुधारा जाएगा। भूजल स्तर बढ़ाने और गांवों को साफ पानी उपलब्ध कराने का भी दावा किया गया है।

सरकार का कहना है कि जब वर्तमान सरकार सत्ता में आई थी, तब केवल 21 प्रतिशत खेतों तक नहरी पानी पहुंचता था, जो अब बढ़कर 68 प्रतिशत हो चुका है। लक्ष्य इसे आने वाले धान सीजन तक 85 प्रतिशत तक ले जाने का है। इसके लिए हजारों किलोमीटर लंबाई के रजवाहों को फिर से चालू करने और मरम्मत करने का काम जारी है। हालांकि, किसी भी सिंचाई परियोजना की असली सफलता खेतों तक पानी की निरंतर और समान आपूर्ति से मापी जाती है। आने वाले फसल चक्र में यह स्पष्ट होगा कि फिरोजपुर फीडर नहर का रेनोवेशन मालवा क्षेत्र के किसानों की आय और उत्पादन पर कितना असर डालता है। फिलहाल सरकार इसे कृषि और जल प्रबंधन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम बता रही है, जबकि राजनीतिक गलियारों में इसके प्रभाव को लेकर बहस जारी है। कुल मिलाकर, यह परियोजना केवल एक नहर सुधार कार्यक्रम नहीं, बल्कि पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था और जल नीति से जुड़ा व्यापक सवाल भी है कि क्या बेहतर बुनियादी ढांचा राज्य की जल संकट चुनौती को कम कर पाएगा? इसका जवाब आने वाले समय में सामने आएगा।




