नई दिल्ली: लोकसभा का बजट सत्र शुक्रवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया, जिसके साथ ही 31 जनवरी से शुरू हुआ यह सत्र संपन्न हो गया। इस बार संसद ने 16 अहम विधेयकों को पारित किया, जिनमें वक्फ संशोधन विधेयक और वित्त विधेयक प्रमुख रहे। सत्र के दौरान लोकसभा की उत्पादकता 118 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई, जिसे सरकार ने उपलब्धि बताया, वहीं विपक्ष ने कई विधेयकों को बिना चर्चा के पारित किए जाने पर तीखी आपत्ति जताई।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सत्र के समापन पर अपने विदाई भाषण में जानकारी दी कि बजट सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य संपन्न हुए। उन्होंने कहा कि इस सत्र की उत्पादकता पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर रही और संसद ने अपने निर्धारित कार्यों से अधिक कार्य किया।
वक्फ विधेयक पर उठा विवाद
सत्र के अंतिम दिन कांग्रेस नेता सोनिया गांधी पर की गई टिप्पणी को लेकर विपक्ष ने जोरदार विरोध जताया। विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी करते हुए सदन के भीतर प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ संशोधन विधेयक जैसे महत्वपूर्ण कानून को बिना पर्याप्त चर्चा के पारित कर दिया गया, जो लोकतांत्रिक परंपराओं और संसदीय मर्यादाओं के खिलाफ है।
गौरतलब है कि मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024 के तहत 1923 के पुराने कानून को निरस्त कर दिया गया है। यह विधेयक दोनों सदनों से पारित हो चुका है, लेकिन इसके विरोध में विपक्ष का सुर लगातार मुखर रहा।
16 विधेयक हुए पारित, बजट को मिली मंजूरी
बजट सत्र के दौरान लोकसभा में 16 प्रमुख विधेयकों को पारित किया गया। वित्त विधेयक 2025 को मंजूरी मिलने के साथ सरकार ने बजटीय कार्य को पूरा कर लिया। संसद ने मणिपुर विनियोग विधेयक, 2025 को भी मंजूरी दी, जिससे केंद्र शासित प्रदेश मणिपुर के लिए बजट पास किया गया।
पारित हुए प्रमुख विधेयक इस प्रकार रहे:
- वित्त विधेयक 2025
- बैंकिंग कानून (संशोधन) विधेयक, 2024
- आव्रजन और विदेशी विधेयक, 2025 (विपक्ष के वॉकआउट के बीच पारित)
- मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024
- बॉयलर्स विधेयक, 2024 (100 साल पुराने कानून की जगह)
- तेल क्षेत्र (विनियमन और विकास) संशोधन विधेयक, 2024
- गोवा विधानसभा क्षेत्रों में अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधित्व का पुनर्समायोजन विधेयक, 2024
- रेलवे (संशोधन) विधेयक, 2024
- आयकर विधेयक, 2025
उत्पादकता के आंकड़े और विपक्ष की चिंता
लोकसभा की उत्पादकता इस सत्र में 118 फीसदी से अधिक रही। सरकार ने इसे लोकतंत्र की सक्रियता का संकेत बताया, लेकिन विपक्ष ने कहा कि महज उत्पादकता का आंकड़ा मायने नहीं रखता जब विधायिका में चर्चा का समय कम हो जाए। कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके समेत कई विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सरकार ने बहुमत के दम पर विधेयकों को जल्दबाज़ी में पारित किया, जिससे लोकतांत्रिक संवाद कमजोर पड़ा।
सत्र की शुरुआत और समापन
बजट सत्र की शुरुआत 31 जनवरी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण से हुई थी। सत्र का पहला चरण 13 फरवरी तक चला और दूसरा चरण 10 मार्च को शुरू हुआ, जो 5 अप्रैल को समाप्त हुआ। समापन के अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सांसदों को उनकी सक्रिय भागीदारी के लिए धन्यवाद दिया और संसद की गरिमा बनाए रखने की अपील की।
बजट सत्र 2025, विधायी दृष्टिकोण से भले ही सफल रहा हो, लेकिन विपक्ष और सरकार के बीच टकराव, वक्फ विधेयक पर विवाद, और बिना चर्चा विधेयक पारित करने की परंपरा को लेकर चिंता ने संसद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना होगा कि आगामी सत्र में इन चिंताओं को कैसे संबोधित किया जाता है।




