पहले पार्टी तोड़ी, अब घर तोड़ने पर आमादा: चिराग का चाचा पशुपति पारस पर गंभीर आरोप

पहले पार्टी तोड़ी, अब घर तोड़ने पर आमादा: चिराग का चाचा पशुपति पारस पर गंभीर आरोप

बिहार, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने एक बार फिर अपने चाचा पशुपति कुमार पारस और चाची पर गंभीर आरोप लगाते हुए पारिवारिक विवाद को सार्वजनिक कर दिया है। उन्होंने कहा कि पहले मेरे चाचा ने पार्टी तोड़ी और अब पैतृक संपत्ति पर कब्जा जमाकर घर तोड़ने का काम कर रहे हैं। चिराग पासवान शुक्रवार को बिहार के खगड़िया जिले के शहरबन्नी गांव पहुंचे, जहां उन्होंने अपनी बड़ी मां राजकुमारी देवी से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। इस मुलाकात के बाद चिराग मीडिया से रूबरू हुए और अपने चाचा-चाची पर परिवार को अपमानित करने और संपत्ति हड़पने का आरोप लगाया।

चिराग पासवान ने कहा कि लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के टूटने के बाद यह विवाद अब पारिवारिक संपत्तियों तक जा पहुंचा है। उन्होंने कहा, “पहले मुझे दिल्ली वाले घर से निकाला गया और अब मेरी बड़ी मां को पैतृक गांव के मकान से बेदखल कर दिया गया है। यह बेहद दुखद है कि परिवार के ही लोग अब अपनों को मानसिक और भावनात्मक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं।”

उन्होंने बताया कि शहरबन्नी स्थित रामविलास पासवान का पैतृक घर अब विवाद की जड़ बन चुका है। आरोप है कि पशुपति पारस और दिवंगत रामचंद्र पासवान की पत्नियों ने घर के कई कमरों में ताला लगा दिया है, जिसके चलते राजकुमारी देवी, जो पहले से बीमार चल रही हैं, मानसिक रूप से टूट गई हैं। चिराग ने कहा कि संपत्तियों का पारदर्शी और उचित बंटवारा होना चाहिए।

चिराग ने इस मौके पर फेसबुक पर भी एक पोस्ट किया जिसमें उन्होंने लिखा, “पापा की जन्मभूमि शहरबन्नी में आज अपनी बड़ी मां से मिलकर उनका हाल जाना और आशीर्वाद लिया। कुछ दिनों से परिवार के ही कुछ वरिष्ठ सदस्य, जिनसे मैं उम्र और अनुभव में बहुत छोटा हूं, अपनी आर्थिक महत्वाकांक्षा के चलते मेरी मां को प्रताड़ित कर रहे हैं। ये कदापि स्वीकार्य नहीं है। आने वाले समय में इसका माकूल जवाब मिलेगा।”

राजकुमारी देवी, जो रामविलास पासवान की पहली पत्नी हैं, ने खुद चिराग से संपत्ति के बंटवारे की मांग की थी। बताया जा रहा है कि संपत्ति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है, और राजकुमारी देवी की हालत बिगड़ती जा रही है। बातचीत के दौरान वह काफी भावुक हो गईं और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।

चिराग पासवान ने कहा कि दिल्ली से लेकर शहरबन्नी तक जो भी संपत्तियां हैं, उनका न्यायपूर्ण तरीके से बंटवारा जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी सदस्य को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

रामविलास पासवान के निधन के बाद लोजपा दो भागों में टूट गई थी—एक धड़ा चिराग पासवान के नेतृत्व में ‘लोजपा (रामविलास)’ के रूप में, जबकि दूसरा धड़ा पशुपति कुमार पारस के नेतृत्व में ‘रालोजपा’ के रूप में सक्रिय है। लेकिन अब यह राजनीतिक दरार पारिवारिक संपत्तियों के विवाद में तब्दील हो गई है, जिसका असर भावनात्मक रूप से पूरे परिवार पर दिखाई दे रहा है।

चिराग पासवान ने अंत में कहा, “मैं चाहूंगा कि यह विवाद बातचीत और आपसी समझौते से सुलझे, लेकिन अगर ऐसा नहीं होता तो मैं कानूनी रास्ता भी अपनाने को तैयार हूं।”

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