‘10 मिनट में आ रहा हूं…’ जनकपुरी हादसा: अब तक क्या-क्या हुआ, कहां चूक हुई और कौन जिम्मेदार?

‘10 मिनट में आ रहा हूं…’ जनकपुरी हादसा: अब तक क्या-क्या हुआ, कहां चूक हुई और कौन जिम्मेदार?

गुरुवार रात करीब 11 बजे 25 वर्षीय कमल ने घर फोन कर कहा था कि वह जनकपुरी डिस्ट्रिक्ट सेंटर पहुंच गया है और 10 मिनट में घर आ जाएगा। यही उसकी आख़िरी कॉल साबित हुई। पालम निवासी कमल रोहिणी स्थित HDFC बैंक में काम करता था और रोज़ की तरह बाइक से घर लौट रहा था। तय समय के बाद जब वह नहीं पहुंचा और फोन बंद मिलने लगा, तो परिवार की बेचैनी बढ़ती चली गई।

जनकपुरी में क्या हुआ उस रात

पश्चिमी दिल्ली के जनकपुरी इलाके में सड़क पर जल बोर्ड की खुदाई के बाद एक गहरा गड्ढा बिना बैरिकेडिंग और बिना चेतावनी संकेतों के खुला पड़ा था। अंधेरे में न कोई रिफ्लेक्टर था, न कोई बोर्ड। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, कमल की बाइक असंतुलित हुई और वह सीधे उसी गड्ढे में जा गिरा।

हादसे के बाद मदद क्यों नहीं मिली

परिजनों और चश्मदीदों का आरोप है कि हादसे के तुरंत बाद न तो पुलिस मौके पर पहुंची और न ही कोई आपात सहायता उपलब्ध कराई गई। परिवार का कहना है कि अगर समय रहते मदद मिलती, तो कमल की जान बच सकती थी। इस लापरवाही ने हादसे को मौत में बदल दिया।

रातभर तलाश, लेकिन सिस्टम नदारद

कमल के लापता होने के बाद परिवार पूरी रात उसकी तलाश करता रहा। पहले रोहिणी स्थित ऑफिस पहुंचे, फिर मंगोलपुरी, रोहिणी और जनकपुरी समेत कई थानों के चक्कर लगाए। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने केवल मोबाइल ट्रेसिंग की और कहा कि लोकेशन 200 मीटर के दायरे में है, खुद तलाश कर लें। परिवार का दावा है कि रात करीब डेढ़ बजे वे गड्ढे के पास भी पहुंचे, लेकिन न कोई घेराबंदी थी और न सर्च ऑपरेशन।

FIR और लोकेशन को लेकर उठे सवाल

परिजनों के मुताबिक, जनकपुरी थाने में शिकायत दर्ज कराने पर पुलिस ने कहा कि 24 घंटे बाद ही शिकायत दर्ज होगी। एक भाई का आरोप है कि पुलिस ने पहले लोकेशन साझा की और बाद में उसे डिलीट कर दिया। दोबारा जानकारी मांगने पर यह कहकर मना कर दिया गया कि यह गोपनीय सूचना है। परिवार सवाल उठा रहा है कि इतनी गंभीर स्थिति में यह रवैया क्यों अपनाया गया।

सुबह मिला सबसे बड़ा झटका

सुबह जब परिवार ने दोबारा कमल के नंबर पर कॉल किया, तो फोन पुलिस ने उठाया। बताया गया कि जनकपुरी में गड्ढे से एक शव बरामद हुआ है। परिजन मौके पर पहुंचे तो पता चला कि वह शव कमल का है। परिवार का आरोप है कि कमल रातभर घायल अवस्था में गड्ढे में पड़ा रहा और समय पर मदद न मिलने से उसकी मौत हो गई।

हादसा या रहस्य? उठते अनसुलझे सवाल

इस मामले में कुछ तथ्य जांच को और जरूरी बनाते हैं। कमल की बाइक में बड़ी टूट-फूट नहीं मिली, जबकि आमतौर पर तेज रफ्तार में गिरने पर वाहन क्षतिग्रस्त हो जाता है। एक चश्मदीद ने दावा किया कि हादसे से पहले कमल का किसी व्यक्ति से झगड़ा हुआ था। वहीं, हादसे के तुरंत बाद उसका मोबाइल फोन रहस्यमय ढंग से बंद हो गया। इन बातों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

दिल्ली जल बोर्ड के नियम और जिम्मेदारी

यह हादसा दिल्ली जल बोर्ड की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाता है। नियमों के मुताबिक, खुदाई स्थल पर बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेत और रात में रिफ्लेक्टर अनिवार्य होते हैं। पाइप बिछाने के बाद तय समय में सड़क की मरम्मत भी जरूरी है। जनकपुरी में इन नियमों का पालन क्यों नहीं हुआ, यही अब जांच का अहम बिंदु है।

कार्रवाई और आगे की राह

मामला सामने आने के बाद दिल्ली सरकार ने जल बोर्ड के तीन इंजीनियरों को निलंबित कर दिया और जांच के लिए कमेटी गठित की गई है। रिपोर्ट मांगी गई है, लेकिन परिजन पूछ रहे हैं कि क्या केवल निलंबन काफी है। परिवार निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई और मुआवजे की मांग कर रहा है। जनकपुरी हादसा अब दिल्ली में सड़क सुरक्षा, खुदाई कार्य और प्रशासनिक जवाबदेही की एक बड़ी कसौटी बन चुका है।

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