आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सुपर-8 मुकाबले में साउथ अफ्रीका के खिलाफ मिली हार के बाद टीम इंडिया के चयन और रणनीति को लेकर बहस तेज हो गई है। यह मुकाबला भारत के लिए अहम माना जा रहा था, लेकिन नतीजा उम्मीदों के विपरीत रहा। हार के बाद जहां फैंस में निराशा है, वहीं पूर्व खिलाड़ियों ने भी टीम मैनेजमेंट के फैसलों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। भारत के पूर्व दिग्गज ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने मैच के बाद खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी और दो बड़े निर्णयों को हार की मुख्य वजह बताया। उनका कहना है कि बड़े टूर्नामेंट में प्रयोग की रणनीति टीम पर भारी पड़ सकती है।
क्या रहा मैच का परिदृश्य?
सुपर-8 चरण में भारत और साउथ अफ्रीका के बीच मुकाबला काफी अहम था। दोनों टीमें मजबूत मानी जा रही थीं और इस मैच के नतीजे का असर आगे की स्थिति पर पड़ना तय था। भारत ने टॉस और टीम चयन के दौरान कुछ ऐसे फैसले लिए, जिन पर अब चर्चा हो रही है। बल्लेबाजी क्रम में बदलाव और प्लेइंग-11 में फेरबदल को लेकर क्रिकेट विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है। मैच के दौरान कुछ अहम मौकों पर भारत लय नहीं पकड़ सका, जिसका फायदा साउथ अफ्रीका ने उठाया।

टीम चयन और बल्लेबाजी क्रम पर अश्विन की दो बड़ी आपत्तियां
अश्विन ने सबसे पहले ऑलराउंडर अक्षर पटेल को प्लेइंग-11 में जगह न देने के फैसले पर सवाल उठाया। उनकी जगह वॉशिंगटन सुंदर को शामिल किया गया। अश्विन का तर्क है कि अक्षर लंबे समय से टी20 फॉर्मेट में भरोसेमंद खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने पिछले टी20 वर्ल्ड कप में भी दबाव की स्थिति में अहम साझेदारी निभाई थी। अश्विन के मुताबिक, ऐसे खिलाड़ी को बड़े मुकाबले से बाहर रखना समझ से परे है। उन्होंने कहा कि आईपीएल में मैच-अप की रणनीति काम कर सकती है, लेकिन आईसीसी जैसे वैश्विक टूर्नामेंट में स्थिरता और तय संयोजन ज्यादा अहम होते हैं। बार-बार टीम कॉम्बिनेशन बदलना खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को भी प्रभावित कर सकता है।
अश्विन ने दूसरा बड़ा मुद्दा रिंकू सिंह की बल्लेबाजी क्रम को लेकर उठाया। रिंकू को नंबर 8 पर बल्लेबाजी के लिए भेजा गया, जिसे उन्होंने रणनीतिक गलती बताया। उनका कहना है कि रिंकू जैसे आक्रामक और मैच फिनिश करने की क्षमता रखने वाले खिलाड़ी को इतनी नीचे भेजना टीम की सोच पर सवाल खड़ा करता है। जब टीम में आठ बल्लेबाज शामिल किए गए थे, तब ऐसे खिलाड़ी को टॉप या मिडिल ऑर्डर में मौका मिलना चाहिए था। मैच के दौरान वॉशिंगटन सुंदर को नंबर 5 पर बल्लेबाजी के लिए भेजा गया, जो कई क्रिकेट विश्लेषकों के लिए चौंकाने वाला फैसला था। अश्विन का मानना है कि यह संयोजन स्पष्ट रणनीति की कमी को दर्शाता है।

कप्तानी और टीम मैनेजमेंट पर बहस
इस मुकाबले में टीम की कमान सूर्यकुमार यादव के हाथों में थी। हार के बाद कप्तानी और टीम मैनेजमेंट की रणनीति पर भी चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि आधिकारिक तौर पर टीम प्रबंधन की ओर से किसी गलती को स्वीकार नहीं किया गया है, लेकिन पूर्व खिलाड़ियों की टिप्पणियों ने बहस को और तेज कर दिया है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि सुपर-8 जैसे चरण में छोटे फैसले भी बड़े परिणाम तय करते हैं।

बड़े टूर्नामेंट में स्थिरता क्यों जरूरी?
अश्विन ने अपने बयान में कहा कि बड़े टूर्नामेंट में खिलाड़ियों को स्पष्ट भूमिका देना बेहद जरूरी होता है। जब टीम संयोजन बार-बार बदला जाता है, तो खिलाड़ियों की मानसिक तैयारी और रणनीतिक स्पष्टता प्रभावित हो सकती है। उनका मानना है कि टी20 जैसे छोटे फॉर्मेट में एक-एक ओवर और एक-एक निर्णय मैच की दिशा बदल सकता है। इसलिए टीम चयन में प्रयोग से ज्यादा स्थिरता पर जोर होना चाहिए।
आगे क्या?
यह हार भारत के लिए सुपर-8 की राह को कठिन बना सकती है। अब आने वाले मुकाबले टीम के लिए ‘करो या मरो’ जैसे साबित हो सकते हैं। फिलहाल टीम मैनेजमेंट की ओर से अगले मैच के लिए संयोजन में बदलाव के संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन अश्विन जैसे अनुभवी खिलाड़ी की टिप्पणी ने रणनीति पर पुनर्विचार की जरूरत को रेखांकित किया है। आने वाले मुकाबलों में यह साफ होगा कि टीम इंडिया अपने संयोजन में बदलाव करती है या मौजूदा रणनीति पर भरोसा बनाए रखती है। फिलहाल, साउथ अफ्रीका के खिलाफ मिली इस हार ने सुपर-8 चरण में भारत की चुनौती को और कठिन बना दिया है।




