4-5 साल पहले हमें कांग्रेस के साथ विलय करने को कहा था- प्रशांत किशोर के ‘ऑफर’ वाले दावे पर बोले नीतीश कुमार

4-5 साल पहले हमें कांग्रेस के साथ विलय करने को कहा था- प्रशांत किशोर के ‘ऑफर’ वाले दावे पर बोले नीतीश कुमार

Nitish Kumar on Prashant Kishor: बिहार में अपनी जन सुराज यात्रा के दौरान हाल ही में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने दावा किया था कि सीएम नीतीश कुमार ने कुछ दिन पहले उनसे कहा था कि वो फिर से उनके पास आकर काम संभालें। पीके ने कहा कि उन्होंने मना कर दिया था। प्रशांत किशोर के इस दावे के बारे में पूछे जाने पर बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने 4-5 साल पहले हमें कांग्रेस के साथ विलय करने को कहा था।

प्रशांत किशोर के ऑफर वाले दावे पर बात करते हुए नीतीश कुमार ने कहा, “यह झूठ है, उन्हें जो बोलना है बोले, हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं है। चार-पांच साल पहले उन्होंने मुझसे कहा था कि कांग्रेस के साथ अपनी पार्टी का विलय कर लीजिए।”

बीजेपी में गए हैं पीके: बिहार सीएम ने आगे कहा, “वो ऐसे ही बोलते रहते हैं। सुन लीजिए। हम तो दिल्ली में भी और पटना में भी जो कहना था कह दिए, अब क्या रोज-रोज बोलेंगे। वो मेरे साथ रहता था, मेरे घर में रहता था, अब क्या हम बोलें। अब जिसको जहां जाना है वह जाएगा।” उन्होंने कहा, “इन लोगों का कोई ठिकाना नहीं है। अभी जहां गया है, बीजेपी में गए हैं तो उसी के मुताबिक काम कर रहे हैं। हम नहीं बुलाए थे उसे, खुद ही आया था। अब वह कुछ भी बोलता हैं, हम कुछ जवाब नहीं देते हैं।”

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पीके ने किया था सीएम से ऑफर मिलने का दावा: नीतीश कुमार ने कहा कि वह बीजेपी के साथ ही है। अच्छा है उसे जगह मिल जाए, केंद्र में। हमारा विरोध, इनका विरोध इसलिए ही तो कर रहा है। दरअसल, जमुनिया में जन सुराज यात्रा के दौरान पीके ने कहा कि नीतीश कुमार की ख्वाहिश थी कि वो उनके साथ फिर से जुड़ जाए। लेकिन उनका तर्क था कि ये अब मुमकिन नहीं हो पाएगा, क्योंकि वह 3500 किलोमीटर लंबी यात्रा पर फोकस कर रहे हैं।

सभी पार्टियां बीजेपी के खिलाफ एकजुट: वहीं, दूसरी ओर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव और राबड़ी देवी के खिलाफ CBI के चार्जशीट दाखिल करने पर नीतीश कुमार ने लालू और उनके परिवार का बचाव किया। शनिवार (8 अक्टूबर) को मीडिया से बात करते हुए करते हुए बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में कुछ भी नहीं है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी आरजेडी के मुखिया के पीछे पड़ी है क्योंकि सभी पार्टियां अब बीजेपी के खिलाफ एकजुट हो गई हैं।

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