प्रेम बाईसा की मौत पर SIT का बड़ा खुलासा, साध्वी को दिए गए थे कई इंजेक्शन,पर्दे के पीछे की पूरी कहानी

प्रेम बाईसा की मौत पर SIT का बड़ा खुलासा, साध्वी को दिए गए थे कई इंजेक्शन,पर्दे के पीछे की पूरी कहानी

प्रसिद्ध कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अहम जानकारियां साझा की हैं। SIT प्रमुख एसीपी छवि शर्मा ने बताया कि पूछताछ के दौरान कंपाउंडर देवी सिंह ने स्वीकार किया है कि उसने साध्वी को केवल एक नहीं, बल्कि एक से अधिक इंजेक्शन दिए थे।

एसीपी छवि शर्मा के अनुसार, कंपाउंडर का दावा है कि उसने डेक्सोना के अलावा कुछ अन्य इंजेक्शन भी लगाए थे। हालांकि, इन इंजेक्शनों की प्रकृति, दवाओं के नाम और उनकी मात्रा को लेकर जांच अभी जारी है। साथ ही, देवी सिंह की शैक्षणिक योग्यता और बैकग्राउंड की भी गहन पड़ताल की जा रही है।


साध्वी से जुड़ा हर व्यक्ति शक के दायरे में

SIT का कहना है कि इस मामले से जुड़े सभी लोग फिलहाल संदेह के घेरे में हैं और किसी भी एंगल को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा। एसीपी छवि शर्मा ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने में अभी 2 से 3 दिन का समय लग सकता है। जरूरत पड़ने पर साध्वी के पिता से भी पूछताछ की जा सकती है।


बैंक खातों की हो रही जांच

SIT की जांच सिर्फ मेडिकल पहलू तक सीमित नहीं है। आश्रम से जुड़े सभी बैंक खातों की जांच की जा रही है। इसके साथ ही, आश्रम से जुड़े व्यक्तियों के निजी खातों को भी खंगाला जा रहा है, ताकि किसी संदिग्ध लेनदेन का पता लगाया जा सके। फिलहाल मेडिकल, आर्थिक और परिस्थितिजन्य सभी पहलुओं को जोड़कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है, जिसमें पोस्टमार्टम रिपोर्ट को सबसे अहम कड़ी माना जा रहा है।


देवी सिंह को नोटिस

SIT ने कंपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित को CRPC की धारा 94 के तहत नोटिस जारी किया है। उनसे नर्सिंग डिग्री और उससे जुड़े सभी दस्तावेज मांगे गए हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या उनकी डिग्री वैध है और क्या उन्हें इंजेक्शन देने का अधिकार था। नोटिस में यह जानकारी भी मांगी गई है कि कौन-सी दवाएं, कितनी मात्रा में और कहां से लाई गई थीं। उनके मोबाइल नंबर और कॉल डिटेल रिकॉर्ड भी जांच में शामिल किए गए हैं।


प्रेक्षा अस्पताल को भी नोटिस

SIT ने प्रेक्षा अस्पताल को भी CRPC की धारा 94 के तहत नोटिस जारी किया है। अस्पताल से इलाज से जुड़े सभी कागजात, मरीज का मेडिकल रिकॉर्ड और घटना वाले दिन का CCTV फुटेज मांगा गया है। इसका उद्देश्य यह जानना है कि साध्वी प्रेम बाईसा को अस्पताल किस हालत में लाया गया और इलाज के दौरान क्या प्रक्रियाएं अपनाई गईं।


फॉरेंसिक जांच को भी अहम माना जा रहा

फॉरेंसिक जांच को मामले में निर्णायक माना जा रहा है। FSL को भेजे गए सभी पत्रों और दस्तावेजों की जांच की जा रही है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि विसरा और अन्य सैंपल सही समय और सही प्रक्रिया के तहत भेजे गए थे या नहीं। इसके साथ ही आर्थिक पहलुओं की भी पड़ताल जारी है।


चल-अचल संपत्ति की भी जांच

SIT साध्वी प्रेम बाईसा और उनसे जुड़े लोगों की चल-अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर रही है। यह देखा जा रहा है कि कहीं किसी तरह का संपत्ति विवाद या आर्थिक दबाव तो इस मामले से जुड़ा नहीं था। आयकर से जुड़े रिकॉर्ड, ITR और अन्य आय स्रोतों के आधार पर आय-व्यय में किसी गड़बड़ी की भी जांच की जा रही है।


यात्राओं की जानकारी जुटा रही SIT

जांच एजेंसियां साध्वी प्रेम बाईसा की हाल की यात्राओं का विवरण भी इकट्ठा कर रही हैं—वे कहां गईं, किन लोगों से मिलीं और किन स्थानों पर उनका आना-जाना रहा। डिजिटल जांच के तहत कॉल डिटेल रिकॉर्ड, इंटरनेट उपयोग और सोशल मीडिया गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।


सोशल मीडिया की भी हो रही पड़ताल

सोशल मीडिया से जुड़े डिवाइस और अकाउंट्स की भी जांच की जा रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि मौत से पहले या बाद में पोस्ट किसने, कब और किस डिवाइस से किया। इसके अलावा आश्रम स्टाफ, सेवादार, अनुयायी और घटना के दिन मौजूद अन्य लोगों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।

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