नई दिल्ली, 21जनवरी 2021

फेस्ट‍िव सीजन को देखते हुए अमेजन (Amazon), फ्ल‍िपकार्ट और अन्य ई-कॉमर्स कंपनियों की तरफ से विशेष ऑफर चलाए जा रहे हैं. ऑफर्स, डिस्काउंट और ग्राहकों को अपनी ओर खींचने वाली इस होड़ के बीच अमेजन को एक भारी नुकसान भी झेलना पड़ा है. यह मामला 2014 का है. दिसंबर 2014 में अमेजन ने अपनी साइट पर एक लैपटॉप (Amazon laptop Case) महज 190 रुपये में लिस्ट किया था. इस लैपटॉप को ओडिशा (Odisha) के एक लॉ के छात्र सुप्रियो रंजन ने बुक किया था. लेकिन बाद में अमेजॉन ने यह प्रोडक्ट उसे डिलीवर नहीं किया. इस पर वह छात्र कंज्यूमर फॉरम पहुंचा. जहां उसने अमेजॉन की श‍िकायत की.

छात्र की शिकायत सुनने के बाद ओडिशा राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने Amazon.in को मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के मुआवजे के रूप में 40,000 रुपये का भुगतान करने के साथ-साथ खरीदार को दंडात्मक क्षति और मुकदमेबाजी की लागत के लिए 5,000 रुपये का भुगतान करने का भी निर्देश दिया है.

लैपटॉप के कारण हुआ पढ़ाई का नुकसान!
छात्र की शिकायत और सुनवाई के दौरान बार और बेंच को यह स्पष्ट नहीं हो है सका कि कंपनी ने विशेष रूप से कौन से लैपटॉप की लिस्टिंग की थी. बेंच ने माना कि कंपनी की इस लापरवाही के कारण छात्र को 22,899 रुपये का एक और लैपटॉप खरीदना पड़ा, जिसके कारण उसे अपने एजुकेशनल प्रोजेक्ट्स को पूरा में देरी हुई.

आयोग ने अमेजन की सर्विस पर उठाए सवाल
आयोग ने फैसला सुनाया कि 23,499 रुपये की मूल कीमत वाला एक लैपटॉप अमेजन शॉपिंग वेबसाइट पर 190 रुपये में सूचीबद्ध किया गया था और इसका मतलब यह है कि 23,309 रुपये की प्रोमोशनल छूट लैपटॉप पर दी गई थी. आयोग का यह भी कहना है कि इस मामले में अमेजन न केवल शिकायतकर्ता को उचित सेवा प्रदान करने में लापरवाही बरत रहा है, बल्कि अनुचित व्यवहार भी किया है, जिसके कारण उस पर यह जुर्माना लगाया गया है.