नई दिल्ली, 12जनवरी 2021

किसान आंदोलन और तीन कृषि कानून के खिलाफ सोमवार (11 जनवरी) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर समिति गठित करने का सुझाव दिया है। जिसे किसान संगठन ने मानने से इनकार कर दिया है। किसान संगठन का कहना है कि वो सुप्रीम कोर्ट के किसी भी फैसले का सम्मान करेंगे लेकिन सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गठित किसी भी समिति के सामने पेश नहीं होंगे। प्रदर्शनकारी किसानों ने एक बयान में कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित एक पैनल के सामने पेश नहीं होंगे। उन्होंने कहा है कि वो सिर्फ तीन विवादास्पद कानून को निरस्त करना चाहते हैं। किसानों का आंदोलन आज मंगलवार (12 जनवरी) को 48वें दिन में प्रवेश कर रहा है।

संयुक्ता किसान मोर्चा ने एक बयान में कहा है, “सभी किसान संगठन माननीय सर्वोच्च न्यायालय के सुझावों का स्वागत करते हैं कि वे कृषि कानूनों को लागू कर सकें। लेकिन किसान सामूहिक रूप से और व्यक्तिगत रूप से माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति के समक्ष किसी भी कार्यवाही में भाग लेने के लिए तैयार नहीं हैं।”

किसानों ने समित को लेकर कहा है कि इसके पीछे केंद्र सरकार की जिद और किसानों के प्रति लापरवाह रवैये जिम्मेदार है। किसान संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार की रुख की वजह से कोर्ट ने यह फैसला लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा था कि केंद्र सरकार ने किसान आंदोलन को जिस तरह से हैंडल किया है वो निराशाजनक है।

किसानों ने कहा कि वे एक पैनल के सामने पेश नहीं होने के अपने फैसले में एकमत हैं। उन्होंने कहा, हमने अपने वकीलों से मुलाकात की और समिति के सुझावों पर पक्ष और विपक्ष के विचार-विमर्श के बाद, हमने सर्वसम्मति से फैसला किया है कि किसी भी समिति के समक्ष हम नहीं जाएंगे। सरकार के अड़ियल रवैये के कारण सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला लेने का सोचा होगा।

इधर केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारी किसानों द्वारा किसानों द्वारा 26 जनवरी को ट्रेक्टर रैली ना निकालने को लेकर एक याचिक डाली है। सरकार ने यायिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि 26 जनवरी को किसानों के द्वारा ट्रैक्टर रैली न निकालने का आदेश दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर भी आज (12 जनवरी) सुनवाई कर सकता है।