यूं ही नहीं गुलाम नबी आजाद ने दिया इस्तीफा, जानें- फैसले के पीछे की ये 5 बड़ी वजहें

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आज़ाद – लंबे समय से पार्टी से नाराज़ थे – उन्होंने जम्मू-कश्मीर में पार्टी के एक प्रमुख पद से इस्तीफा दे दिया है, जो अंदरूनी विद्रोह का एक संकेत है. पार्टी ने उन्हों प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाया था लेकिन नियुक्ति के कुछ ही देर बाद उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया. इतना ही नहीं, उन्होंने पार्टी की जम्मू-कश्मीर राजनीतिक मामलों की समिति से भी इस्तीफा दे दिया है.

गुलाम नबी आज़ाद कांग्रेस के एक अनुभवी नेता हैं और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री के अलावा वो केन्द्र में मंत्री भी रहे हैं और पार्टी में भी कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है. उन्हें सोनिया गांधी का राजनीतिक सलाहकार भी माना जाता है. आज़ाद उन 23 नेताओं के समूह में से एक हैं, जिन्होंने पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी को दो साल पहले एक विस्फोटक चिट्ठी लिखा था, जिसमें संगठनात्मक परिवर्तन की मांग की गई थी. सूत्रों ने उनके पद छोड़ने की ये पांच वजहें बताई है…

  1. पहला, गुलाम नबी आजाद अपने अनुभव और कद को देखते हुए खुद को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करवाना चाहते हैं. जब भी चुनाव हो, आजाद खुद को राज्य के सबसे बड़े नेता के रूप में ड्राइविंग सीट पर चाहते हैं. समर्थकों की दलील है कि ये उनका आखिरी चुनाव हो सकता है लिहाजा उनको पूरा सम्मान देना चाहिए.
  2. दूसरा, तारिक हमीद कर्रा जैसे विवादित नेता के अंडर में एक कमेटी में रखा जाना भी आजाद को नागवार गुजरा है.
  3. तीसरा, आजाद का मानना है की जब वे पहले से ही कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य हैं, सोनिया गांधी को सलाह देने वाली पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी के अहम अंग हैं, तो राज्य में इसी तरह की कमेटी में रखने का कोई औचित्य नहीं है. इससे वो मानते हैं कि उनका कद छोटा होता है.
  4. चौथा, कमेटी के बाकी सदस्यों को नामित करते वक्त आजाद से सलाह नहीं ली गई. इस वजह से राज्य स्तर के कई नेता नाराज़ भी हैं.
  5. पांचवां, गुलाम नबी आजाद को कैंपेन कमेटी का अध्यक्ष बनाने की घोषणा से पहले संगठन महासचिव वेणुगोपाल ने वरिष्ठ नेताओं को सूचित करने की परंपरा का ध्यान नहीं दिया वरना, ये बातें वहीं हो जाती और मामला बाहर नहीं आता.

पार्टी सूत्रों के मुताबिक आजाद से बात कर के मामले को सुलझा लिया जाएगा, जहां तक CM चेहरा देने की बात है, तो वो चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी हो सकता है, आजाद सबसे वरिष्ठ नेता होने के नाते पूरी तरह से इस पद के लिए योग्य हैं, ऐसा पार्टी मानती भी है. सूत्रों ने बताया कि समय पर फैसला लिया जायेगा.

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