चंडीगढ़ , 30दिसंबर, 2020

अंबाला, पंचकूला, सोनीपत, रेवारी के धरुहेरा, रोहतक के सांपला और हिसार के उकालना में बीते रविवार को नगर निगम के चुनाव हुए थे. बुधवार को सुबह आठ बजे से मतगणना शुरू हुई थी. यहां बीजेपी-जेजेपी की हार के पीछे किसान आंदोलन को माना जा रहा है

दिल्ली की सीमाओं पर महीने भर से ज्यादा वक्त से हजारों की संख्या में कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. इनमें पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसान शामिल हैं. ऐसे में इस बीच हरियाणा के स्थानीय निकाय चुनावों में बीजेपी-जेजेपी गठबंधन को बड़ा झटका लगा है. नगर निगम के चुनावों में सत्तारूढ़ गठबंधन को सोनीपत और अंबाला की मेयर की सीट से हाथ धोना पड़ा है. उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला की पार्टी जननायक जनता पार्टी हिसार के उकालना और रेवारी के धरुहेरा में अपने घर के मैदान में चुनाव हार गई है.  यह बड़ा झटका गठबंधन को राज्य के चुनावों के अगले साल ही सहना पड़ रहा है.

बता दें कि अंबाला, पंचकूला, सोनीपत, रेवारी के धरुहेरा, रोहतक के सांपला और हिसार के उकालना में बीते रविवार को नगर निगम के चुनाव हुए थे. बुधवार को सुबह आठ बजे से मतगणना शुरू हुई थी.

कांग्रेस की सोनीपत में 14,000 वोटों से जीत हुई है. निखिल मदान सोनीपत के पहले मेयर बनेंगे. कांग्रेस का दावा है कि कृषि कानूनों के खिलाफ गुस्से के चलते बीजेपी को हारना पड़ा है. कांग्रेस नेता श्रीवत्स ने ट्वीट कर कहा, ‘कांग्रेस बड़े अंतर से सोनीपत के मेयर का चुनाव जीत गई है. कांग्रेस: 72,111, BJP: 58,300. ध्यान दें कि सोनीपत सिंघू बॉर्डर के ठीक बगल में है और हरियाणा के किसान आंदोलन का केंद्र है.’

अंबाला में हरियाणा जनचेतना पार्टी की शक्ति रानी शर्मा मेयर बनने वाली हैं. उनकी 8,000 वोटों के अंतर से जीत हुई है. वो HJP के अध्यक्ष विनोद शर्मा (पूर्व कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री) की पत्नी हैं. उनका बेटा ही मनु शर्मा है, जिसे जेसिका लाल मर्डर केस में दोषी घोषित किया गया था.

बीजेपी पंचकूला में आगे चल रही थी. हालांकि, उसकी गठबंधन पार्टी JJP रेवारी और हिसार की अपनी सीटों से हाथ धो चुकी है. किसान आंदोलन ने जेजेपी को तब धर्मसंकट में डाल दिया था, जब पार्टी की पूर्व सहयोगी शिरोमणि अकाली दल ने हाल ही में बीजेपी-नीत एनडीए से नाता तोड़ लिया था. अकाली दल ने कृषि कानूनों के विरोध में गठबंधन छोड़ा था. इसके बाद दुष्यंत चौटाला ने भी कहा था कि वो किसानों को मिनिमम सपोर्ट प्राइस सुनिश्चित न किए जाने की स्थिति में एनडीए छोड़ देंगे.

पिछले हफ्ते उन्हें अपने ही विधानसभा क्षेत्र- जींद के ऊचां कलां- में गांव वालों का विरोध झेलना पड़ा था, जहां लोगों ने उनके लिए बनाए गए हैलीपैड को खोद दिया था. इसी तरह हरियाणा के कई गांवों ने गठबंधन के नेताओं की एंट्री को बंद कर दिया था.

पिछले महीने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की सरकार की तब बहुत आलोचना हुई थी, जब यहां पर प्रदर्शनकारी किसानों को आगे बढ़ने से रोकने के उनपर वॉटर कैनन और लाठियां चलवाई गई थीं.